दिल्ली की सड़कों पर चलना हुआ जानलेवा, 44% फुटपाथ गायब करके MCD ने बना दी पार्किंग

देश की राजधानी दिल्ली में पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए एक बेहद डरावनी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। सड़कों पर सुरक्षित चलने के लिए बनाए गए फुटपाथ अब दिल्ली से धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। एक हालिया और चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि दिल्ली की करीब 44 फीसदी सड़कों पर अब पैदल चलने वालों के लिए कोई जगह ही नहीं बची है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस नगर निगम (MCD) पर इन फुटपाथों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी, उसी ने राजस्व कमाने के चक्कर में इन्हें 'पेड पार्किंग' (Paid Parking) स्लॉट में तब्दील कर दिया है। प्रशासन की इस घोर लापरवाही का खामियाजा दिल्ली की जनता अपनी जान देकर भुगत रही है।
साल 2025 में 649 पैदल यात्रियों ने गंवाई अपनी जान
फुटपाथों पर अवैध कब्जों और उन्हें पार्किंग लॉट बनाए जाने का सीधा असर दिल्ली की कानून व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं पर पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में दिल्ली की सड़कों पर फुटपाथ न होने के कारण सड़क पर चलने को मजबूर हुए 649 पैदल यात्रियों (Pedestrians) को सड़क हादसों में अपनी जान गंवानी पड़ी। जब लोगों को चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ नहीं मिलते, तो वे भारी ट्रैफिक के बीच मुख्य सड़क पर चलने को मजबूर होते हैं, जहां तेज रफ्तार गाड़ियां उन्हें अपनी चपेट में ले लेती हैं। कश्मीरी गेट, करोल बाग, चांदनी चौक और पुरानी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में यह समस्या अब एक जानलेवा संकट बन चुकी है।
MCD की 'पेड पार्किंग' नीति पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए (RWA) का आरोप है कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और स्थानीय प्रशासन ने बिल्डरों और पार्किंग माफियाओं के साथ मिलकर पैदल चलने वालों के अधिकारों का पूरी तरह से हनन कर दिया है। कई प्रमुख बाजारों और रिहायशी इलाकों जैसे लाजपत नगर, कनॉट प्लेस के बाहरी सर्कल और दक्षिण दिल्ली के कई हिस्सों में फुटपाथों को बकायदा पीले रंग से पेंट करके वहां गाड़ियां खड़ी करने की अनुमति दे दी गई है और इसके बदले मोटी पर्चियां काटी जा रही हैं। नियमों के मुताबिक फुटपाथ केवल पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित होने चाहिए, लेकिन दिल्ली में यह नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।
दिल्ली की बदहाल सड़कों पर क्या कहता है कानून
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद दिल्ली की सड़कों का यह हाल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक विंग और रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक फुटपाथों को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त नहीं किया जाता और अवैध रूप से बनाई गई पेड पार्किंग को बंद नहीं किया जाता, तब तक इन हादसों को रोकना नामुमकिन है। दिल्ली के नागरिकों की मांग है कि सड़कों को पैदल चलने लायक सुरक्षित बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।