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दशहरा-दिवाली पर हवाई सफर में जेब पर डाका: दिल्ली-बेंगलुरु समेत प्रमुख रूट्स पर 100% से 300% तक उछला किराया, यात्रियों के उड़े होश

आगामी त्योहारी सीजन यानी दशहरा, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ महापर्व पर घर जाने की योजना बना रहे लाखों यात्रियों और कामकाजी पेशेवरों को विमानन कंपनियों ने बड़ा झटका दिया है। ट्रेनों में बुकिंग खुलते ही सीटें फुल होने और 'रिग्रेट' (Regret) दिखने के बाद जब लोगों ने हवाई सफर का रुख किया, तो फ्लाइट टिकटों के बेतहाशा बढ़े हुए दाम देखकर उनके होश उड़ गए हैं। दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरों और क्षेत्रीय रूट्स पर हवाई किराया सामान्य दिनों की तुलना में 50 फीसदी से लेकर 300 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ चुका है।

देश के सबसे व्यस्त और आईटी पेशेवरों के पसंदीदा रूट दिल्ली-बेंगलुरु (Delhi-Bengaluru) पर टिकटों के दाम में आए अप्रत्याशित उछाल ने यात्रियों के पूरे यात्रा बजट को बिगाड़ कर रख दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और किराए पर लगाम लगाने की गुहार लगाई है।

दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर टिकटों में आग: राउंड ट्रिप 35,000 रुपये के पार

सामान्य दिनों में दिल्ली से बेंगलुरु का एक तरफा नॉन-स्टॉप हवाई टिकट अमूमन ₹5,000 से ₹6,500 के बीच मिल जाता है, जबकि दोनों तरफ (Round Trip) का किराया ₹11,000 से ₹14,000 के दायरे में रहता था। लेकिन दशहरा और दिवाली के पीक फेस्टिव दिनों के लिए यह किराया बेकाबू हो चुका है।

सीटीआई (CTI) द्वारा नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर आने-जाने का किराया बढ़कर ₹30,000 से ₹35,000 तक पहुंच गया है। वहीं पीक तिथियों पर अंतिम समय के लिए एक तरफ का किराया ही ₹18,000 से ₹20,000 का आंकड़ा पार कर रहा है। दक्षिण भारत से उत्तर भारत और दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले युवाओं के लिए यह खर्च किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बजट के बराबर बैठ रहा है।

अन्य प्रमुख रूट्स का भी हाल बेहाल: मुंबई, पटना, कोलकाता के दाम आसमान पर

केवल दिल्ली-बेंगलुरु ही नहीं, बल्कि देश के अन्य सभी प्रमुख घरेलू रूट्स पर भी डायनेमिक फेयर सिस्टम के चलते किराए में आग लगी हुई है:

  • दिल्ली-मुंबई रूट: पहले जहां इस रूट पर दोनों तरफ का किराया ₹10,000 के आसपास रहता था, अब त्योहारी दिनों में यह ₹18,000 से ₹25,000 तक पहुंच चुका है।

  • दिल्ली-पटना और दरभंगा: पूर्वांचल और बिहार जाने वाले प्रवासियों के लिए यह रूट सबसे व्यस्त रहता है। आम दिनों में ₹3,500 से ₹4,500 में मिलने वाला टिकट दिवाली और छठ से पहले ₹12,500 से ₹16,000 के बीच बिक रहा है।

  • दिल्ली-कोलकाता: दुर्गा पूजा और दिवाली के मद्देनजर दिल्ली-कोलकाता का किराया ₹11,000 से बढ़कर ₹20,000 तक पहुंच गया है।

  • दिल्ली-अहमदाबाद: नवरात्रि और दिवाली के सीजन में इस रूट पर आने-जाने का टिकट ₹18,000 से ₹20,000 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पहले ₹10,000 के आसपास उपलब्ध था।

  • क्षेत्रीय और टियर-2 रूट्स: जहां केवल एक ही एयरलाइन की सीधी उड़ान है, वहां हालत और भी बदतर है। कोलकाता से देवघर का टिकट ₹2,800 से उछलकर ₹12,500 और बेंगलुरु से झारसुगुड़ा का टिकट ₹4,200 से बढ़कर ₹16,200 तक पहुंच गया है।

