भारतीय बाजार में डीजल कारों की जोरदार वापसी: E20 पेट्रोल की चिंता और SUVs के क्रेज से बढ़ी बिक्री, जानें आंकड़े

पिछले कुछ वर्षों में सख्त उत्सर्जन मानकों और पेट्रोल, सीएनजी व इलेक्ट्रिक (EV) गाड़ियों के विकल्प आने से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में डीजल कारों की मांग घटी थी। लेकिन अब बाजार का रुख एक बार फिर बदलता नजर आ रहा है। E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर कार खरीदारों के मन में बढ़ती चिंताओं और भारी-भरकम SUVs की मांग के चलते डीजल कारों की लोकप्रियता में अचानक बड़ा उछाल आया है।
वाहन (Vahan) और फाडा (FADA) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून और चालू वित्त वर्ष के दौरान डीजल गाड़ियों की बिक्री और मार्केट शेयर दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आइए एक ऑटोमोबाइल और बिजनेस रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं डीजल कारों की इस वापसी के आंकड़े और इसके पीछे के मुख्य कारण।
बिक्री के आंकड़े: डीजल कारों के मार्केट शेयर में भारी उछाल
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मार्केट शेयर में बढ़त: भारत के पैसेंजर व्हीकल (PV) मार्केट में डीजल कारों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 (FY26) में जो 18.08% थी, वह वित्त वर्ष 2027 (FY27) में बढ़कर 19.39% हो चुकी है।
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मंथली रजिस्ट्रेशन में 15% का उछाल: मंथली डीजल वाहन रजिस्ट्रेशन में लगभग 15% की बढ़त देखी गई है। पिछले वित्त वर्ष में जहां लगभग 71,400 यूनिट्स पंजीकृत हुई थीं, वहीं इस वित्त वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर 82,000 यूनिट्स प्रति माह तक पहुंच गया है।
डीजल कारों की बिक्री बढ़ने के 3 सबसे बड़े कारण
1. E20 पेट्रोल और इंजन की लाइफ को लेकर ग्राहकों की चिंता
सरकार द्वारा पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण (E20 पेट्रोल) अनिवार्य किए जाने के बाद से कई खरीदार असमंजस में हैं।
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हालांकि कार कंपनियां (जैसे मारुति सुजुकी) दावा करती हैं कि उनकी नई बीएस-6 फेज-2 गाड़ियां E20 रेडी हैं, लेकिन ग्राहकों को चिंता है कि लंबे समय तक इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से इंजन के पार्ट्स और परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।
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जो ग्राहक अपनी कार को 8-10 साल या उससे अधिक समय तक चलाना चाहते हैं, वे जोखिम उठाने के बजाय भरोसेमंद डीजल इंजन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2. 15 लाख+ सेगमेंट में SUVs की भारी मांग
भारतीय ऑटो बाजार में आज ₹15 लाख या उससे महंगे बजट वाली प्रीमियम SUVs की मांग सबसे ज्यादा है।
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दमदार टॉर्क और हाईवे परफॉर्मेंस: बड़ी गाड़ियों और SUVs के लिए डीजल इंजन का लो-एंड टॉर्क (Low-end Torque) और हाईवे पर लॉन्ग-ड्राइव कम्फर्ट बेजोड़ माना जाता है।
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टाटा मोटर्स का बयान: टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी शैलेश चंद्र ने पुष्टि की है कि जब भी 15 लाख रुपये से ऊपर के सेगमेंट में एसयूवी की बिक्री बढ़ती है, तो ग्राहक स्वाभाविक रूप से डीजल वेरिएंट्स को ही चुनते हैं।
3. लग्जरी सेगमेंट में डीजल का दबदबा कायम
लग्जरी कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) के अनुसार, भारत में उनकी कुल बिक्री का लगभग 40% हिस्सा अभी भी डीजल वाहनों का है।
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कंपनी के मुताबिक, प्रीमियम ग्राहक 'टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप' (रनिंग कॉस्ट) को प्राथमिकता देते हैं।
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लंबी दूरी तय करने वाले चालकों के लिए पेट्रोल की ऊंची कीमतों के मुकाबले डीजल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स आज भी आर्थिक रूप से अधिक किफायती साबित हो रहे हैं।