धमाकेदार फैसला! शेयर बाजार में मचेगी हलचल, SEBI ने दी 1 अगस्त से खुले बाजार से शेयर बायबैक को मंजूरी

भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों और लिस्टेड कंपनियों के लिए एक बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कॉरपोरेट जगत को बड़ी राहत देते हुए स्टॉक एक्सचेंज यानी खुले बाजार (Open Market) के जरिए शेयरों की पुनर्खरीद (Share Buyback) को दोबारा शुरू करने की आधिकारिक हरी झंडी दे दी है। बाजार नियामक सेबी का यह नया और ऐतिहासिक नियम आगामी 1 अगस्त से पूरी तरह से प्रभावी होने जा रहा है। सरकार द्वारा बजट में टैक्स नियमों को तर्कसंगत बनाए जाने के बाद सेबी की इस पहली बोर्ड मीटिंग में यह बड़ा फैसला लिया गया है, जिससे अब कंपनियों के पास अपने सरप्लस कैश का इस्तेमाल करने और निवेशकों को तगड़ा रिटर्न देने का एक और आसान रास्ता खुल गया है।
अब 66 दिनों के भीतर पूरा करना होगा पूरा प्रोसेस
सेबी के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब खुले बाजार से होने वाले इस बायबैक की समयसीमा को सीमित कर दिया गया है। कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से घोषणा करने के बाद अधिकतम 66 कामकाजी दिनों (Working Days) के भीतर अपनी पूरी बायबैक प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से समाप्त करना होगा। इतना ही नहीं, बाजार में केवल दिखावे के लिए बायबैक का ऐलान करने वाली कंपनियों पर नकेल कसते हुए सेबी ने यह भी साफ कर दिया है कि कंपनियों को कुल तय की गई बायबैक राशि का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा शुरुआती 33 कामकाजी दिनों के भीतर ही बाजार में निवेश करना होगा।
बिना किसी अलग विंडो के नॉर्मल ट्रेडिंग में खरीदे जाएंगे शेयर
इस नए फैसले की सबसे खास बात यह है कि अब कंपनियों को खुले बाजार से अपने ही शेयर वापस खरीदने के लिए किसी विशेष या अलग ट्रेडिंग विंडो की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी प्रक्रिया आम निवेशकों की तरह ही नॉर्मल ट्रेडिंग विंडो के जरिए पूरी की जा सकेगी। इसके अलावा सेबी ने कंपनियों के लिए मर्चेंट बैंकर्स को नियुक्त करने की अनिवार्यता को भी वैकल्पिक (Optional) बना दिया है, जिससे कंपनियों के अनुपालन की लागत (Compliance Cost) और कागजी कार्रवाई में भारी कमी आएगी।
प्रमोटर्स की मनमानी पर रोक और निवेशकों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम
निवेशकों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेबी ने इस बार बेहद कड़े और पुख्ता नियम बनाए हैं। नए नियमों के तहत बायबैक की पूरी अवधि के दौरान प्रमोटर और उनके सहयोगियों की हिस्सेदारी को आईएसआईएन (ISIN) स्तर पर फ्रीज कर दिया जाएगा, यानी वे इस दौरान अपने शेयरों का ट्रांसफर, ट्रेडिंग या उन्हें गिरवी नहीं रख सकेंगे। इसके साथ ही कंपनियां कोई भी ऐसा बायबैक नहीं कर पाएंगी जिससे शेयर बाजार में उनकी मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक फ्लोट) के नियम का उल्लंघन होता हो। कैपिटल गेन्स टैक्स के नए ढांचे के तहत अब शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 20% और लॉन्ग टर्म पर 12.5% टैक्स देय होगा, जिससे निवेशकों को अपने टैक्स प्लानिंग में भी बड़ी मदद मिलेगी।