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असम में सफाई अभियान सीएम हिमंत का बड़ा खुलासा- हटाए गए 10 लाख फर्जी नाम जानें क्या है पूरा मामला

News India Live, Digital Desk : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में चल रहे ‘शुद्धिकरण’ अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने राशन कार्ड (NFSA) और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची की बारीकी से जांच की, जिसमें 10 लाख से अधिक ऐसे नाम मिले जो या तो अस्तित्व में नहीं थे या नियमों के खिलाफ अवैध रूप से लाभ ले रहे थे।मुख्यमंत्री के बयान की मुख्य बातें:सीएम सरमा ने एक सार्वजनिक संबोधन में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल भ्रष्टाचार रोकने के लिए नहीं, बल्कि राज्य के संसाधनों पर वास्तविक नागरिकों का अधिकार सुरक्षित करने के लिए है।10 लाख कार्ड रद्द: जांच के दौरान पाया गया कि कई लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राशन ले रहे थे। इन नामों को अब डेटाबेस से पूरी तरह हटा दिया गया है।बचत: इन फर्जी नामों के हटने से सरकारी खजाने को सालाना करोड़ों रुपये की बचत होगी, जिसका उपयोग गरीब और जरूरतमंदों के लिए किया जाएगा।घुसपैठ और जनसांख्यिकी: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कुछ विशेष क्षेत्रों में जनसंख्या के पैटर्न में संदिग्ध बदलाव देखे गए हैं, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी।अवैध कब्जे और बेदखली पर भी कड़ा रुखनाम हटाने के अलावा, मुख्यमंत्री ने ‘संदिग्ध नागरिकों’ द्वारा सरकारी और वन भूमि पर किए गए कब्जों पर भी बात की।बेदखली अभियान (Eviction Drive): असम सरकार पिछले कुछ महीनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चला रही है।लक्ष्य: मुख्यमंत्री का तर्क है कि राज्य की संस्कृति और भूमि को उन लोगों से बचाना जरूरी है जो अवैध रूप से यहाँ बसे हैं और जिनके नाम फर्जी तरीके से सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हो गए हैं।विरोध और राजनीतिविपक्षी दलों (AIUDF और कांग्रेस) ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश बताया है। हालांकि, हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से ‘डिजिटल वेरिफिकेशन’ और आधार-लिंकिंग पर आधारित है, जिसमें धर्म का कोई लेना-देना नहीं है।

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