पेपर लीक पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा प्रहार: 10 साल की जेल, 10 करोड़ जुर्माना, नंदन नीलेकणि को मिली बड़ी जिम्मेदारी

देशभर में सरकारी नौकरी और मेडिकल-इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन बेहद अहम है। देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और नीट (NEET) विवाद के बीच, केंद्र सरकार आज (सोमवार, 27 जुलाई) लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पेश करने जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले भारी विरोध प्रदर्शन और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है।
नकल माफियाओं पर कसेगा शिंकजा: 10 करोड़ का जुर्माना
इस नए बिल (पब्लिक एग्जामिनेशन अधिनियम, 2024 में संशोधन) के कानून बनने के बाद शिक्षा माफियाओं की खैर नहीं है। अगर कोई भी व्यक्ति पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करता पाया गया, तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा। वहीं, अगर कोई बड़ा संगठित गिरोह इस खेल में शामिल मिलता है, तो सजा 7 साल से शुरू होगी और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक जा सकता है।
2 महीने में पूरी होगी जांच, बनेंगी फास्ट-ट्रैक अदालतें
अक्सर ऐसे मामलों में न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं, लेकिन नए कानून में ऐसा नहीं होगा। किसी भी धांधली की जांच सिर्फ दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी, जिन्हें चार्जशीट दाखिल होने के महज तीन महीने के अंदर अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा।
नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स करेगी NTA में सुधार
एग्जाम सिस्टम में छात्रों का भरोसा वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का भी ऐलान किया है। 'आधार' जैसे सफल प्रोजेक्ट की नींव रखने वाले इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इस टीम में इसरो (ISRO) के पूर्व चीफ एस. सोमनाथ, आईबी (IB) के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, आईआईटी (IIT) चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी और पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल जैसे दिग्गज भी शामिल हैं।
प्रल्हाद जोशी के हाथों में शिक्षा मंत्रालय की कमान
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। गृह मंत्री अमित शाह से अहम मुलाकात के बाद जोशी ने स्पष्ट किया है कि इस नए बिल और नीलेकणि की टास्क फोर्स का मुख्य लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए देश की परीक्षा प्रणाली को 100% सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो।