विदेश

पाकिस्तान ने वीजा होने के बाद भी रोके सिख श्रद्धालु, हेमकुंड साहिब यात्रा अटकी

धार्मिक आस्था, भाईचारे और शांति की सभी सीमाओं को लांघते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान की एक बेहद संकीर्ण और हताशा भरी हरकत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी फजीहत करा दी है। भारत के पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन करने के लिए अपनी गहरी धार्मिक आस्था के साथ भारत आने की तैयारी कर रहे 104 सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को पाकिस्तान के फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। इन सभी श्रद्धालुओं के पास भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से जारी किए गए वैध वीजा, पासपोर्ट और यात्रा से जुड़े तमाम कानूनी दस्तावेज पूरी तरह से दुरुस्त थे, इसके बावजूद उन्हें ऐन मौके पर विमान में सवार होने से रोक दिया गया। इस अमानवीय और मनमाने फैसले के कारण सिख श्रद्धालुओं की बहुप्रतीक्षित तीर्थयात्रा न केवल अधर में लटक गई है, बल्कि उन्हें भारी-भरकम आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ा है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था अपनी ही जनता और अल्पसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के बजाय किस हद तक अनुचित अड़ंगेबाजी करने पर उतारू रहती है, जिससे पूरी दुनिया के सिख समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

फैसलाबाद एयरपोर्ट पर एनओसी का बहाना और इमीग्रेशन अधिकारियों की मनमानी

मीडिया रिपोर्ट्स से सामने आई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से भारत आने के लिए लंबे समय से अपनी यात्रा की तैयारियां कर रहे इन 104 सिख श्रद्धालुओं को उस वक्त भारी सदमा लगा, जब वे अपनी यात्रा शुरू करने के लिए फैसलाबाद एयरपोर्ट पहुंचे। नियमों के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान में कोई सीधी विमान सेवा उपलब्ध नहीं है, और इसके अलावा ऐतिहासिक 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से दोनों देशों के बीच का अटारी-वाघा बॉर्डर का जमीनी रास्ता भी पूरी तरह से बंद चल रहा है। इस परिस्थिति में इन श्रद्धालुओं ने तीसरे देश यानी संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते भारत आने की योजना बनाई थी, जिसके तहत उन्हें फैसलाबाद से शारजाह और वहां से नई दिल्ली की फ्लाइट पकड़नी थी। इन सभी ने एयरलाइंस के टिकट पहले ही बुक करा लिए थे और उनके पास भारत का वैध वीजा भी मौजूद था। लेकिन जैसे ही वे एयरपोर्ट के इमीग्रेशन काउंटर पर पहुंचे, पाकिस्तानी अधिकारियों ने अचानक एक नया और बेतुका पेंच फंसाते हुए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' यानी एनओसी की मांग शुरू कर दी। श्रद्धालुओं ने अधिकारियों को समझाने का बहुत प्रयास किया कि उनमें से कोई भी व्यक्ति न तो किसी सरकारी सेवा में है और न ही सरकार के किसी अंग का हिस्सा है, वे सभी विशुद्ध रूप से आम नागरिक हैं जिनके पास अपने देश का पासपोर्ट और भारत का कानूनी वीजा है, इसलिए उन्हें किसी अन्य अनापत्ति प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया।

जत्थे के नेता पापिंदर सिंह का छलका दर्द, आम नागरिकों से एनओसी मांगने पर उठाए सवाल

इस पूरी अवांछित घटना के दौरान एयरपोर्ट पर मौजूद सिख श्रद्धालुओं और इमीग्रेशन अधिकारियों के बीच जमकर बहस भी हुई। इस जत्थे का नेतृत्व कर रहे पापिंदर सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा साझा की और पूरी आपबीती बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके ग्रुप के सभी यात्रियों के पास पासपोर्ट, वीजा और यात्रा से जुड़े सभी दस्तावेज बिल्कुल वैध थे। उन्हें शुक्रवार की दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर शारजाह जाने वाली उड़ान पकड़नी थी, जिसके माध्यम से उन्हें आगे दिल्ली पहुंचना था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यात्रा से पहले किसी भी स्तर पर एनओसी की कोई शर्त नहीं रखी गई थी, तो अचानक एयरपोर्ट पर पहुंचते ही इस मुद्दे को क्यों उछाला गया? फैसलाबाद एयरपोर्ट से ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक अन्य सिख श्रद्धालु बेहद आक्रोशित नजर आता है, जो यह पूछता हुआ दिखाई दे रहा है कि आखिरकार आम नागरिकों के लिए एनओसी का क्या मतलब हो सकता है? उस श्रद्धालु ने कहा कि उनके ग्रुप में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और वे सभी कानून का पालन करने वाले शांतिप्रिय लोग हैं, इसके बावजूद उनके साथ इस तरह का मानसिक उत्पीड़न किया जाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। पाकिस्तानी अधिकारियों की इस हठधर्मिता के कारण उनकी वर्षों पुरानी धार्मिक मनोकामना पर पानी फेरने का प्रयास किया गया है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

दो करोड़ पाकिस्तानी रुपये से अधिक का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान

इस मनमाने रवैये और ऐन मौके पर यात्रा रोके जाने के कारण इन सिख श्रद्धालुओं को न केवल मानसिक संताप झेलना पड़ा है, बल्कि उन्हें बहुत बड़ा वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ा है। फ्लाइट्स के महंगे टिकट, होटलों की बुकिंग और अन्य व्यवस्थाओं के चलते इस पूरे समूह को कुल मिलाकर दो करोड़ पाकिस्तानी रुपये से अधिक का भारी घाटा लगा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें समय पर अपनी तय उड़ानों से जाने दिया होता, तो वे तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार की शाम तक भारत की धरती पर होते और श्री हेमकुंड साहिब की अपनी इस पवित्र यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कर पाते। लेकिन प्रशासनिक अड़ंगों और तानाशाही के कारण उनकी सारी मेहनत और पूंजी बेकार चली गई। वर्तमान स्थिति यह है कि इन सभी 104 श्रद्धालुओं की आगे की यात्रा को लेकर गहरी अनिश्चितता और संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए पाकिस्तानी प्रशासन के समक्ष यह आग्रह भी किया है कि यदि वे हवाई मार्ग से यात्रा की अनुमति नहीं दे रहे हैं, तो कम से कम उन्हें ऐतिहासिक अटारी-वाघा सीमा के रास्ते ही भारत में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए ताकि वे अपनी धार्मिक यात्रा को पूरा कर सकें। हालांकि, यह सर्वविदित है कि सीमाई तनावों और बंद रास्तों के कारण यह विकल्प भी फिलहाल व्यावहारिक नजर नहीं आ रहा है, जिससे इन तीर्थयात्रियों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

 
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