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ब्रिटेन में वर्क वीजा को लेकर आया नया प्रशासनिक फरमान

यूनाइटेड किंगडम (UK) में नौकरी कर रहे लाखों विदेशी पेशेवरों और विशेष रूप से भारतीय आईटी व हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावकारी खबर सामने आई है। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (Home Office) ने वर्क वीजा, विशेषकर 'स्किल्ड वर्कर वीजा' (Skilled Worker Visa) के नियमों में एक नया और कड़ा संशोधन लागू कर दिया है। सरकार के इस नए प्रशासनिक फैसले के तहत, यदि कोई विदेशी कर्मचारी अपनी मौजूदा स्पॉन्सर कंपनी को छोड़कर किसी दूसरी कंपनी में नौकरी जॉइन करना चाहता है, तो उसे एक पूरी तरह से नए अप्रूवल और असेसमेंट प्रोसेस से गुजरना होगा। ब्रिटेन में शरणार्थियों और अप्रवासियों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने तथा स्थानीय श्रम बाजार को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लाए गए इस नियम ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय और भारतीय पेशेवरों की चिंताएं काफी हद तक बढ़ा दी हैं।

आखिर क्या है ब्रिटेन का नया कंपनी स्विचिंग नियम और स्पॉन्सरशिप का नया गणित?

पुराने नियमों के तहत, जब कोई विदेशी कर्मचारी अपनी पहली कंपनी छोड़ता था, तो नई कंपनी आसानी से उसका वीजा स्पॉन्सरशिप ट्रांसफर कर लेती थी और कर्मचारी को देश छोड़ने या किसी लंबी जांच प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ता था। लेकिन नए नियमों के तहत अब ब्रिटेन सरकार ने स्पॉन्सरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया है। नए प्रावधानों के मुताबिक, कर्मचारी द्वारा पुरानी कंपनी छोड़ते ही उसका वर्क वीजा स्टेटस तुरंत रिव्यू के दायरे में आ जाएगा। यदि नई कंपनी के पास सरकार द्वारा स्वीकृत वैध 'स्पॉन्सरशिप लाइसेंस' नहीं है या फिर नई नौकरी की प्रस्तावित सैलरी सरकार द्वारा तय की गई नई उच्च न्यूनतम सीमा (Salary Threshold) से कम पाई जाती है, तो वीजा एप्लीकेशन को तुरंत खारिज कर दिया जाएगा। इसके अलावा, कर्मचारी को अपनी पुरानी जॉब खत्म होने और नई जॉब शुरू होने के बीच के समय का भी बहुत बारीकी से लेखा-जोखा देना होगा।

यूके में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स और डॉक्टर्स के लिए क्यों जरूरी है यह बड़ा अपडेट?

ब्रिटेन का वर्क वीजा हासिल करने वाले विदेशी कार्यबल में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। आईटी (IT), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में कार्यरत डॉक्टर्स, नर्स और फाइनेंस सेक्टर के लाखों भारतीय इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह अपडेट इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि कई बार भारतीय पेशेवर बेहतर सैलरी, अच्छे वर्किंग कल्चर या प्रमोशन के चक्कर में एक-दो साल के भीतर कंपनियां बदल लेते थे। अब नए नियमों के कारण ऐसा करना उनके वीजा स्टेटस और ब्रिटेन में स्थायी निवास यानी 'इंडेफिनिट लीव टू रिमेन' (ILR) की योग्यता पर भारी पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी बिना पूरी तैयारी या नई कंपनी के कागजात की जांच किए बिना पुरानी नौकरी से इस्तीफा दे देता है, तो उसे ब्रिटेन छोड़ने का नोटिस (Curtailed Visa) भी जारी किया जा सकता है।

भारतीय वर्कर्स को नौकरी बदलते समय किन 5 खास बातों का रखना होगा ध्यान?

यदि आप ब्रिटेन में वर्क वीजा पर कार्यरत हैं और अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने या नई नौकरी में स्विच करने का मन बना रहे हैं, तो आपको बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। सबसे पहले, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपकी नई कंपनी का 'Certificate of Sponsorship' (CoS) पूरी तरह से वैध और अपडेटेड हो। दूसरा, नई नौकरी में मिलने वाली सैलरी ब्रिटेन सरकार के नए सैलरी मानकों के पूरी तरह अनुरूप होनी चाहिए। तीसरा, पुरानी कंपनी का नोटिस पीरियड खत्म होने और नई कंपनी में जॉइनिंग की तारीख के बीच कोई लंबा गैप नहीं होना चाहिए, वरना होम ऑफिस आपके वीजा को रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर सकता है। चौथा, आपको अपनी पूरी इमिग्रेशन हिस्ट्री और टैक्स रिकॉर्ड्स को अपडेट रखना होगा। अंत में, कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले किसी प्रमाणित यूके इमिग्रेशन वकील (Immigration Solicitor) की सलाह लेना आपके लिए सबसे सुरक्षित रणनीति साबित होगी।

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