पेट्रोल-डीजल के फिर बढ़ सकते हैं दाम, गोल्डमैन सैक्स की इस रिपोर्ट ने मचाई खलबली

कारोबार डेस्क। आने वाले दिनों में आपकी जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है। पेट्रोल और डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वॉल स्ट्रीट की दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी गोल्डमैन सैक्स की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ईंधन की कीमतों को लेकर चिंताएं काफी गहरी हो गई हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट बनी सबसे बड़ा संकट
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांसपोर्ट रूट यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से कच्चे तेल की सप्लाई में इसी तरह रुकावट जारी रहती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसमान छूते हुए 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, 'रेड सी' यानी लाल सागर से होने वाली शिपिंग में लगातार रुकावट की आशंका ने भी कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने का बड़ा जोखिम पैदा कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में हालात ऐसे ही बने रहे, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम बढ़ सकते हैं।
मिडिल ईस्ट के तनाव और ब्रेंट क्रूड का मौजूदा हाल
हालाँकि, गोल्डमैन सैक्स को यह भी उम्मीद है कि आने वाले समय में मिडिल ईस्ट के हालात सुधरेंगे और तनाव कम होगा। कंपनी का अनुमान है कि अगर मध्य पूर्व में शांति लौटती है, तो इस साल की चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल और अगले साल तक गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकती है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और यमन के हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव फिर से 91 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है। इस बीच, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि तेहरान को मध्यस्थों के जरिए 10 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है, जिससे इस संघर्ष को थामने की उम्मीद जगी है।
भारत पर क्या होगा इसका असर और क्रूड ऑयल आयात की स्थिति
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है और देश अपनी कुल खपत का 70 फीसदी से अधिक कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते जून महीने में भारत का कुल क्रूड ऑयल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया था। इस दौरान रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा और अकेले रूस से आयात बढ़कर करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो कुल आयात का आधे से अधिक है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से होने वाली सप्लाई भी भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती दे रही है।