धूप में निकलते ही लाल हो जाती है स्किन? यह मामूली टैनिंग नहीं, हो सकती है PMLE एलर्जी, जानें इसके लक्षण और बचाव

गर्मी के मौसम में या चटक धूप के संपर्क में आने पर त्वचा का हल्का-फुल्का काला पड़ना या टैन होना एक बेहद सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, जिसे अधिकांश लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि धूप में निकलते ही उनकी त्वचा पर केवल पसीना ही नहीं आता, बल्कि स्किन एक अलग और असामान्य तरीके से रिएक्ट करने लगती है। यदि आपको भी ऐसा महसूस होता है कि धूप में थोड़ी देर भी बाहर निकलने पर आपकी त्वचा पर मामूली जलन से कहीं ज्यादा गंभीर परेशानी, खुजली और रैशेज होने लगते हैं, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य टैनिंग समझकर नजरअंदाज न करें। यह इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकता है कि आपकी त्वचा को सूर्य की किरणों से एक खास प्रकार की एलर्जी है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पीएमएलई (PMLE) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में बाहर निकलते वक्त अपनी त्वचा की अतिरिक्त देखभाल और सुरक्षा करने की सख्त जरूरत होती है। आइए इस लेख के माध्यम से विस्तार से जानते हैं कि सनलाइट से होने वाली यह एलर्जी क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या है पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (PMLE)? जानिए इसके पीछे की वजह
पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (Polymorphous Light Eruption) सूरज से निकलने वाली पराबैंगनी यानी यूवी (UV) किरणों के सीधे संपर्क में आने के बाद त्वचा पर होने वाली एक आम लेकिन परेशान करने वाली एलर्जी का नाम है। इस एलर्जी की एक खास बात यह होती है कि इसका रिएक्शन सूरज की रोशनी के संपर्क में आते ही तुरंत नजर नहीं आता, बल्कि यह त्वचा पर यूवी किरणों के पड़ने के कुछ घंटों बाद या फिर एक-दो दिन के अंतराल पर दिखाई देना शुरू होता है।
जिन लोगों को यह स्वास्थ्य समस्या होती है, उनके शरीर में एक खास प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune Response) देखी जाती है। दरअसल, जब ऐसे लोगों की संवेदनशील त्वचा धूप के संपर्क में आती है, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम गलती से त्वचा के अंदर बनने वाले कुछ सामान्य अणुओं (Molecules) को हानिकारक मान बैठता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर उसके खिलाफ आक्रामक रूप से प्रतिक्रिया करना शुरू कर देता है, जिससे त्वचा पर तेज खुजली, जलन और लाल रंग के असहज चकत्ते उभरने लगते हैं।
पीएमएलई (PMLE) के प्रमुख लक्षण और इसके जोखिम कारक
पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन के शुरुआती और स्पष्ट लक्षण आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं जो सीधे धूप के संपर्क में आते हैं, जैसे कि बाजू, छाती का ऊपरी हिस्सा, गर्दन, पैर और पीठ की त्वचा। इसके मुख्य लक्षणों में निम्नलिखित स्थितियां शामिल हैं:
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त्वचा पर छोटे-छोटे और उभरे हुए दाने होना।
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लाल या सफेद रंग की अत्यधिक खुजलीदार पित्ती (Hives) का उभरना।
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त्वचा पर एक्जिमा जैसे सूखे और खुरदरे पैच बन जाना।
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धूप के संपर्क में आने वाली जगह पर छोटे-छोटे पानी भरे छाले होना।
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दानों के आसपास तेज लालिमा और असहनीय खुजली का बने रहना।
जोखिम कारकों की बात करें तो यह समस्या आमतौर पर 20 से 40 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं में अधिक देखी जाती है, विशेष तौर पर उन महिलाओं में जिनकी त्वचा की बनावट पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील (Sensitive Skin History) रही हो।
पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन से खुद को सुरक्षित रखने और बचाव के उपाय
चूंकि यह स्किन एलर्जी मुख्य रूप से सूरज की तेज किरणों के कारण होती है, इसलिए इससे बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका धूप से दूरी बनाना या उचित सावधानी बरतना है। यह एलर्जी आमतौर पर सुबह 11 बजे से लेकर शाम के 3 बजे के बीच की तेज धूप के संपर्क में आने से सबसे ज्यादा ट्रिगर होती है। हालांकि यह समस्या कुछ समय बाद अपने आप भी ठीक हो जाती है, लेकिन यदि आप कुछ एहतियाती कदम उठाएं तो इससे समय रहते बचा जा सकता है:
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हाई एसपीएफ और ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल: घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले अच्छी क्वालिटी का सनस्क्रीन लगाएं जो यूवीए और यूवीबी दोनों किरणों से सुरक्षा देता हो।
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फुल बाजू के कपड़े पहनें: धूप में निकलते समय ऐसे कपड़े पहनने का प्रयास करें जो आपके शरीर के अधिकांश हिस्से को पूरी तरह से ढक कर रखें, जिससे सीधी धूप त्वचा पर न पड़े।
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फोटोथेरेपी का सहारा: गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह से फोटोथेरेपी यानी नेचुरल या आर्टिफिशियल यूवी लाइट के नियंत्रित संपर्क के जरिए त्वचा को सहनशील बनाया जाता है।
डॉक्टर से परामर्श कब लेना जरूरी है?
पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन आमतौर पर एक हल्की और स्वतः ठीक होने वाली एलर्जी है, जिसे विशेष चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यदि आपकी स्थिति सामान्य से अधिक गंभीर हो जाए तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यदि स्किन रैश और दानों के साथ-साथ आपको असहनीय दर्द, सूजन या तेज बुखार जैसी समस्याएं महसूस होने लगें, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इस तरह के लक्षण किसी अन्य गंभीर त्वचा रोग या संक्रमण का संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित इलाज कराना बेहद आवश्यक है।