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भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता, तुर्की के लिए बंद हुए रियायती रास्ते FTA का लाभ नहीं ले पाएगा अंकारा

News India Live, Digital Desk : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 27 जनवरी को संपन्न हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को वैश्विक स्तर पर ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) कहा जा रहा है। जहाँ यह समझौता भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों में नए युग की शुरुआत है, वहीं तुर्की (तुर्किये) के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ है।एक वरिष्ठ आधिकारिक सूत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि तुर्की, यूरोपीय संघ के साथ अपने कस्टम्स यूनियन संबंधों का हवाला देकर इस FTA की शुल्क रियायतों (Tariff Concessions) का फायदा नहीं उठा पाएगा।क्यों तुर्की के लिए “नो एंट्री” का बोर्ड लगा है?तुर्की 1996 से EU-तुर्की कस्टम्स यूनियन का सदस्य है। नियमों के अनुसार:एकतरफा दबाव: जब EU किसी देश (जैसे भारत) के साथ टैरिफ कम करता है, तो तुर्की को भी भारतीय सामानों के लिए अपने टैरिफ कम करने पड़ते हैं। यानी भारतीय सामान तुर्की में सस्ता बिकेगा।भारत का कड़ा रुख: लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समझौता केवल EU के सदस्य देशों के लिए है। तुर्की मूल (Turkish Origin) का सामान भले ही यूरोपीय बंदरगाहों से भारत भेजा जाए, उस पर पूरा आयात शुल्क (Full Tariff) लगेगा। उसे FTA के तहत मिलने वाली छूट नहीं मिलेगी।कूटनीतिक तनाव: पाकिस्तान और ‘ड्रोन’ का एंगलभारत और तुर्की के व्यापारिक रिश्तों में आई इस कड़वाहट की जड़ें राजनीतिक हैं:पाकिस्तान का अंधसमर्थन: कश्मीर मुद्दे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तुर्की का पाकिस्तान के प्रति झुकाव भारत के लिए चिंता का विषय रहा है।सैन्य विरोध: पिछले साल मई में भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों पर की गई कार्रवाई (ऑपरेशन सिंदूर) की तुर्की ने कड़ी निंदा की थी।ड्रोन सप्लाई: तुर्की द्वारा पाकिस्तान को अत्याधुनिक ड्रोन की आपूर्ति करने से भारत के सुरक्षा हित प्रभावित हुए हैं, जिसका असर अब व्यापारिक फैसलों पर दिख रहा है।व्यापारिक आंकड़ों में भारी गिरावट (वित्त वर्ष 2024-25)कूटनीतिक तनाव का असर अब दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है:विवरणवित्त वर्ष 2023-24वित्त वर्ष 2024-25गिरावट (%)भारतीय निर्यात$6.65 अरब$5.71 अरब14.1%भारतीय आयात$3.78 अरब (लगभग)$3.00 अरब20.8%भारत के कुल निर्यात में तुर्की की हिस्सेदारी अब सिमटकर मात्र 1.3% रह गई है।क्या होता है दोनों देशों के बीच व्यापार?कमी के बावजूद, कुछ प्रमुख वस्तुओं का आदान-प्रदान जारी है:भारत से तुर्की: ईंधन, तेल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, फार्मा उत्पाद और लोहा-इस्पात।तुर्की से भारत: मार्बल (संगमरमर), ताजे सेब, सब्जियां, सोना, सीमेंट और खनिज तेल।

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