विदेश

बलूचों के खौफ से कांप उठा पाकिस्तान, BLA से निपटने के लिए ईरान के सामने गिड़गिड़ाए असीम मुनीर

पाकिस्तान की सेना और सरकार इस समय बलूचिस्तान के बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA के लगातार हमलों से गहरे संकट में घिर चुकी है। स्थिति इतनी बेकाबू हो चुकी है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अब इस आंतरिक और बाहरी खतरे से निपटने के लिए पड़ोसी देश ईरान के सामने मदद की भीख मांगते नजर आ रहे हैं। बलूच स्वतंत्रता सेनानियों के आक्रामक तेवर और लगातार मिल रही सैन्य चुनौतियों ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। बलूचिस्तान में सुलग रही बगावत की आग और BLA के बढ़ते खौफ ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है, जिससे शाहबाज शरीफ सरकार और सेना मुख्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।

बलूचिस्तान में गहराता संकट और BLA की बढ़ती ताकत

बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के दमनकारी रवैये के खिलाफ आवाज उठाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में बलूच लिबरेशन आर्मी ने जिस तरह से अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत की है, उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के होश उड़ा दिए हैं। BLA के लड़ाके लगातार पाकिस्तानी सेना के ठिकानों, सैन्य काफिलों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहे हैं। पाकिस्तानी सेना की लाख कोशिशों और क्रूर दमन के बावजूद बलूच विद्रोहियों के हौसले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालात यह हैं कि बलूचिस्तान के कई इलाकों में पाकिस्तानी सेना का पहुंचना भी मुश्किल हो गया है, जिससे वहां की सत्ता और सेना दोनों पूरी तरह लाचार नजर आ रही हैं।

जनरल असीम मुनीर की मजबूरी और ईरान के सामने कूटनीतिक गिड़गिराहट

अपनी सेना के लगातार होते नुकसान और बलूच विद्रोहियों के आगे लाचार हो चुके पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अब अपनी साख बचाने के लिए ईरान की शरण लेने का फैसला किया है। बलूचिस्तान की सीमा ईरान से भी सटी हुई है, और पाकिस्तानी सेना यह जानती है कि बिना क्षेत्रीय सहयोग के BLA के नेटवर्क को कुचल पाना उनके अकेले के बस की बात नहीं है। खबरों के मुताबिक, असीम मुनीर ने तेहरान के सामने हाथ फैलाते हुए बलूच विद्रोहियों के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने और सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। कभी अपनी धमक और परमाणु ताकत का दिखावा करने वाला पाकिस्तान आज एक विद्रोही संगठन के सामने इस कदर बेबस हो चुका है कि उसे दूसरे देशों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है।

क्षेत्रीय कूटनीति पर असर और ईरान का रुख

पाकिस्तान की इस अपील पर ईरान का क्या रुख रहता है, इस पर पूरी दुनिया की पैनी नजर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच पहले से ही सीमा सुरक्षा और बलूच शरणार्थियों या विद्रोहियों की आवाजाही को लेकर तनाव और अविश्वास का माहौल रहा है। ईरान भली-भांति जानता है कि पाकिस्तान अपने आंतरिक कुप्रबंधन और बलूचिस्तान के लोगों पर किए गए अत्याचारों के खुद जिम्मेदार हैं। ऐसे में तेहरान खुलकर पाकिस्तान की सेना के पाले में खड़ा होगा या अपने कूटनीतिक हितों को साधते हुए दूरी बनाए रखेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। हालांकि, इतना तय है कि जनरल असीम मुनीर की यह बौखलाहट और मजबूरी इस बात का पुख्ता सबूत है कि पाकिस्तान अब अंदर से खोखला हो चुका है।

पाकिस्तान के विघटन का डर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती चिंता

बलूचिस्तान का यह सुलगता हुआ संघर्ष केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भी खलबली मचा दी है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच नागरिकों पर किए जाने वाले अत्याचारों की पोल लगातार खोली जाती रही है। दुनिया भर के विशेषज्ञ अब यह मानने लगे हैं कि पाकिस्तान की दमनकारी नीतियां ही उसके टूटने का सबसे बड़ा कारण बनेंगी। BLA का बढ़ता खौफ और पाकिस्तानी सेना की हर मोर्चे पर नाकामी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान का आंतरिक संकट और अधिक गहरा सकता है, जिससे न केवल सेना प्रमुख असीम मुनीर बल्कि पूरे पाकिस्तानी तंत्र का भविष्य खतरे में पड़ गया है।

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