धर्म

नवरात्रि की विनायक चतुर्थी 2026: जानिए सवा दो घंटे का शुभ मुहूर्त

पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर शारदीय नवरात्रि (Sharad Navratri) का पावन पर्व इन दिनों पूरे देश में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है, जहां हर घर और मंदिर में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना गूंज रही है। इस बीच, नवरात्रि के इन खास दिनों में पड़ने वाली विनायक चतुर्थी (Vinayaka Chaturthi 2026) का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा दोनों की एक साथ कृपा पाने का दुर्लभ संयोग बनता है। पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार, इस वर्ष नवरात्रि की विनायक चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं के मन में तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए केवल सवा दो घंटे का अत्यंत दुर्लभ और पावन मुहूर्त बन रहा है, साथ ही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन लगभग 10 घंटे तक चंद्रमा के दर्शन करना पूरी तरह वर्जित माना गया है। यदि आप भी इस शुभ अवसर पर बप्पा और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं पूजा की सही तारीख, सटीक मुहूर्त और इससे जुड़े सभी जरूरी नियम।

नवरात्रि विनायक चतुर्थी 2026 की सही तिथि और पूजा का सवा दो घंटे का अत्यंत दुर्लभ शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, और जब यह पर्व नवरात्रि के दिनों में पड़ता है, तो इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष 2026 में नवरात्रि की विनायक चतुर्थी किस दिन है और पूजा का सबसे उत्तम समय क्या रहेगा, इसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार, पूजा के लिए जो सवा दो घंटे (लगभग 2 घंटे 15 मिनट) का मुख्य शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया है, उस दौरान गणेश जी की स्थापना और विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इस विशेष मुहूर्त में गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव का वास होता है, और सारे अड़चनें दूर हो जाती हैं। ज्योतिषियों का यह भी सुझाव है कि गृहिणियों और व्रत रखने वाले साधकों को इसी निश्चित समय के भीतर अपनी पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

इस दिन क्यों वर्जित माना जाता है 10 घंटे तक चंद्र दर्शन और इसके पीछे की पौराणिक कथा व मान्यता

हिन्दू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखना बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है, और इस दिन लगभग 10 घंटे तक चंद्र दर्शन पूरी तरह वर्जित (Prohibited) रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश ने चंद्रमा के अपने सौंदर्य पर अहंकार को देखकर उसे यह शाप दे दिया था कि जो भी व्यक्ति चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करेगा, उस पर किसी झूठे कलंक या लांछन का दाग लग जाएगा। यही कारण है कि इस वर्जित अवधि के दौरान लोग अनजाने में भी चांद की तरफ देखने से बचते हैं, ताकि जीवन में किसी प्रकार की मानहानि या झूठी मुसीबत का सामना न करना पड़े। यदि गलती से किसी की नजर चंद्रमा पर पड़ भी जाए, तो शास्त्रों में इसके निवारण के लिए भगवान श्री कृष्ण की स्यमंतक मणि चोरी होने वाली कथा सुनने या विशेष मंत्र का जाप करने का विधान बताया गया है, जिससे दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

नवरात्रि और विनायक चतुर्थी के इस पावन संयोग पर कैसे करें पूजा और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

चूंकि यह पावन पर्व नवरात्रि के दिनों में पड़ रहा है, इसलिए इस दिन मां दुर्गा के साथ-साथ भगवान गणेश की आराधना करना साधकों के लिए दोहरे आशीर्वाद के समान है। सुबह स्नान करने के बाद एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें, और रोली, अक्षत, धूप, दीप व नैवेद्य अर्पित करें। गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग लगाएं तथा 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का कम से कम एक माला जाप अवश्य करें। अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और उन्नति के लिए प्रार्थना करें तथा व्रत का पालन पूरी निष्ठा के साथ करें। इस प्रकार विधि-विधान से पूजा करने से विघ्नहर्ता आपके जीवन के सभी संकटों को दूर कर देंगे और आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

Back to top button