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पाकिस्तान तो फेल रहा, भारत कर दिखाएगा, रक्षामंत्री ने दिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के संकेत

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा और निर्णायक बयान दिया है। जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मन संसदीय समिति को संबोधित करते हुए संकेत दिए कि भारत इस वैश्विक संकट को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा कि जो काम पाकिस्तान नहीं कर सका, उसे भारत अंजाम देने की क्षमता रखता है।”होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान हमारे लिए कड़वी सच्चाई”रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में होने वाला कोई भी व्यवधान भारत के लिए कोई दूर की घटना नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है। इसका हमारी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी समुद्री व्यापारिक लाइनों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।पाकिस्तान की ‘विफल मध्यस्थता’ पर बड़ा प्रहारराजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ पड़ोसी देश इस संकट में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे थे लेकिन वे पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान तो फेल रहा, लेकिन भारत अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा। हर चीज का एक सही वक्त होता है, और भारत वह देश है जिस पर दुनिया भरोसा करती है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने भी पाकिस्तानी मध्यस्थता के प्रति अविश्वास जताया है।पीएम मोदी ने की राष्ट्रपति ट्रम्प और पेज़ेशकियन से बातसूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ फोन पर चर्चा की है। राजनाथ सिंह ने इन संवादों का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत वैश्विक शांति के लिए ‘Calmness’ (शांति) और ‘Foresight’ (दूरदर्शिता) के साथ काम कर रहा है। उन्होंने संकेत दिए कि भारत दोनों पक्षों के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर सकता है।भारत की ‘प्रोएक्टिव’ रणनीति और सुरक्षा के उपायरक्षामंत्री ने बताया कि भारत ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष ‘मंत्रिसमूह’ (GoM) का गठन किया है।भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल: भारत ने समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने के लिए 12,980 करोड़ रुपये की संप्रभु गारंटी के साथ अपना स्वयं का बीमा पूल बनाया है।ऊर्जा विविधीकरण: भारत ने होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित कर ली है।जर्मनी के साथ रक्षा सहयोग: राजनाथ सिंह ने जर्मनी को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का हिस्सा बनने और रक्षा विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने का भी आह्वान किया।

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