सीटें घटाकर किराया बढ़ाने का आरोप: CTI ने खोला मोर्चा

हवाई किराए में अचानक आई इस तेजी पर व्यापारियों के संगठन सीटीआई (CTI) ने एयरलाइन कंपनियों के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि त्योहारों में मांग बढ़ने के बावजूद विमानन कंपनियों ने अपनी क्षमता (सीटों) में जानबूझकर कटौती की है ताकि आर्टिफिशियल किल्लत पैदा कर महंगे टिकट बेचे जा सकें।

वैश्विक एविएशन डेटा एजेंसी ओएजी (OAG) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि हाल के हफ्तों में घरेलू विमानन क्षमता में करीब 5.6% की कमी देखी गई है, जिसमें प्रमुख घरेलू एयरलाइनों ने 4.5% से लेकर 8.8% तक सीटें कम की हैं। इसके अलावा, एयरलाइंस द्वारा 3 दिन से 2 वर्ष तक के शिशुओं (Infants) की यात्रा फीस को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किए जाने पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है, क्योंकि शिशुओं के लिए अलग सीट भी आवंटित नहीं की जाती।

लखनऊ, कानपुर, नोएडा और पूरे यूपी-बिहार के यात्रियों पर क्या पड़ रहा असर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट), कानपुर (चकेरी एयरपोर्ट), वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह त्योहार भारी आर्थिक संकट लेकर आया है। दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में कार्यरत यूपी और बिहार के लाखों युवा दिवाली और छठ पर अपने घर लौटते हैं।

कानपुर से मुंबई और बेंगलुरु आने-जाने के टिकट पीक दिनों में ₹15,000 से ₹22,000 तक पहुंच रहे हैं। लखनऊ और वाराणसी आने वाली उड़ानों में भी सभी इकोनॉमी सीटें लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं और जो बची हैं वे प्रीमियम दामों पर उपलब्ध हैं। चूंकि लंबी दूरी की नियमित एक्सप्रेस और राजधानी ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट महीनों पहले ही बंद हो चुकी है, इसलिए आम नौकरीपेशा परिवार या तो अपने घर जाने का कार्यक्रम रद्द करने पर मजबूर हो रहे हैं या फिर निजी बसों और टैक्सियों के महंगे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

विमानन कंपनियों की दलील: क्यों महंगे हो रहे हैं टिकट?

विमानन क्षेत्र के जानकारों और एयरलाइंस का कहना है कि हवाई किराए पूरी तरह एल्गोरिदम और 'डायनेमिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) प्रणाली पर आधारित होते हैं। जैसे-जैसे किसी उड़ान की शुरुआती सस्ती बकेट की सीटें बुक होती जाती हैं, बची हुई सीटों के दाम अपने आप ऊपर चढ़ते चले जाते हैं।

इसके अलावा कंपनियों ने विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का भी हवाला दिया है। तेल कंपनियों द्वारा एटीएफ के दामों में 5% से अधिक की वृद्धि की गई है। चूंकि किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में 35 से 40 फीसदी हिस्सा अकेले ईंधन का होता है, इसलिए बढ़ती परिचालन लागत और नए विमानों के इंजनों की वैश्विक मेंटेनेंस समस्याओं को किराए में वृद्धि का बड़ा कारण बताया जा रहा है।

सीटीआई और यात्रियों की मांग: किराए पर लगे अपर कैप

यात्री संगठनों और ट्रेड एसोसिएशनों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और केंद्र सरकार से मांग की है कि त्योहारों के दौरान एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम लगाई जाए। यात्रियों का कहना है कि जब कोरोना महामारी या आपात स्थितियों में सरकार किराए की अधिकतम सीमा (Airfare Upper Cap) तय कर सकती है, तो त्योहारी सीजन में आम जनता को लूट से बचाने के लिए भी ऐसी ही मूल्य सीमा तय की जानी चाहिए।

यदि सरकार ने जल्द ही एयरलाइंस के साथ समीक्षा बैठक कर अतिरिक्त उड़ानों का संचालन नहीं बढ़ाया या किराए पर नियंत्रण नहीं लगाया, तो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इस बार दिवाली पर अपनों के पास पहुंचना और भी कठिन हो जाएगा।

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