फ्लाईदुबई फ्लाइट हादसा: कैप्टन स्मित माछर के घायल होने के बाद कॉकपिट में किसने संभाला मोर्चा

दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' (Flydubai) की उड़ान FZ1073 के दौरान हुई खौफनाक और सनसनीखेज घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस फ्लाइट के भारतीय कैप्टन स्मित माछर (Smit Machchhar) की बहादुरी और सूझबूझ ने 180 यात्रियों की जान बचा ली है, क्योंकि सह-पायलट द्वारा अचानक किए गए चाकू के जानलेवा हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
घटना के दौरान सुबह करीब 8:20 बजे विमान ने अचानक बेहद तेजी से नीचे की ओर गोता लगाना शुरू कर दिया था और महज दो मिनट के भीतर ही विमान 17,400 फीट नीचे आ गया था, जिससे यात्रियों में भारी चीख-पुकार मच गई थी। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब मुख्य पायलट स्मित माछर गंभीर रूप से घायल हो चुके थे, तब आखिर उस संकट की स्थिति में विमान को सुरक्षित नीचे किसने उतारा?
कॉकपिट के भीतर का वह खौफनाक मंजर और राहत पायलटों की भूमिका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब कॉकपिट के भीतर ओमानी को-पायलट और कैप्टन माछर के बीच हिंसक हाथापाई चल रही थी और विमान अनियंत्रित होने लगा था, तब कॉकपिट से आई 'बचाओ-बचाओ' की आवाज़ों को सुनकर केबिन क्रू और विमान में आगे बैठे यात्री तुरंत मदद के लिए आगे आए। यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए हमलावर को कॉकपिट से बाहर खदेड़ा और स्थिति पर काबू पाया।
इसके बाद, विमान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत, उस फ्लाइट में ड्यूटी पर मौजूद न होने वाले दो राहत (रिलीफ) पायलट तुरंत आगे आए। इन दोनों रिलीफ पायलटों ने यात्रियों और क्रू के सदस्यों की मदद से कॉकपिट का नियंत्रण अपने हाथों में लिया। इन अनुभवी पायलटों ने बेहद शांत चित्त और असाधारण कौशल का परिचय देते हुए विमान को अनियंत्रित होने से बचाया और उसे सऊदी अरब के ताबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से लैंड कराया।
डेंटिस्ट यात्री ने संभाला चिकित्सीय मोर्चा
एक तरफ जहां रिलीफ पायलट विमान को सुरक्षित उतारने की जद्दोजहद में जुटे थे, वहीं विमान के भीतर एक और अनूठा वाकया हुआ। कॉकपिट की इस हिंसक झड़प में बुरी तरह घायल हुए भारतीय कैप्टन स्मित माछर के सिर और हाथों से भारी मात्रा में खून बह रहा था।
गनीमत यह रही कि उस फ्लाइट में शोता मुसायेव नाम के एक डेंटिस्ट (डॉक्टर) यात्री भी सफर कर रहे थे। जैसे ही हमलावर को काबू में किया गया, डॉक्टर मुसायेव तुरंत कैप्टन माछर के पास पहुंचे और फ्लाइट में उपलब्ध संसाधनों की मदद से उनके घावों का प्राथमिक उपचार किया तथा लैंडिंग से पहले तक उनकी स्थिति को स्थिर बनाए रखा। इन सभी जांबाजों, रिलीफ पायलटों और यात्रियों के संयुक्त प्रयासों से आज 180 लोगों की जिंदगी सुरक्षित बच सकी है।