विदेश

भारत के खिलाफ बांग्लादेश की नई चाल? चिकन नेक पर चीन को बढ़ावा देने के बाद अब तीस्ता नदी पर छिड़ा बड़ा विवाद

दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स में इस समय एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। भारत के सबसे करीबी पड़ोसी देशों में शुमार बांग्लादेश के हालिया कदमों से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। जानकारों के मुताबिक, बांग्लादेश एक बार फिर भारत के रणनीतिक हितों को नजरअंदाज करने की राह पर चल पड़ा है। पहले भारत के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब चीन को बड़ी भूमिका देने की कोशिशें हुईं और अब तीस्ता नदी के पानी को लेकर ढाका की ओर से तीखे तेवर दिखाए जा रहे हैं, जिसने भारतीय सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास चीन की एंट्री से बढ़ी भारत की चिंता

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को पूरे देश से जोड़ने वाली संकरी पट्टी जिसे 'चिकन नेक' या सिलीगुड़ी कॉरिडोर कहा जाता है, सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। हाल ही में बांग्लादेश द्वारा इस इलाके के बेहद करीब चीनी निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस इलाके में ड्रैगन (चीन) की किसी भी तरह की मौजूदगी सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है। भारत हमेशा से ही इस क्षेत्र में बाहरी ताकतों के दखल का विरोध करता रहा है।

तीस्ता नदी के पानी पर बांग्लादेशी नेताओं के बिगड़े बोल

चिकन नेक विवाद के बीच अब तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा भी गरमा गया है। बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से तीस्ता नदी को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। दशकों पुराने इस जल विवाद पर जहां दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का दावा करते रहे हैं, वहीं अब बांग्लादेश की ओर से अचानक आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। वहां के कुछ गुटों द्वारा तीस्ता परियोजना पर भारत को दरकिनार कर चीन से वित्तीय मदद लेने की वकालत की जा रही है, जिसे सीधे तौर पर नई दिल्ली को आंख दिखाने के रूप में देखा जा रहा है।

स्थानीय स्तर और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भारत-बांग्लादेश सीमा पर पड़ेगा असर

इस कूटनीतिक तनातनी का सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्यों विशेषकर पश्चिम बंगाल और असम के स्थानीय क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। तीस्ता नदी का पानी पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों के किसानों और कृषि के लिए लाइफलाइन माना जाता है। यदि बांग्लादेश इस मुद्दे पर चीन के साथ मिलकर कोई एकतरफा कदम उठाता है, तो इससे सीमा पर न केवल तनाव बढ़ेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा पर भी गहरा संकट आ सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार और रणनीतिक एक्सपर्ट्स इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

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