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पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर केंद्र सरकार का बड़ा चाबुक: ‘पब्लिक एग्जामिनेशन बिल 2026’ में 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का कड़ा प्रावधान

देश भर में NEET-UG, UGC-NET और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक व धांधली को लेकर मचे भारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026' [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026] पेश करेगी।

इस संशोधित विधेयक में पेपर लीक में शामिल अपराधियों, कोचिंग सेंटरों, सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और संगठित गिरोहों (Organized Crime Syndicates) के लिए सजा और जुर्माने की रकम में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। आइए एक नेशनल अफेयर्स और एजुकेशन-पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस नए प्रस्तावित कानून के 5 सबसे कड़े प्रावधान।

1. परीक्षा घोटालों में सजा और जुर्माने की नई सीमा

सरकार ने इस संशोधित कानून में दोषियों के लिए सजा और वित्तीय जुर्माने का दायरा बहुत बढ़ा दिया है:

अपराध श्रेणी पुरानी सजा / जुर्माना नया प्रस्तावित कानून (2026)
अनुचित साधनों का इस्तेमाल कम सजा / ₹10 लाख जुर्माना 5 से 10 साल की जेल + ₹50 लाख तक जुर्माना
सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियां 4 साल बैन / ₹1 करोड़ जुर्माना 8 साल का बैन + ₹5 करोड़ तक जुर्माना
कंपनी के निदेशक / वरिष्ठ अधिकारी कम कठोर नियम कम से कम 5 साल जेल + ₹5 करोड़ तक जुर्माना
संगठित माफिया / गिरोह 5 साल जेल / ₹1 करोड़ जुर्माना 7 से 10 साल जेल + ₹10 करोड़ न्यूनतम जुर्माना

2. स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट और 3 महीने में न्याय का लक्ष्य

अदालतों में मुकदमों के सालों-साल खिंचने की समस्या को खत्म करने के लिए विधेयक में बहुत ही सख्त समय-सीमा (Timeline) तय की गई है:

  • स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UT) में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा, जहां केवल परीक्षा घोटालों के मामलों की रोजाना सुनवाई (Daily Hearing) होगी।

  • 3 महीने में फैसला: चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत को 3 महीने (90 दिन) के भीतर अपना अंतिम फैसला देना होगा। कानून बनने के बाद पुराने लंबित मामलों को भी इन्हीं अदालतों में शिफ्ट किया जाएगा।

  • हाई कोर्ट में अपील की समय-सीमा: फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच में अपील की जा सकेगी, जिस पर भी 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी।

3. STF करेगी जांच, 2 महीने में देनी होगी रिपोर्ट

पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों की निष्पक्ष और तेज जांच के लिए केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन कर सकेगी।

  • 2 महीने की समय-सीमा: पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी (जैसे CBI) या गठित STF को किसी भी सूरत में 2 महीने (60 दिन) के भीतर अपनी जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल करनी होगी, ताकि दोषियों को तुरंत कानूनी शिकंजे में लाया जा सके।

  • स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को इन मामलों को मजबूती से लड़ने के लिए विशेष सरकारी वकील (Special Public Prosecutor) नियुक्त करने का अधिकार भी दिया गया है।

लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा का लक्ष्य

हाल के महीनों में नीट और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई धांधली से लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के मन में परीक्षा प्रणाली के प्रति अविश्वास की स्थिति बन गई थी। केंद्र सरकार का मानना है कि फास्ट-ट्रैक अदालतों, भारी आर्थिक जुर्माने और कठोर जेल की सजा जैसे प्रावधानों के लागू होने के बाद परीक्षा माफिया और कोचिंग सिंडिकेट पर नकेल कसेगी और सरकारी परीक्षाओं की पवित्रता फिर से बहाल हो सकेगी

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