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दिल्ली में H1N1 स्वाइन फ्लू का खतरनाक तांडव: 3 दिन के भीतर दो सगी बहनों की मौत से मचा हड़कंप, 1300 के पार पहुंचे मरीज, जानें डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी और बचाव के उपाय

राजधानी दिल्ली में मानसूनी सीजन के बीच संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। दिल्ली में इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू वायरस के बढ़ते मामलों के बीच एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ही परिवार की दो सगी मासूम बहनों की महज तीन दिन के अंतराल में मौत हो गई। इस घटना के बाद से दिल्ली-एनसीआर के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है और डॉक्टरों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी है।

अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, तीन साल 11 महीने की छोटी बच्ची को बेहद गंभीर हालत में बीएलके-मैक्स अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जब बच्ची की मेडिकल जांच की गई तो उसमें H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं, बच्ची के एमआरआई (MRI) स्कैन में 'एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी' (ANEC) के लक्षण पाए गए, जो फ्लू के बाद होने वाली एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा दिमागी जटिलता मानी जाती है। डॉक्टरों की टीम द्वारा तमाम जीवनरक्षक प्रयासों के बावजूद बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि इससे ठीक तीन दिन पहले उनकी बड़ी बेटी की भी अचानक तेज बुखार और सर्दी-जुकाम के बाद मौत हुई थी, जिसमें भी ठीक इसी तरह के लक्षण देखे गए थे।

दिल्ली में 1300 से अधिक मरीज, अस्पतालों में अचानक बढ़े ICU एडमिशन

मानसून की रफ्तार पकड़ने के साथ ही दिल्ली में H1N1 के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में इस साल अब तक H1N1 स्वाइन फ्लू के 1,349 कन्फर्म मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि डेंगू के भी 1,379 मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार स्वाइन फ्लू के मामले न केवल तेजी से बढ़ रहे हैं, बल्कि मरीजों में फेफड़ों और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर जटिलताएं भी देखी जा रही हैं।

राजधानी के प्रमुख अस्पतालों जैसे सफदरजंग, बीएलके-मैक्स और पीएसआरआई (PSRI) में फ्लू के मरीजों की कतारें लग रही हैं। पीएसआरआई अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, उनके अस्पताल में H1N1 के मामलों में अचानक करीब चार गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। कई मरीजों की हालत इतनी बिगड़ रही है कि उन्हें फेफड़ों में गंभीर संक्रमण होने पर वेंटिलेटर सपोर्ट और आईसीयू (ICU) में भर्ती करना पड़ रहा है। दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सभी सरकारी अस्पतालों को इलाज की पर्याप्त व्यवस्था और बेड सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

जानिए क्या है H1N1 वायरस और शरीर पर कैसे करता है हमला

H1N1 एक संक्रामक सांस की बीमारी है, जिसे आम भाषा में 'स्वाइन फ्लू' कहा जाता है। यह वायरस इन्फ्लूएंजा ए श्रेणी का एक म्यूटेटेड स्ट्रेन है, जो एक संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स के जरिए तेजी से फैलता है। जब यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो सबसे पहले ऊपरी श्वसन तंत्र (नाक, गला और फेफड़े) को प्रभावित करता है।

अधिकतर मामलों में यह सामान्य फ्लू की तरह ही ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ दुर्लभ स्थितियों में यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को प्रभावित करके गंभीर निमोनिया या मस्तिष्क की सूजन पैदा कर सकता है। जब वायरस मस्तिष्क के टिश्यू को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी (ANEC) कहा जाता है, जो बच्चों में बेहद घातक साबित हो सकती है।

H1N1 स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण: इन संकेतों पर तुरंत सतर्क हों

यदि आपको या आपके परिवार में किसी को नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम समझने की गलती न करें:

  • अचानक तेज बुखार आना: ठंड लगने के साथ तेज बुखार होना।

  • लगातार खांसी और गले में खराश: सूखी या बलगम वाली खांसी का बने रहना।

  • शरीर और मांसपेशियों में भयंकर दर्द: सिरदर्द के साथ-साथ हाथ-पैरों और पीठ में तेज जकड़न महसूस होना।

  • अत्यधिक थकान और कमजोरी: थोड़ा सा काम करने पर भी बहुत ज्यादा निढाल महसूस होना।

  • सांस लेने में कठिनाई या सीने में दर्द: सांस फूलना या सीने में भारीपन होना।

  • बच्चों में खतरे के संकेत: बच्चों में अत्यधिक सुस्ती, बेहोशी, दौरे (Fits) पड़ना, लगातार उल्टी होना या सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होना।

बच्चों, बुजुर्गों और क्रॉनिक मरीजों के लिए हाई अलर्ट

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि H1N1 का वायरस किसी भी उम्र के व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है, लेकिन कुछ विशेष समूह (High-Risk Groups) के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। 5 साल से छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से डायबिटीज, अस्थमा, हृदय रोग या किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे लोगों में वायरस बहुत तेजी से गंभीर रूप धारण कर लेता है। इसलिए इस वर्ग को भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचना चाहिए और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

H1N1 से बचाव के लिए अपनाएं ये 5 सबसे जरूरी उपाय

स्वाइन फ्लू से सुरक्षित रहने के लिए डॉक्टरों ने दैनिक जीवन में निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

1. नियमित रूप से हाथ साफ करें

दिन में कई बार साबुन और पानी से अपने हाथों को कम से कम 20 सेकेंड तक अच्छी तरह धोएं या अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।

2. खांसते और छींकते समय सावधानी रखें

खांसते या छींकते समय हमेशा टिशू, रुमाल या अपनी कोहनी से मुंह और नाक को ढके रहें।

3. भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें

सार्वजनिक स्थानों, अस्पतालों या मेट्रो में यात्रा के दौरान मास्क का उपयोग जरूर करें।

4. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें

बुखार या फ्लू के लक्षण दिखने पर खुद से दवाइयां या एंटीबायोटिक्स न खाएं, तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाएं।

5. इन्फ्लूएंजा (Flu) का टीका लगवाएं

बच्चों और बुजुर्गों को डॉक्टर की सलाह पर सालाना फ्लू शॉट (Flu Vaccine) जरूर दिलवाएं, जिससे शरीर में इस वायरस के खिलाफ सुरक्षा कवच बन सके।

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