भारत में जल्द शुरू होगा स्वदेशी नागरिक विमानों का निर्माण, अगले दो वर्षों में तैयार होगा ‘मेड इन इंडिया’ पैसेंजर प्लेन

भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने यह घोषणा की है कि भारत अगले दो वर्षों के भीतर एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के माध्यम से अपना पहला स्वदेशी नागरिक विमान (Civilian Aircraft) तैयार कर लेगा। इस महत्वाकांक्षी पहल से वैश्विक स्तर पर विमान निर्माण के क्षेत्र में भारत अपनी एक नई और मजबूत पहचान स्थापित करने जा रहा है।
भारतीय फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विमानन मंत्री ने कहा कि देश में विमान मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च-स्तरीय और गुणवत्तापूर्ण मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहतरीन सामग्री, कुशल श्रम (Skilled Labor) और एक सक्षम नीतिगत ढांचे का होना बेहद जरूरी है।
विमान निर्माण में लंबी प्रक्रिया और संयुक्त उद्यमों की भूमिका
मंत्री ने यह स्वीकार किया कि विमान निर्माण एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें डिजाइन, प्रमाणन (Certification), सप्लाई चेन और उत्पादन लाइन स्थापित करने में आमतौर पर एक दशक या उससे अधिक का समय लग जाता है। हालांकि, भारत ने इस दिशा में पहले ही ठोस प्रयास शुरू कर दिए हैं। वर्तमान में बोइंग और एयरबस जैसी वैश्विक कंपनियां भारत से लगभग 4 अरब डॉलर के कलपुर्जे और सेवाएं ले रही हैं, और अनुमान है कि इस दशक के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 10 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
देश में विमान निर्माण की नींव मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ सुपरजेट एसजे-100 क्षेत्रीय यात्री विमान के भारत में लाइसेंस उत्पादन के लिए समझौता किया है। इसके अलावा, टाटा समूह की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस ने वडोदरा में सी-295 (C-295) परिवहन विमान की फाइनल असेंबली लाइन स्थापित की है, जिसके तहत रक्षा अनुबंध के कुल 56 विमानों में से 40 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
महिंद्रा समूह और अन्य कंपनियों के प्रयास
निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी महिंद्रा समूह ने ऑस्ट्रेलिया की गिप्सलैंड एयरोनॉटिक्स (GippsAero) में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है, जो छोटे यात्री विमानों के निर्माण के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, महिंद्रा ने विमान निर्माण के लिए 'नोवावायु एयरोस्पेस' नामक कंपनी भी बनाई है और सैन्य परिवहन विमान कार्यक्रमों के लिए एम्ब्रेयर (Embraer) के साथ साझेदारी की है। नागरिक विमानों के निर्माण को गति देने के लिए एम्ब्रेयर ने अदाणी समूह के साथ भी हाथ मिलाया है।
विमानन मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि यह तमाम घोषणाएं देश में विमान निर्माण के आधारभूत ढांचे को अभूतपूर्व मजबूती देंगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत का विमानन बाजार बेहद तेजी से फैला है। साल 2014 में देश में जहां केवल 74 हवाई अड्डे थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 166 हो चुकी है। सरकार की योजना आने वाले दस वर्षों में 100 और नए हवाई अड्डों को विमानन नेटवर्क से जोड़ने की है।
भारी मांग और वैश्विक बाजार की स्थिति
भारतीय विमानन बाजार में यात्रियों की आवाजाही रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय हवाई अड्डों ने लगभग 41.2 करोड़ यात्रियों को संभाला है। देश की घरेलू एयरलाइनों के पास वर्तमान में लगभग 850 विमानों का बेड़ा मौजूद है, जबकि विभिन्न कंपनियों द्वारा 1,600 से अधिक नए विमानों के बड़े आर्डर दिए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 100 अरब डॉलर है। वर्तमान में इंडिगो और एयर इंडिया दुनिया में सबसे ज्यादा विमानों का आर्डर देने वाली अग्रणी कंपनियों में शामिल हैं।
हालांकि, वैश्विक नागरिक विमान बाजार में अभी भी मुख्य रूप से अमेरिका की बोइंग और यूरोप की एयरबस जैसी दो दिग्गजों का ही दबदबा है। चीन की सरकारी कंपनी कॉमॅक (COMAC) की स्थापना 2008 में हुई थी और उसका पहला नागरिक विमान सी-919 अपनी पहली वाणिज्यिक उड़ान भरने में लगभग 15 वर्षों का समय ले सका था। ऐसे में भारत का यह स्वदेशी कदम ग्लोबल एविएशन मार्केट में एक नए और मजबूत अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है।