व्यापार

मल्टीबैगर डिफेंस PSU HAL का बड़ा धमाका: HATSOFF में खरीदी 100% हिस्सेदारी, ब्रोकरेज ने दिया 47% अपसाइड का बंपर टारगेट

भारतीय शेयर बाजार में डिफेंस सेक्टर के सबसे बड़े वेल्थ क्रिएटर माने जाने वाले सरकारी पीएसयू हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited – HAL) ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने अपने ज्वाइंट वेंचर 'हैट्सऑफ' (Helicopter Academy to Train by Simulation of Flying – HATSOFF) में कनाडा की पार्टनर कंपनी सीएई (CAE) की बाकी 50 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने के लिए औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस सौदे के पूरा होते ही हैट्सऑफ अब पूरी तरह से एचएएल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (Wholly-Owned Subsidiary) बन जाएगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह सौदा न केवल कंपनी के ऑपरेशनल मार्जिन को मजबूत करेगा, बल्कि देश के एयरोस्पेस और डिफेंस सिमुलेशन इकोसिस्टम पर सरकारी कंपनी का पूर्ण नियंत्रण भी स्थापित करेगा। इस बड़े कॉरपोरेट डेवलपमेंट के बीच दिग्गज ब्रोकरेज हाउसों ने शेयर पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए करीब 47 फीसदी तक के भारी उछाल का नया टारगेट प्राइस जारी किया है।

शून्य लागत (Nil Consideration) पर सौदा: रक्षा मंत्रालय और DIPAM की हरी झंडी

इस सौदे की सबसे दिलचस्प और वित्तीय रूप से आकर्षक बात इसका वैल्युएशन स्ट्रक्चर है। आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, एचएएल ने सीएई की 3,84,04,205 इक्विटी शेयरों वाली 50% हिस्सेदारी को शून्य प्रतिफल यानी 'निल कंसीडरेशन' (Nil Consideration) पर हासिल किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि एचएएल को इस कंपनी का 100 फीसदी मालिकाना हक पाने के लिए कोई नकद राशि खर्च नहीं करनी पड़ी है। इस सौदे को पूरा करने के लिए रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (MoD-DDP) और वित्त मंत्रालय के निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) से सभी आवश्यक प्रशासनिक और विनियामक अनुमतियां पहले ही मिल चुकी हैं। शेयर ट्रांसफर एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर यह पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद हैट्सऑफ के बोर्ड और मैनेजमेंट पर पूरी तरह एचएएल का नियंत्रण होगा।

क्या करती है HATSOFF और HAL के लिए क्यों है यह रणनीतिक गेमचेंजर?

बेंगलुरु स्थित हैट्सऑफ हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग कॉम्प्लेक्स देश का पहला और दुनिया के गिने-चुने अत्याधुनिक 'रोल-ऑन/रोल-ऑफ' (RO/RO) फुल-मिशन सिम्युलेटर केंद्रों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत साल 2007-2010 के दौरान एचएएल और सीएई के संयुक्त प्रयास से भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना, तटरक्षक बल और नागरिक हेलीकॉप्टर पायलटों को उच्च स्तरीय सिम्युलेटर ट्रेनिंग देने के लिए की गई थी। यह फैसिलिटी स्वदेशी एएलएच ध्रुव (ALH Dhruv), बेल 412 और यूरोकॉप्टर डॉफिन जैसे प्रमुख हेलीकॉप्टरों के लिए लेवेल-डी क्वालिफाइड वर्चुअल फ्लाइंग ट्रेनिंग उपलब्ध कराती है। पायलटों को वास्तविक हेलीकॉप्टर उड़ाने के बजाय एडवांस सिम्युलेटर पर ट्रेनिंग देने से करोड़ों रुपये के एविएशन टरबाइन फ्यूल की बचत होती है और जोखिम भी न के बराबर रहता है। अब इस कंपनी का पूरा स्वामित्व अपने हाथ में आने से एचएएल अपने हेलीकॉप्टर निर्माण, मेंटेनेंस और लाइफ-साइकिल सपोर्ट के साथ-साथ पायलट ट्रेनिंग रेवेन्यू को भी सीधे अपनी बैलेंस शीट में शामिल कर सकेगी। वित्त वर्ष 2026 में हैट्सऑफ ने ₹80.95 करोड़ का टर्नओवर और ₹26.73 करोड़ का टैक्स-पूर्व मुनाफा (PBT) दर्ज किया था, जिससे यह अधिग्रहण सीधे तौर पर एचएएल के ईपीएस (EPS) के लिए वैल्यू-एक्रीएटिव साबित होगा।

ब्रोकरेज हाउस क्यों हैं बुलिश? जानिए 47% अपसाइड टारगेट का पूरा गणित

हैट्सऑफ के पूर्ण अधिग्रहण और कंपनी की लगातार मजबूत होती ऑर्डर बुक को देखते हुए घरेलू और वैश्विक ब्रोकरेज फर्में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के शेयरों पर जबरदस्त बुलिश हैं। ब्रोकरेज विश्लेषकों का आकलन है कि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से मंजूर किए गए बड़े रक्षा प्रस्तावों, तेजस एमके-1ए (Tejas Mk1A) के इंजन डिलीवरी शेड्यूल में तेजी और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) के बड़े ऑर्डर्स से कंपनी की आय में अगले 3 से 5 वर्षों तक 20 से 25 फीसदी की सीएजीआर (CAGR) वृद्धि देखने को मिल सकती है। कई नामी ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग बरकरार रखते हुए इसके मौजूदा बाजार भाव से लगभग 45 से 47 फीसदी ऊपर के टारगेट प्राइस तय किए हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, एचएएल के पास वर्तमान में लगभग ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक की रिकॉर्ड ऑर्डर बुक है, जो अगले 4 से 5 वर्षों के लिए कंपनी की वित्तीय विजिबिलिटी को पूरी तरह सुरक्षित करती है। साथ ही, कर्ज-मुक्त बैलेंस शीट, 25% से अधिक का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) और सरकार का 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रक्षा क्षेत्र का सबसे मजबूत दांव बनाता है।

'मेक इन इंडिया' और ग्लोबल एक्सपोर्ट मार्केट में एचएएल की लंबी छलांग

भारत सरकार का रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर लगातार बढ़ता जोर एचएएल जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पहले जहां भारत रक्षा सिमुलेटर और एवियोनिक्स तकनीक के लिए विदेशी वेंडर्स पर निर्भर रहता था, वहीं अब एचएएल जैसी कंपनियां घरेलू स्तर पर संपूर्ण रक्षा समाधान तैयार कर रही हैं। हैट्सऑफ का पूर्ण नियंत्रण मिलने के बाद एचएएल न केवल भारतीय सेनाओं की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करेगी, बल्कि मित्र देशों को स्वदेशी हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ सिम्युलेटर आधारित पायलट ट्रेनिंग पैकेज भी निर्यात कर सकेगी। फिलीपींस, अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मध्य पूर्व के कई देश पहले ही भारतीय हेलीकॉप्टरों और हल्के लड़ाकू विमानों में गहरी रुचि दिखा चुके हैं। ऐसे में रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी यह अधिग्रहण कंपनी के लिए वैश्विक बाजार के नए द्वार खोलने का काम करेगा।

 

Back to top button