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भारत-न्यूजीलैंड FTA कल से लागू: कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- ये सिर्फ बाजार तक पहुंच नहीं, गहरी आर्थिक साझेदारी की शुरुआत

वैश्विक व्यापार मंच पर भारत की आर्थिक कूटनीति ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 से आधिकारिक रूप से लागू होने जा रहा है। विजयादशमी के पावन पर्व के अवसर पर लागू हो रहा यह ऐतिहासिक समझौता दोनों देशों के वाणिज्यिक, तकनीकी और औद्योगिक रिश्तों को एक नए युग में ले जाने के लिए तैयार है। इस बड़े घटनाक्रम पर केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह द्विपक्षीय समझौता महज एक पारंपरिक ट्रेड पैक्ट या बाजार तक सामान्य पहुंच (Market Access) भर नहीं है, बल्कि यह दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच एक गहरी, दीर्घकालिक और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी (Deep Economic Partnership) की औपचारिक शुरुआत है।

यह पिछले पांच वर्षों में भारत द्वारा सफलतापूर्वक संचालित और लागू किया जाने वाला सातवां प्रमुख एफटीए है। इससे पहले भारत ने मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (EFTA) और ब्रिटेन जैसे प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ समझौते किए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस समझौते के आधिकारिक क्रियान्वयन समारोह की अगुवाई कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का मुख्य लक्ष्य मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक दोगुना कर 7 अरब डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़ से अधिक) के पार पहुंचाना है। भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों, छोटे निर्यातकों, कुशल पेशेवरों और युवाओं के लिए यह समझौता संभावनाओं के असीमित द्वार खोलने वाला साबित होगा।

100% भारतीय उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एक्सेस: टेक्सटाइल, चमड़ा और रत्न-आभूषण को सीधा बूस्ट

इस समझौते की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि न्यूजीलैंड ने भारत से निर्यात होने वाले 100 प्रतिशत टैरिफ लाइनों (वस्तुओं) पर आयात शुल्क पूरी तरह शून्य (0% Customs Duty) करने की प्रतिबद्धता जताई है। यानी भारत में बनने वाला लगभग हर उत्पाद अब बिना किसी अतिरिक्त सीमा शुल्क के न्यूजीलैंड के बाजारों में बिक सकेगा। इसका सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारत के उन सेक्टर्स को मिलेगा जो बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं।

भारत के कपड़ा व परिधान (Textiles & Apparels), चमड़ा और फुटवियर (Leather & Footwear), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery), इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो पार्ट्स और जैविक कृषि उत्पादों को कीवी बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी। अब तक वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों को वहां मिलने वाली ड्यूटी छूट के कारण भारतीय निर्यातक जिस नुकसान में रहते थे, वह बाधा अब हमेशा के लिए खत्म हो गई है। भारतीय सामान अब ऑकलैंड, वेलिंगटन और क्राइस्टचर्च जैसे बड़े शहरों के रिटेल स्टोर्स में पहले से काफी किफायती और प्रतिस्पर्धी दामों पर उपलब्ध होंगे।

भारतीय पेशेवरों के लिए आसान वीजा और मोबिलिटी: आईटी, योग और शेफ के लिए नए अवसर

केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित न रहकर इस समझौते में सेवाओं (Services Trade) और मानव संसाधन की आवाजाही को विशेष प्राथमिकता दी गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं केवल सामान बेचने से नहीं बल्कि कुशल प्रतिभाओं और नवाचार के आदान-प्रदान से आगे बढ़ती हैं। इस एफटीए के जरिए भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, डेटा प्रोफेशनल्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, आर्किटेक्ट्स और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए न्यूजीलैंड में काम करने के कानूनी रास्ते बेहद सुगम कर दिए गए हैं।

