दादी को कैंसर ने छीना, तो पोते ने ठान लिया डॉक्टर बनने का संकल्प; 17 घंटे की पढ़ाई कर बना ऑल इंडिया टॉपर

सफलता की कहानियाँ अक्सर प्रेरणा से भरी होती हैं, लेकिन जब इसके पीछे कोई व्यक्तिगत दर्द और भावनात्मक संकल्प हो, तो वह और भी खास बन जाती है। नीट (NEET) की परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर बने इस मेधावी छात्र की कहानी हर किसी की आंखों में आंसू और दिल में हौसला भर देने वाली है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने उसकी दादी को उससे छीन लिया, लेकिन उस मासूमियत भरे दुख ने उसे हार मानने के बजाय देश का भविष्य का डॉक्टर बनने का अटूट साहस दिया। आज जब परिणाम आए, तो उसने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि अपनी दादी के उस अधूरे सपने को भी पूरा कर दिखाया।
गम को बनाया अपनी ताकत
यह कहानी उस दौर की है जब घर में कैंसर से जूझ रही दादी की देखभाल करते हुए इस छात्र ने अस्पताल की भागदौड़ देखी थी। इलाज के दौरान महसूस हुई लाचारी और डॉक्टर के एक छोटे से आश्वासन की अहमियत ने इस छात्र के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। छात्र का मानना है कि उसने डॉक्टर बनने का फैसला उसी पल कर लिया था। घर में दादी के निधन के बाद उसने खुद को पूरी तरह से पढ़ाई के प्रति समर्पित कर दिया। वह अक्सर कहता है, "दादी मेरी प्रेरणा हैं, और मैं चाहता हूं कि भविष्य में मेरी वजह से किसी अन्य परिवार को अपने प्रियजन को नहीं खोना पड़े।"
17 घंटे की कड़ी मेहनत और संयम
टॉपर बनने का सफर आसान नहीं होता। इस छात्र ने सफलता के लिए अपना एक सख्त रूटीन तय किया था। वह रोज 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई में जुटता था। कोचिंग और स्कूल के बाद घर पर खुद की सेल्फ-स्टडी (Self-Study) पर उसका विशेष जोर रहा। नीट जैसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा में हर विषय पर गहरी पकड़ बनाने के लिए उसने एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को अपना आधार बनाया। सोशल मीडिया और बाहरी दुनिया की चकाचौंध से दूर रहकर, उसने अपने लक्ष्य को पाने के लिए जो अनुशासन दिखाया, वह आज लाखों नीट एस्पिरेंट्स के लिए एक मिसाल बन गया है।
डॉक्टर बनने का सपना और समाज सेवा
ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने के बाद, अब इस युवा का लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। वह मानता है कि डॉक्टर का पेशा केवल दवा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को मानसिक संबल देने का भी है। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और उन शिक्षकों को दिया है जिन्होंने इस कठिन सफर में उसका हर कदम पर साथ दिया। उसकी यह कामयाबी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों और मकसद नेक, तो दुनिया की कोई भी चुनौती आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।