देश में मौसम का दोहरा यू-टर्न: दक्षिण में उत्तर-पूर्वी मानसून का तांडव, तो उत्तर भारत में थंडरस्टॉर्म और बादलों का डेरा

भारतीय उपमहाद्वीप के वायुमंडल में 16 अक्टूबर को एक साथ दो विपरीत मौसमी प्रणालियों का जबर्दस्त टकराव देखने को मिलने वाला है। एक तरफ जहां 15 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से विदाई के ठीक बाद प्रायद्वीपीय भारत पर उत्तर-पूर्वी मानसून (Northeast Monsoon) ने आक्रामक दस्तक दे दी है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और मध्य भारत के क्षोभमंडल में पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण का असर गहरा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा अखिल भारतीय मौसम बुलेटिन के अनुसार, कल यानी 16 अक्टूबर को देश के 15 से अधिक राज्यों में तेज आंधी, आकाशीय बिजली चमकने और बारिश का दौर जारी रहेगा। दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में जहां उत्तर-पूर्वी मानसून मूसलाधार बारिश के साथ बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकता है, वहीं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों—विशेषकर दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में गरज-चमक (थंडरस्टॉर्म) के साथ धूल भरी हवाएं और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। वातावरण में अचानक बढ़े इस मौसमी बदलाव के चलते देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज होने का अनुमान है।
दक्षिण के 5 राज्यों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट: तमिलनाडु से लेकर केरल तक जलभराव का खतरा
उत्तर-पूर्वी मानसून के औपचारिक आरंभ के साथ ही बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से और दक्षिणी तटीय तमिलनाडु के ऊपर एक सुस्पष्ट चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) स्थापित हो चुका है। इसके प्रभाव से 16 अक्टूबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के विस्तृत इलाकों में व्यापक से लेकर अति भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) की कड़ी चेतावनी जारी की गई है। चेन्नई, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लूर, कुड्डालोर और तंजावुर जैसे तटीय जिलों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। इन क्षेत्रों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों में 65 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी तटीय हवाएं चल सकती हैं। निचले रिहायशी इलाकों में गंभीर जलभराव, सड़कों पर ट्रैफिक जाम और रेल व हवाई सेवाओं में आंशिक व्यवधान की आशंका जताई गई है। केरल के एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर और कोट्टायम जिलों में भी पश्चिमी घाट की ढलानों पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सख्त हिदायत दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर और यूपी में 16 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ बारिश: 50 किमी/घंटे की आंधी और आकाशीय बिजली की चेतावनी
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की बात करें तो देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में कल दिनभर आसमान में घने काले बादलों का पहरा रहेगा। दक्षिणी हरियाणा और आसपास के इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण तथा उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर अरब सागर तक फैली ट्रफ लाइन के संयुक्त प्रभाव से दोपहर बाद या शाम के समय गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार आंधी चल सकती है। दिल्ली में कल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 21 डिग्री सेल्सियस तक आने का अनुमान है। वहीं, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य जिलों—सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बरेली, कानपुर और राजधानी लखनऊ में थंडरस्टॉर्म और बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ बूंदाबांदी व छिटपुट बारिश का अलर्ट है। लखनऊ में 16 अक्टूबर को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खुले मैदानों में आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का खतरा बना रहेगा, इसलिए बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास शरण न लें।
पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में लुढ़का पारा: पश्चिमी विक्षोभ ने बढ़ाई सिहरन, समय से पहले गुलाबी ठंड की दस्तक
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से बर्फबारी और बारिश की दोहरी मार पड़ रही है। जोजिला दर्रा, गुलमर्ग, सोनमर्ग, रोहतांग पास और चमोली-उत्तरकाशी की ऊंची चोटियों पर पिछले 24 घंटों में ताजा हिमपात दर्ज किया गया है। 16 अक्टूबर को भी हिमाचल प्रदेश के मनाली, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री व हेमकुंड साहिब के इलाकों में रुक-रुक कर बर्फबारी और तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मनाली में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे माइनस 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरने का पूर्वानुमान है, जबकि श्रीनगर में पारा 8 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क सकता है। पहाड़ों से उतरने वाली इन बर्फीली और नम हवाओं ने पंजाब के अमृतसर, लुधियाना, जालंधर और हरियाणा के करनाल, हिसार, अंबाला में रात के तापमान को तेजी से गिरा दिया है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में लोगों ने पंखों की गति धीमी कर दी है और रात व भोर के समय हल्की चादरों का उपयोग शुरू हो गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस साल कड़ाके की सर्दियों की दस्तक समय से पहले ही होने जा रही है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और ओडिशा में मौसम का मिजाज: कहां चलेगी आंधी और कहां साफ रहेगा आसमान?
देश के अन्य प्रमुख राज्यों के मौसम का विश्लेषण करें तो पूर्वी राजस्थान के जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर संभाग में 16 अक्टूबर को 30 से 40 किमी/घंटे की हवाओं के साथ छिटपुट बारिश के आसार हैं, जबकि पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर में मौसम शुष्क बना रहेगा। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, चंबल, भोपाल और उज्जैन संभाग में स्थानीय संवहन बादलों के कारण शाम के वक्त गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा और 50 किमी/घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर और बस्तर अंचल में भी बिजली चमकने और हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई गई है। बिहार की बात करें तो पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में 16 अक्टूबर को मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क रहने की संभावना है, हालांकि उत्तरी सीमावर्ती जिलों में छिटपुट बादलों की आवाजाही देखी जा सकती है। पूर्वी तटीय राज्य ओडिशा के बालासोर, भद्रक, पुरी और भुवनेश्वर में बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी युक्त हवाओं के कारण तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता और तटीय चौबीस परगना जिलों में भी बादलों का डेरा रहेगा और रुक-रुक कर बौछारें पड़ने से उमस से कुछ राहत मिलेगी।
किसानों और आम जनता के लिए IMD की विशेष एडवाइजरी: कटी फसलों की सुरक्षा और आकाशीय बिजली से बचाव के उपाय
मौसम के इस अप्रत्याशित और उग्र मिजाज को देखते हुए कृषि मौसम विज्ञान प्रभाग ने देश के अन्नदाताओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उत्तर भारत के जो किसान इन दिनों खरीफ फसलों—विशेष रूप से धान, मक्का, बाजरा और सोयाबीन की कटाई कर चुके हैं, वे कटी हुई फसल को खुले खेतों में छोड़ने के बजाय तुरंत ऊंचे और तिरपाल से ढके सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं। कृषि मंडियों में खुले में रखी अनाज की बोरियों को वाटरप्रूफ प्लास्टिक शीट से ढंकने की अपील की गई है ताकि भीगने से फसल की गुणवत्ता खराब न हो। इसके अलावा, दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून के पानी को धान के खेतों में संचित करने के लिए नालियों को दुरुस्त रखने की सलाह दी गई है। आम जनता के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली और आंधी से बचाव के बुनियादी नियम दोहराए हैं। आंधी-तूफान के समय पुराने जर्जर मकानों, होर्डिंग्स, बड़े पेड़ों और टीन शेड के नीचे खड़े होने से बचें। थंडरस्टॉर्म के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें और दोपहिया वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे तेज हवा और बारिश के दौरान पुलों या फ्लाईओवर पर गति धीमी रखें। 16 अक्टूबर का दिन पूरे देश में मौसमी उठापटक का गवाह बनने जा रहा है, इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की सटीक जांच अवश्य कर लें।