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पेपर लीक माफिया पर शिकंजा: एमपी हाईकोर्ट ने गठित किए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट, 3 महीने में सुनाना होगा फैसला

देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के खिलाफ जारी भारी आक्रोश व छात्र आंदोलनों के बीच मध्य प्रदेश सरकार और एमपी हाईकोर्ट ने कड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में लोक परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई व दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Courts) गठित किए हैं। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने की हरसंभव कोशिश की जाए। आइए एक लीगल और पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि यह व्यवस्था कैसे काम करेगी और किन जजों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

केंद्र के आश्वासन और सीएम मोहन यादव के ऐलान के बाद बड़ा कदम

यह फैसला राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा त्वरित अदालतें गठित करने के आश्वासन के महज दो दिन बाद आया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश के चार बड़े संभागों में त्वरित अदालतों की घोषणा के तुरंत बाद, हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए।

इन 4 शहरों में तैनात किए गए ये 4 न्यायाधीश

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 (Public Examinations Act, 2024) और भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए निम्नलिखित जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है:

  1. भोपाल: 18वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल

  2. इंदौर: 26वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह

  3. ग्वालियर: 8वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड

  4. जबलपुर: 27वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार सेहलम

पूरे प्रदेश पर रहेगा अधिकार क्षेत्र, 3 महीने की समय सीमा

  • क्षेत्रीय विभाजन: ये चार विशेष अदालतें न केवल अपने मुख्यालय वाले जिलों बल्कि उनसे संबद्ध आसपास के निर्धारित जिलों के मामलों की भी सुनवाई करेंगी, जिससे पूरे मध्य प्रदेश के पेपर लीक केसों को कवर किया जा सके।

  • समयबद्ध न्याय: हाईकोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने से 3 महीने के भीतर जांच प्रक्रिया और गवाही पूरी कर केस को तार्किक अंत तक पहुंचाया जाए।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोक परीक्षाओं में शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना है, ताकि सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के बजाय दोषियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जा सके और पीड़ित युवाओं को समय पर न्याय मिल सके।

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