पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विद्रोह से हिली शहबाज सरकार, आधी रात घरों में घुस रही पाकिस्तानी फौज, प्रदर्शनकारी गायब

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भड़की बगावत और सिविल नाफरमानी की आग ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया है। बुनियादी हक, आटे-बिजली की किल्लत और भारी टैक्स के खिलाफ शुरू हुआ आम जनता का आंदोलन अब पूरी तरह से पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ तख्तापलट और आजादी के विद्रोह में बदल चुका है। ताजा जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक, इस बगावत को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना और वहां की खूंखार खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। पूरे क्षेत्र में अघोषित मार्शल लॉ जैसे हालात बन गए हैं।
रात के अंधेरे में एक्टिव हुए पाकिस्तानी फौज के 'डेथ स्क्वाड'
PoK के स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया के जरिए छनकर आ रही खबरों के अनुसार, मुजफ्फराबाद, पुंछ और मीरपुर जैसे प्रमुख शहरों में पाकिस्तानी फौज ने खौफनाक ऑपरेशन शुरू किया है। प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले स्थानीय नेताओं, युवाओं और यहां तक कि पत्रकारों को रात के अंधेरे में उनके घरों से जबरन उठाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना की गाड़ियां बिना किसी वारंट के रिहायशी इलाकों में दाखिल हो रही हैं और बूटों की धमक से मासूम परिवारों को डराया जा रहा है। अगवा किए गए दर्जनों प्रदर्शनकारियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे उनके परिजनों में अनहोनी का डर बैठ गया है।
घरों के दरवाजे तोड़कर महिलाओं और बच्चों से बदसलूकी
पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना की टुकड़ियां अब सीधे आम नागरिकों के घरों को निशाना बना रही हैं। स्थानीय सूत्रों ने पुष्टि की है कि बगावत की आवाज को दबाने के लिए फौज जबरन घरों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुस रही है। इस दौरान घरों में मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार और मारपीट की जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया गया है ताकि घाटी के अंदर सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के वीडियो और तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें। हालांकि, इस दमन चक्र के बावजूद स्थानीय लोगों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
'हक दो आंदोलन' बना आजादी की जंग, भारत से उम्मीदें
शुरुआत में बिजली के भारी-भरकम बिलों और आटे की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ शुरू हुआ 'अवामी एक्शन कमेटी' का यह आंदोलन अब पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले चुका है। PoK की जनता अब खुलेआम पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 'गो बैक' के नारे लगा रही है। कई इलाकों में पाकिस्तान के झंडे उतारे जाने और भारत के पक्ष में नारे लगने की खबरें भी सामने आई हैं। स्थानीय प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान दशकों से उनके प्राकृतिक संसाधनों की लूट कर रहा है और बदले में उन्हें सिर्फ गरीबी और जुल्म मिल रहा है। इस बगावत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई बड़ी चिंता, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग
PoK में चल रहे इस खूनी दमन चक्र पर वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तानी फौज की इस बर्बरता को तुरंत नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में यह विद्रोह एक बड़े गृहयुद्ध में बदल सकता है। अपनी नाकामी को छिपाने के लिए पाकिस्तानी सेना अब नियंत्रण रेखा (LoC) पर भी तनाव बढ़ाने की साजिश रच सकती है, जिससे पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र की सुरक्षा दांव पर लग गई है।