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दुनिया का ध्यान भटका और वहां आ गई आफत! बांग्लादेश में खसरे का हाहाकार, 60 हजार से ज्यादा बच्चे बीमार; जानें भारत कितना सुरक्षित

दुनिया का पूरा ध्यान पिछले कुछ समय से हंटावायरस और इबोला जैसे खतरनाक वायरसों पर टिका हुआ था, लेकिन इसी बीच हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बेहद परेशान करने वाली खबर आ रही है। वहां खसरे (Measles) का संक्रमण इतनी तेजी से फैला है कि स्थिति अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी है। अब तक देश में 60,000 से भी ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और लगभग 500 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। एशिया इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी की डेप्यूटी रीजनल डायरेक्टर हसीना रहमान ने 'नेशनल पब्लिक रेडियो' (NPR) से बात करते हुए अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही इस गंभीर स्थिति को लेकर दुनिया के सामने चिल्ला-चिल्ला कर चेतावनी दे रहे थे, लेकिन इसके बावजूद समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है। मार्च के महीने से शुरू हुई तबाही एनपीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में खसरे के वायरस (Measles morbillivirus) का यह खतरनाक तांडव मार्च के मध्य से शुरू हुआ था। देखते ही देखते कुछ ही महीनों के भीतर संक्रमण के आंकड़े 60 हजार को पार कर गए। स्वास्थ्य एजेंसियों के डेटा के अनुसार, अब तक इस बीमारी से करीब 528 मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। खसरे के इस प्रकोप में सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे ही हो रहे हैं, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बेहद चिंता का विषय है। आखिर बांग्लादेश में क्यों फेल हुआ सिस्टम? इस बड़े हेल्थ क्राइसिस पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ (UNICEF) ने स्थिति साफ की है। यूनिसेफ का कहना है कि बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों के दौरान बच्चों का नियमित टीकाकरण ठीक से नहीं हो पाया है। बच्चों को खसरे की पर्याप्त वैक्सीन न मिल पाना ही इस आउटब्रेक की सबसे बड़ी वजह है। 'एक्सपेंडेड प्रोग्राम ऑफ इम्यूनाइजेशन' (EPI) के नियमों के अनुसार, हर बच्चे को मीजल्स-रूबेला (MR) वैक्सीन की दो खुराक दी जानी अनिवार्य है। इसकी पहली डोज बच्चे के 9 महीने के होने पर और दूसरी खुराक 15 महीने की उम्र में लगती है। लेकिन टीकाकरण अभियान में आई सुस्ती के कारण लाखों बच्चे इस सुरक्षा कवच से महरूम रह गए। त्योहार के सीजन में बढ़ गया है बड़ा रिस्क बांग्लादेश में आगामी बकरीद के त्योहार को लेकर तैयारियां चल रही हैं। इस मौके पर बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भारी भीड़ जुटना स्वाभाविक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहार के दौरान लोगों का आपस में मिलना-जुलना और भीड़भाड़ इस वायरस को फैलने का एक बड़ा जरिया बन सकती है। एक्सपर्ट्स ने लोगों से अपील की है कि वे त्योहार की खुशियों के बीच सावधानी जरूर बरतें, क्योंकि थोड़ी सी सतर्कता और सामाजिक दूरी ही इस स्थिति को बिगड़ने से रोक सकती है। क्या भारत के लिए भी है कोई खतरे की घंटी? खसरे का वायरस कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यह कोरोना वायरस की तरह ही हवा के जरिए (Airborne) फैलता है, लेकिन इसकी संक्रमण क्षमता कोरोना से कई गुना अधिक होती है। मीजल्स का वायरस संक्रमित व्यक्ति के जाने के बाद भी हवा में करीब 2 घंटे तक जिंदा रह सकता है। यानी अगर किसी बंद कमरे में 2 घंटे पहले कोई खसरे का मरीज आया था, तो उसके बाद वहां जाने वाला स्वस्थ व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकता है। पड़ोसी देश होने और सीमाओं से आवाजाही के चलते भारत में भी इस वायरस के फैलने का जोखिम हमेशा बना रहता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत का टीकाकरण रिकॉर्ड बेहद मजबूत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने खसरे की वैक्सीन की पहली खुराक का लगभग 96 प्रतिशत से ज्यादा का लक्ष्य हासिल कर लिया था, जबकि दूसरी खुराक का कवरेज भी 92 प्रतिशत से अधिक रहा है। इस मजबूत इम्युनिटी कवर की वजह से भारत में बड़े पैमाने पर इसके फैलने का खतरा काफी कम है, फिर भी सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बरतनी जरूरी है। डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल बांग्लादेश में फैल रही खसरा बीमारी से जुड़ी कुछ जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज या डॉक्टरी सलाह के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या या लक्षणों के दिखने पर हमेशा अपने नजदीकी डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।

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