नवरात्रि की महाष्टमी का पावन महत्व, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से चमकेगी सोई हुई किस्मत

सनातन धर्म और शक्ति उपासना के पावन पर्व नवरात्रि में अष्टमी तिथि यानी महाष्टमी का विशेष और अत्यंत फलदायी महत्व बताया गया है। नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी (Maa Mahagauri) की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त (Brahm Muhurat) में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करने या फिर घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करने से जातक के जन्मों-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। जो साधक इस पावन दिन पर अलसुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करते हैं, उन पर आदिशक्ति जगदम्बा की असीम अनुकंपा बनी रहती है और उनके जीवन में छाया दरिद्रता का अंधेरा हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि और धन वर्षा कराने वाले अचूक महाउपाय
अष्टमी तिथि के दिन स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ और हल्के रंग के कपड़े (विशेषकर सफेद या गुलाबी) धारण करके मां महागौरी का ध्यान लगाना चाहिए। पूजा स्थल पर मां भगवती के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और उन्हें नारियल, नारियल से बनी मिठाई, फल, अक्षत, कुमकुम और लाल चुनरी अर्पित करें। यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज या व्यापार में घाटे की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अष्टमी की रात को लाल कपड़े में एक चांदी का सिक्का, 5 कौड़ियां और थोड़ा सा अक्षत बांधकर मां के चरणों में रखें और अगले दिन इसे अपनी तिजोरी में स्थापित कर दें। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि यह सिद्ध उपाय घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होने देता और आय के नए-नए स्रोत खोलने में मदद करता है।
इस सिद्ध मंत्र का जाप दिलाएगा सभी दुखों से मुक्ति, बरसेगा असीम धन-वैभव
महाष्टमी के पावन अवसर पर मां महागौरी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र साधना का विशेष महत्व माना गया है। साधक को लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से माता के इस सिद्ध मंत्र का कम से कम 108 बार पूर्ण निष्ठा के साथ जाप करना चाहिए:
"या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
इसके अतिरिक्त धन-धान्य, ऐश्वर्य और पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति के लिए "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नमः" अथवा श्री सूक्त का पाठ
हेडलाइन (58 शब्द): नवरात्रि की महाष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त में करें यह पवित्र स्नान और चमत्कारी मंत्र का जाप! धन की देवी मां महागौरी बरसाएंगी असीम कृपा, मिट जाएगी कंगाली और दूर होगी आर्थिक तंगी, जानिए इस पावन दिन किए जाने वाले महाउपाय, पूजा विधि और पूरी धार्मिक विधि-विधान रिपोर्ट!
मेटा डिस्क्रिप्शन: Navratri Ashtami Maha Gauri Puja 2026: शारदीय व चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त स्नान, मां महागौरी पूजन और चमत्कारी मंत्र जाप से चमकेगी किस्मत। जानिए धन प्राप्ति, कंगाली दूर करने और आर्थिक संपन्नता के लिए अष्टमी तिथि पर किए जाने वाले मुख्य धार्मिक उपाय।
नवरात्रि की महाष्टमी का पावन महत्व, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से चमकेगी सोई हुई किस्मत
सनातन धर्म और शक्ति उपासना के पावन पर्व नवरात्रि में अष्टमी तिथि यानी महाष्टमी का विशेष और अत्यंत फलदायी महत्व बताया गया है। नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी (Maa Mahagauri) की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त (Brahm Muhurat) में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करने या फिर घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करने से जातक के जन्मों-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। जो साधक इस पावन दिन पर अलसुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करते हैं, उन पर आदिशक्ति जगदम्बा की असीम अनुकंपा बनी रहती है और उनके जीवन में छाया दरिद्रता का अंधेरा हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि और धन वर्षा कराने वाले अचूक महाउपाय
अष्टमी तिथि के दिन स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ और हल्के रंग के कपड़े (विशेषकर सफेद या गुलाबी) धारण करके मां महागौरी का ध्यान लगाना चाहिए। पूजा स्थल पर मां भगवती के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और उन्हें नारियल, नारियल से बनी मिठाई, फल, अक्षत, कुमकुम और लाल चुनरी अर्पित करें। यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज या व्यापार में घाटे की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अष्टमी की रात को लाल कपड़े में एक चांदी का सिक्का, 5 कौड़ियां और थोड़ा सा अक्षत बांधकर मां के चरणों में रखें और अगले दिन इसे अपनी तिजोरी में स्थापित कर दें। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि यह सिद्ध उपाय घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होने देता और आय के नए-नए स्रोत खोलने में मदद करता है।
इस सिद्ध मंत्र का जाप दिलाएगा सभी दुखों से मुक्ति, बरसेगा असीम धन-वैभव
महाष्टमी के पावन अवसर पर मां महागौरी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र साधना का विशेष महत्व माना गया है। साधक को लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से माता के इस सिद्ध मंत्र का कम से कम 108 बार पूर्ण निष्ठा के साथ जाप करना चाहिए:
"या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
इसके अतिरिक्त धन-धान्य, ऐश्वर्य और पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति के लिए "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नमः" अथवा श्री सूक्त का पाठ करना भी तंत्र-शास्त्र में बेहद कल्याणकारी और चमत्कारी माना गया है। शास्त्रों का स्पष्ट कहना है कि यदि कोई भक्त सच्चे मन से इस दिन मंत्र जाप और ध्यान करता है, तो मां महागौरी उसके घर-परिवार को धन-समृद्धि से परिपूर्ण कर देती हैं और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
कन्या पूजन और हवन का धार्मिक नियम, ध्यान रखें ये जरूरी बातें
अष्टमी के दिन पूजा और मंत्र जाप के पश्चात कन्या पूजन (Kanya Pujan) करने का विशेष विधान है। इस दिन 2 से 10 वर्ष तक की 9 नन्हीं कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उन्हें आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित किया जाता है। उनके चरण धोकर, उन्हें लाल चुनरी उड़ाकर हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद खिलाया जाता है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद सामर्थ्य अनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में हमेशा सुख-शांति तथा समृद्धि का वास बना रहता है। इस प्रकार पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से किया गया अष्टमी व्रत और पूजन मनुष्य के जीवन की समस्त बाधाओं को दूर कर उसे सुखद भविष्य की ओर अग्रसर करता है।