एजुकेशन

दोनों मेडिकल कोर्सेज में से किसमें लें एडमिशन? जानिए किसका है सबसे तगड़ा करियर स्कोप और हाईएस्ट सैलरी

मेडिकल और साइंस स्ट्रीम से 12वीं (पीसीबी/पीसीएम) पास करने के बाद अक्सर छात्र इस बात को लेकर भारी असमंजस में रहते हैं कि वे अपने भविष्य के लिए फार्मेसी (Pharmacy) का रास्ता चुनें या फिर बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) के क्षेत्र में कदम रखें। ये दोनों ही कोर्सेज आज के आधुनिक हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। लेकिन इन दोनों की पढ़ाई का तरीका, काम का दायरा और करियर की राहें एक-दूसरे से काफी अलग हैं। यदि आप भी अपने करियर को लेकर किसी बड़े फैसले पर पहुंचना चाहते हैं, तो एडमिशन लेने से पहले इन दोनों कोर्सेज के बीच का मुख्य अंतर, भविष्य का स्कोप और मिलने वाली सैलरी पैकेज को विस्तार से समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।

जानिए क्या है फार्मेसी और इसमें पढ़ाई का मुख्य फोकस

फार्मेसी मुख्य रूप से दवाओं के विज्ञान (Science of Medicines) से संबंधित क्षेत्र है। इस कोर्स के तहत छात्रों को दवाओं के निर्माण, उनकी खोज, रासायनिक संयोजन (Chemical Composition), खुराक के निर्धारण और मानव शरीर पर उनके होने वाले असर के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है। इसमें एडमिशन के लिए छात्र 2 साल का डिप्लोमा (D.Pharma) या 4 साल की डिग्री (B.Pharma) चुन सकते हैं। इस फील्ड में पढ़ाई पूरी करने के बाद आप एक प्रमाणित और रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बन जाते हैं। इसका मुख्य फोकस मौजूदा चिकित्सा प्रणाली के तहत मरीजों तक सही और सुरक्षित दवाएं पहुंचाना होता है।

क्या है बायोटेक्नोलॉजी और क्यों बढ़ रहा है इसका क्रेज

दूसरी तरफ बायोटेक्नोलॉजी एक बेहद आधुनिक और रिसर्च-ओरिएंटेड (Research-Oriented) क्षेत्र है, जिसमें जीव विज्ञान (Biology) और उन्नत तकनीक (Technology) का एक अनूठा मेल देखने को मिलता है। इस कोर्स के भीतर छात्रों को जीवित जीवों, कोशिकाओं (Cells) और जैविक प्रणालियों का उपयोग करके मानव जीवन को बेहतर बनाने वाले नए प्रोडक्ट्स विकसित करना सिखाया जाता है। इसमें आप 3 साल की डिग्री (B.Sc Biotechnology) या 4 साल का इंजीनियरिंग कोर्स (B.Tech Biotechnology) कर सकते हैं। इसका मुख्य फोकस जेनेटिक्स, वैक्सीन निर्माण, डीएनए मैपिंग, कैंसर रिसर्च और कृषि क्षेत्र में नए वैज्ञानिक बदलाव लाना होता है।

करियर स्कोप की जंग: कहां हैं नौकरी के सबसे ज्यादा मौके

करियर के अवसरों (Career Opportunities) के लिहाज से दोनों ही क्षेत्रों का अपना एक विशाल बाजार है। फार्मेसी पूरी करने के बाद आपके पास हॉस्पिटल फार्मासिस्ट, क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, ड्रग इंस्पेक्टर, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर बनने या खुद की फार्मास्युटिकल कंपनी और मेडिकल स्टोर शुरू करने का एक सुरक्षित और सदाबहार विकल्प होता है। वहीं बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आपके लिए बड़ी-बड़ी रिसर्च लैबोरेट्रीज, बायो-फार्मा कंपनियां, जेनेटिक इंजीनियरिंग फर्म्स और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के दरवाजे खुलते हैं, जहां आप बायोकेमिस्ट, मेडिकल साइंटिस्ट या लैब तकनीशियन के रूप में काम कर सकते हैं। हालांकि बायोटेक्नोलॉजी में बेहतर ग्रोथ के लिए ग्रेजुएशन के बाद मास्टर डिग्री (M.Sc / M.Tech) या पीएचडी (PhD) करना लगभग अनिवार्य माना जाता है।

सैलरी पैकेज की हकीकत: कौन सा कोर्स कराएगा सबसे मोटी कमाई

स्थानीय स्तर (Geographical Impact) और वैश्विक मार्केट दोनों जगह इन दोनों कोर्सेज का सैलरी स्ट्रक्चर इनके काम की प्रकृति पर निर्भर करता है। एक फ्रेशर बी.फार्मा ग्रेजुएट को शुरुआत में भारत की फार्मा कंपनियों में औसतन ₹2.5 लाख से ₹4.5 लाख सालाना का पैकेज आसानी से मिल जाता है, जो अनुभव और ड्रग इंस्पेक्टर जैसे सरकारी पदों पर पहुंचने के बाद ₹8 से ₹12 लाख तक जा सकता है। दूसरी तरफ बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शुरुआती सैलरी थोड़ी कम यानी ₹3 लाख से ₹4.5 लाख सालाना हो सकती है, लेकिन यदि आप रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में आगे बढ़ते हैं या वैश्विक स्तर पर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) से जुड़ते हैं, तो आपका पैकेज ₹15 से ₹25 लाख सालाना से भी ऊपर जा सकता है। अगर आपकी रुचि दवाओं और बिजनेस में है तो फार्मेसी बेहतर है, और यदि आपकी रुचि नई खोजों और प्रयोगशालाओं में है, तो बायोटेक्नोलॉजी आपके लिए बेस्ट चॉइस साबित होगी।

 

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