उत्तर प्रदेश

प्राकृतिक आपदा हो या मौसम की मार… फसलों के नुकसान पर मिलेगी आर्थिक सहायता; जानें क्या है फसल बीमा योजना

भारत में कृषि पूरी तरह से प्रकृति और मौसम के मिजाज पर निर्भर रहती है। कभी सूखा, कभी बेमौसम मूसलाधार बारिश, तो कभी ओलावृष्टि और कीटों का हमला किसानों की महीनों की मेहनत और खून-पसीने की कमाई को पल भर में तबाह कर देता है। किसानों को इस वित्तीय संकट से बचाने और उन्हें खेती-किसानी में सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' (PMFBY – Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) चलाई जा रही है। इस योजना के तहत बुआई से लेकर कटाई के बाद तक यदि प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को नुकसान पहुंचता है, तो बीमा कंपनियां किसानों को तय मापदंडों के अनुसार सीधा वित्तीय मुआवजा (Compensation) प्रदान करती हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कितना देना होता है प्रीमियम?

पीएम फसल बीमा योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद कम और किफायती प्रीमियम (Premium Rate) है। बाकी का बचा हुआ भारी-भरकम प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करती हैं:

  • खरीफ फसलें (धान, मक्का, बाजरा, कपास आदि): बीमित राशि (Sum Insured) का केवल 2.0%

  • रबी फसलें (गेहूं, सरसों, चना, जौ आदि): बीमित राशि का केवल 1.5%

  • वाणिज्यिक व बागवानी फसलें (गन्ना, कपास, फल, सब्जियां): बीमित राशि का अधिकतम 5.0%

किन-किन आपदाओं और स्थितियों में मिलता है कवर?

PMFBY के तहत फसलों को व्यापक सुरक्षा कवर दिया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित जोखिम शामिल हैं:

  1. बुआई न हो पाना (Prevented Sowing): यदि खराब मौसम या कम बारिश के कारण किसान जमीन तैयार करने के बाद भी बुआई नहीं कर पाता है।

  2. खड़ी फसल को नुकसान (Standing Crop Damage): सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, चक्रवात, आकाशीय बिजली, आग या कीटों/बीमारियों के हमले से खड़ी फसल का नष्ट होना।

  3. कटाई के बाद का नुकसान (Post-Harvest Losses): फसल कटाई के बाद यदि खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को चक्रवात या बेमौसम बारिश से नुकसान पहुंचता है (कटाई के 14 दिनों तक का कवर)।

फसल नुकसान होने पर क्लेम (Claim) कैसे करें?

यदि आपकी बीमित फसल को प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान हुआ है, तो मुआवजा पाने के लिए इन चरणों का पालन करना अनिवार्य है:

  • 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य: फसल नुकसान के 72 घंटे (3 दिन) के भीतर किसान को इसकी जानकारी देनी होगी।

  • सूचना कहां दें: किसान टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके, 'फसल बीमा ऐप' (Fasal Bima App) के माध्यम से, या अपने नजदीकी कृषि अधिकारी/बैंक शाखा में जाकर लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  • सर्वे और सत्यापन: सूचना मिलने के बाद कृषि विभाग और बीमा कंपनी की संयुक्त टीम खेत में जाकर नुकसान का सर्वेक्षण (Survey) करती है।

  • डीबीटी द्वारा भुगतान: नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद क्लेम की राशि सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते (DBT) में ट्रांसफ़र कर दी जाती है।

योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज और आवेदन करने का तरीका

जो किसान इस योजना से जुड़ना चाहते हैं (चाहे ऋणी किसान हों या गैर-ऋणी), वे बुआई के मौसम के दौरान ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं:

  • जरूरी दस्तावेज: आधार कार्ड, खसरा/खतौनी (जमीन के दस्तावेज), बैंक पासबुक की कॉपी, फसल बुआई का स्व-घोषणा पत्र (Sowing Certificate) और मोबाइल नंबर।

  • आवेदन प्रक्रिया: किसान अधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in पर जाकर खुद ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके अलावा अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), जन सेवा केंद्र या उस बैंक शाखा में जाकर भी फॉर्म भर सकते हैं जहां उनका खाता है।

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