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महिला आरक्षण पर चंद्रबाबू नायडू ने चली बड़ी चाल, उत्तर-दक्षिण की जंग तेज

News India Live, Digital Desk: देश की राजनीति में इस समय ‘महिला आरक्षण’ और ‘परिसीमन’ को लेकर हलचल तेज हो गई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनडीए के महत्वपूर्ण सहयोगी एन. चंद्रबाबू नायडू ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने भविष्य की सियासी बिसात बिछा दी है। नायडू ने न केवल इस बिल का समर्थन किया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले सीटों का गणित पूरी तरह बदलने वाला है।परिसीमन के बाद ही लागू होगा महिला आरक्षणचंद्रबाबू नायडू ने स्पष्ट किया है कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का लाभ तभी मिल पाएगा, जब देश में जनगणना और उसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation) पूरा हो जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि 2029 का आम चुनाव नए परिसीमन के आधार पर लड़ा जा सकता है, जिससे लोकसभा की सीटों में भारी बढ़ोतरी की संभावना है। नायडू का मानना है कि इससे न केवल महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय असंतुलन को भी दूर करने का मौका मिलेगा।दक्षिण बनाम उत्तर भारत: आबादी का नया सिरदर्दमहिला आरक्षण की इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा ‘परिसीमन’ को माना जा रहा है। दक्षिण भारतीय राज्य, विशेषकर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि आबादी के आधार पर सीटें बढ़ाई गईं, तो उत्तर भारत का दबदबा और बढ़ जाएगा। नायडू ने इस मुद्दे पर सधे हुए अंदाज में कहा कि हमें विकास और जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों के हितों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सीटों का बंटवारा इस तरह हो कि किसी भी राज्य को नुकसान न पहुंचे।अमर उजाला की विशेष टिप्पणी: क्या बढ़ेगी लोकसभा की सीटें?राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 2026 के बाद परिसीमन होता है, तो लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़कर 800 के पार जा सकती है। चंद्रबाबू नायडू का समर्थन केंद्र सरकार के लिए राहत की बात है, क्योंकि वह एनडीए के ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं। नायडू ने साफ कर दिया है कि वह महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में हैं, लेकिन दक्षिण भारत के राजनीतिक हितों पर कोई समझौता नहीं करेंगे।

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