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Railway Platform Ticket Rules: प्लेटफॉर्म टिकट जेब में होने के बाद भी कट सकता है ₹500 का चालान, जान लें रेलवे का 2 घंटे वाला सख्त नियम

रेलवे स्टेशन पर किसी रिश्तेदार या परिचित को छोड़ने जाने वाले ज्यादातर लोग स्टेशन परिसर में प्रवेश करने से पहले प्लेटफॉर्म टिकट (Platform Ticket) जरूर खरीद लेते हैं। आम धारणा यह है कि यदि आपके पास वैध प्लेटफॉर्म टिकट है, तो स्टेशन पर कोई भी चेकिंग स्टाफ या टीटीई (TTE) आप पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर सकता। हालांकि, भारतीय रेलवे (Indian Railways) के नियमों के अनुसार केवल टिकट खरीद लेना ही काफी नहीं है। यदि आप रेलवे के तय समय-सीमा और यात्रा से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हैं, तो वैध प्लेटफॉर्म टिकट हाथ में होने के बावजूद आपको ₹500 तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।

प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता और 2 घंटे की समय सीमा का कड़ा नियम

भारतीय रेलवे के परिचालन नियमों के तहत प्लेटफॉर्म टिकट की अधिकतम वैधता (Validity) जारी होने के समय से केवल 2 घंटे तक की होती है। यदि ट्रेन लेट हो जाती है या आप अपने किसी परिचित का इंतजार करते हुए स्टेशन परिसर में 2 घंटे से अधिक समय तक रुक जाते हैं, तो आपका प्लेटफॉर्म टिकट स्वतः ही अमान्य (Invalid) हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि टिकट चेकिंग स्टाफ आपकी जांच करता है, तो आपको 'बिना टिकट' (Without Ticket) माना जाएगा और रेलवे एक्ट की धारा 138 के तहत कम से कम ₹250 से ₹500 तक की पेनल्टी वसूली जा सकती है। ट्रेन में अत्यधिक देरी होने पर 2 घंटे समाप्त होते ही नया प्लेटफॉर्म टिकट खरीदना अनिवार्य होता है।

प्लेटफॉर्म टिकट लेकर ट्रेन के अंदर जाने पर भारी जुर्माना

कई बार लोग अपने परिजनों का भारी सामान रखने या उन्हें सीट तक छोड़ने के लिए ट्रेन के डिब्बे के भीतर चले जाते हैं और ट्रेन चलने तक वहीं रुके रहते हैं। रेलवे के कड़े नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म टिकट केवल स्टेशन के प्लेटफॉर्म और वेटिंग एरिया तक सीमित रहने के लिए अधिकृत करता है। यदि आप प्लेटफॉर्म टिकट के साथ किसी भी ट्रेन के कोच (चाहे वह जनरल हो या स्लीपर/एसी) के अंदर पाए जाते हैं, तो इसे अनाधिकृत यात्रा माना जाता है। ऐसे में चेकिंग स्टाफ आपको उस ट्रेन के प्रस्थान स्टेशन से लेकर अगले स्टॉपेज तक का पूरा किराया और साथ में न्यूनतम ₹250 का पेनल्टी चार्ज जोड़कर पेनल्टी चालान थमा सकता है।

इमर्जेंसी में ट्रेन पकड़ने के लिए प्लेटफॉर्म टिकट का सही कानूनी नियम

यदि किसी यात्री को अचानक आपात स्थिति में यात्रा करनी पड़े और टिकट काउंटर पर लंबी कतार के कारण यात्रा टिकट न मिल पाए, तो प्लेटफॉर्म टिकट का उपयोग यात्रा शुरू करने के लिए कानूनी तौर पर किया जा सकता है। इसके लिए रेलवे का स्पष्ट नियम है:

  • तुरंत टीटीई से संपर्क: प्लेटफॉर्म टिकट लेकर ट्रेन में चढ़ते ही यात्री को बिना किसी देरी के खुद जाकर ट्रेन के टीटीई (TTE) से संपर्क करना होता है।

  • यात्रा रसीद बनवाना: टीटीई को अपनी स्थिति बताकर उसी प्लेटफॉर्म टिकट के आधार पर अपने गंतव्य स्टेशन तक की यात्रा रसीद (EFT – Excess Fare Ticket) बनवानी होती है।

  • पेनाल्टी से बचाव: यदि आप खुद आगे बढ़कर टीटीई को सूचित करते हैं, तो टीटीई प्लेटफॉर्म टिकट के बोर्डिंग स्टेशन से आपके गंतव्य तक का सामान्य किराया और निर्धारित अतिरिक्त शुल्क लेकर आपको यात्रा की वैध रसीद जारी कर देगा और आप पर बिना टिकट यात्रा का केस नहीं बनेगा।

UTS मोबाइल ऐप और डिजिटल टिकट में समय का ध्यान

आजकल अधिकांश यात्री लाइन से बचने के लिए रेलवे के 'UTS on Mobile' ऐप के जरिए पेपरलेस प्लेटफॉर्म टिकट बुक करते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म टिकट पर भी बुकिंग का सही समय और 2 घंटे की उल्टी गिनती दर्ज रहती है। ध्यान रहे कि स्टेशन की जियो-फेंसिंग परिधि के अंदर आने से पहले ही डिजिटल टिकट बुक करना होता है, क्योंकि स्टेशन परिसर या ट्रैक के अंदर प्रवेश करने के बाद ऐप सुरक्षा कारणों से टिकट जनरेट करने की अनुमति नहीं देता है।

स्टेशन पर अनावश्यक परेशानी और जुर्माने से बचने के सुझाव

  • प्लेटफॉर्म पर कदम रखते ही अपने टिकट पर छपे प्रिंटिंग टाइम को नोट करें और 2 घंटे के भीतर काम पूरा करके स्टेशन से बाहर निकल जाएं।

  • ट्रेन का आगमन समय चेक करने के बाद ही प्लेटफॉर्म टिकट खरीदें, ताकि ट्रेन लेट होने पर टिकट की 2 घंटे की वैलिडिटी बेकार न जाए।

  • यात्रियों को केवल बोगी के गेट तक ही विदा करें, चलती ट्रेन या कोच के अंदर अनावश्यक प्रवेश करने से पूरी तरह बचें।

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