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बाबा बर्फानी के जयकारों से गूंजा जम्मू: LG मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना

देशभर में फैली अगाध आस्था, असीम उत्साह और अटूट शिवभक्ति के पावन माहौल के बीच गुरुवार सुबह 'श्री अमरनाथ यात्रा-2026' का विधिवत और भव्य शुभारंभ हो गया है. जम्मू के भगवती नगर स्थित मुख्य 'यात्री निवास बेस कैंप' से भोलेनाथ के भक्तों का पहला जत्था 'बम-बम भोले', 'जय बाबा बर्फानी' और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष के साथ पवित्र गुफा की ओर कूच कर गया. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने तड़के बेस कैंप पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की और पावन छड़ी मुबारक की अगवानी करते हुए श्रद्धालुओं के इस पहले काफिले को हरी झंडी दिखाकर औपचारिक रूप से रवाना किया.

57 दिनों तक चलेगी आस्था की महायात्रा, रक्षाबंधन पर होंगे अंतिम दर्शन

श्रद्धालुओं का यह पहला जत्था कश्मीर के दो मुख्य रास्तों— बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए रवाना किया गया है. इन दोनों ही ट्रेकिंग रूटों से भक्त शुक्रवार, 3 जुलाई से ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी पैदल या खच्चर से आगे की चढ़ाई शुरू करेंगे. आपको बता दें कि इस वर्ष यह पावन धार्मिक यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक अनवरत चलेगी. पूरे 57 दिनों तक चलने वाला आस्था का यह महापर्व सावन महीने के आखिरी दिन यानी रक्षाबंधन के पावन पर्व पर संपन्न होगा.

'वेकेशन नहीं, बाबा का बुलावा आया है' – जयपुर के युवाओं में दिखा अनोखा क्रेज

यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं, खासकर युवाओं में एक अलग ही लेवल का जोश और दीवानगी देखने को मिल रही है. जी मीडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए 'GenZ ग्रुप' के युवा शिवभक्तों ने बेहद दिल छू लेने वाली बात कही. उन्होंने कहा, "आजकल की जनरेशन छुट्टियों में मौज-मस्ती करने के लिए अक्सर विदेशों या आलीशान हिल स्टेशंस का रुख करती है, लेकिन हमारे लिए दुनिया का सबसे बड़ा सौभाग्य और एडवेंचर बाबा बर्फानी के दरबार में हाजिरी लगाना है. जब बाबा का बुलावा आता है, तो पहाड़ों की हर मुश्किल आसान हो जाती है."

थ्री-लेयर सिक्योरिटी: चप्पे-चप्पे पर CRPF का पहरा और वाहनों की कड़क चेकिंग

मिडिल ईस्ट और सीमा पार के मौजूदा हालातों को देखते हुए इस बार यात्रा की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अभेद्य सुरक्षा कवच के घेरे में रवाना किया गया. बख्तरबंद वाहनों का काफिला पूरे रास्ते यात्रियों के आगे और पीछे मुस्तैद रहा. सुरक्षा मानकों को कड़ा करते हुए यात्रा में शामिल हर एक सरकारी और प्राइवेट गाड़ी की आधुनिक मेटल डिटेक्टरों और स्निफर डॉग्स के जरिए गहन जांच की गई. पूरी तरह ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही गाड़ियों को काफिले में शामिल होने का 'विशेष सत्यापन टैग' जारी किया गया.

आसमान से ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की नजर, हाईटेक हुआ कंट्रोल रूम

अमरनाथ यात्रा रूट पर इस बार 'थ्री-लेयर' यानी बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड लागू किया गया है. भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के जवान पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील और पहाड़ी इलाकों में चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के लिए हाई-डेफिनिशन ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी नेटवर्क और किसी भी संदिग्ध हवाई खतरे से निपटने के लिए आधुनिक 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' लगाए गए हैं. इसके साथ ही, प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए कश्मीर के दुर्गम रास्तों पर दर्जनों बड़े लंगर, अत्याधुनिक मेडिकल कैंप, हाईटेक एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल और चौबीसों घंटे एक्टिव रहने वाले हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं.

RFID कार्ड के बिना नो एंट्री: प्रशासन ने जारी की सख्त गाइडलाइन

अमरनाथ श्राइन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले सभी यात्रियों से एक बेहद जरूरी अपील की है. अधिकारियों ने साफ किया है कि कोई भी यात्री बिना वैध रजिस्ट्रेशन (Valid Registration) और अनिवार्य बारकोडेड RFID कार्ड के यात्रा रूट पर आगे नहीं बढ़ सकेगा. भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत लोकेशन ट्रैक करने के लिए यह आरएफआईडी कार्ड बेहद जरूरी किया गया है. हिमालय की दुर्गम और बर्फीली चोटियों के बीच प्राकृतिक रूप से निर्मित होने वाले हिम शिवलिंग (Ice Stalagmite) के अलौकिक दर्शन के लिए इस साल भी रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है, जिसके लिए रेस्क्यू टीमें भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं.

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