विशेष रूप से भारतीय पारंपरिक ज्ञान और कौशल को मान्यता देते हुए न्यूजीलैंड ने भारतीय योग प्रशिक्षकों (Yoga Instructors), पारंपरिक भारतीय रसोइयों (Chefs) और आयुष प्रैक्टिशनर्स के लिए विशेष वीजा कोटे और सुगम वर्क परमिट नियमों पर सहमति दी है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने शैक्षणिक डिग्रियों और पेशेवर योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition Agreements) पर काम तेज करने का निर्णय लिया है, जिससे न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा पाना और करियर बनाना पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश: न्यू सप्लाई चेन का होगा निर्माण

एफटीए की रूपरेखा में दोनों देशों ने सप्लाई चेन इंटीग्रेशन (आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण) को मजबूत करने पर बड़ा दांव लगाया है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड के प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंड्स और निजी उद्यमों ने आगामी 15 वर्षों के दौरान भारत के विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और क्लीन टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में लगभग 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जाहिर की है।

न्यूजीलैंड के पास आधुनिक डेयरी प्रोसेसिंग तकनीक, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और वानिकी (Forestry) में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता हासिल है। भारतीय उद्योग जगत इस तकनीक का लाभ उठाकर घरेलू स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) की बर्बादी को रोक सकेगा और वैश्विक मानकों के अनुरूप मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर सकेगा। दोनों देश मिलकर ऐसी आपूर्ति श्रृंखला तैयार कर रहे हैं जो किसी भी वैश्विक भू-राजनीतिक संकट या तनाव में बिना रुके सुचारू रूप से काम करती रहे।

भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग के हितों की शत-प्रतिशत सुरक्षा

जब भी न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते की बात चलती थी, तो भारतीय डेयरी किसानों और ग्रामीण पशुपालकों में यह आशंका घर कर जाती थी कि कहीं न्यूजीलैंड का सस्ता दूध, मक्खन और पनीर भारतीय बाजार को पाट न दे। भारत सरकार ने इस समझौते में देश के 8 करोड़ से अधिक डेयरी किसानों और छोटे कृषि उत्पादकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।

भारत ने अपने संवेदनशील घरेलू डेयरी सेक्टर (जैसे तरल दूध, मक्खन, घी, चीज) और पोल्ट्री सेक्टर को शुल्क रियायतों से पूरी तरह बाहर (Exclusion List में) रखा है। यानी न्यूजीलैंड से आने वाले डेयरी उत्पादों पर पहले की तरह ही सुरक्षात्मक शुल्क लागू रहेंगे, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका पर आंच नहीं आएगी। भारत ने केवल उन्हीं चुनिंदा कृषि उत्पादों में शुल्क राहत दी है जिनका उत्पादन भारत में नहीं होता या सीमित होता है, जैसे कि कीवी फल और सेब की कुछ विशिष्ट किस्में, जिन पर भी न्यूनतम आयात मूल्य और कोटा आधारित शर्तें तय की गई हैं।

वैश्विक कूटनीति और इंडो-पैसिफिक में भारत का बढ़ता प्रभाव

आर्थिक लाभ के अलावा, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू भी है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था, स्वतंत्र समुद्री व्यापार और लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने में यह समझौता एक रणनीतिक गोंद का काम करेगा। न्यूजीलैंड प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, और भारत के साथ उसका आर्थिक रूप से गहराई से जुड़ना यूरेशिया और प्रशांत महासागर के बीच नए व्यापारिक गलियारे तैयार करेगा।

वाणिज्य सचिव के शब्दों में कहें तो, 20 अक्टूबर से शुरू हो रहा यह नया अध्याय केवल दो देशों के बीच व्यापार के आंकड़े बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया और ओशिनिया के बीच तकनीकी साझेदारी, प्रतिभा के सम्मान और आर्थिक लचीलेपन की एक नई इबारत लिख रहा है। भारतीय निर्यातकों के लिए विजयादशमी का यह तोहफा आने वाले वर्षों में मेक इन इंडिया उत्पादों को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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