मानसून में अपनी त्वचा का ऐसे रखें खास ख्याल: आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए नेचुरल ग्लोइंग स्किन पाने के अचूक और आसान टिप्स

बरसात का सुहाना मौसम अपने साथ चिलचिलाती धूप से तो राहत लेकर आता है, लेकिन हमारी स्किन के लिए यह अपने साथ कई तरह की परेशानियां भी छोड़ जाता है। मानसून के इस मौसम में हवा में लगातार नमी (ह्यूमिडिटी) बनी रहती है, जिसके कारण स्किन कभी बहुत ज्यादा ऑयली हो जाती है तो कभी अचानक बेजान नजर आने लगती है। इस मौसम में चेहरे पर पिंपल्स, मुंहासे, रैशेज और फंगल इंफेक्शन होना एक आम बात बन जाती है। ऐसे में केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने के बजाय अगर प्राकृतिक और प्राचीन तरीकों का सहारा लिया जाए, तो त्वचा की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है। हाल ही में जाने-माने आयुर्वेदिक डॉक्टरों ने मानसून में त्वचा की देखभाल करने के कुछ बेहद असरदार और आसान घरेलू नुस्खे साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी बरसात के दिनों में शीशे जैसी चमकती हुई और ग्लोइंग स्किन पा सकती हैं।
मानसून में स्किन ऑयली और बेजान क्यों हो जाती है?
आयुर्वेद के जानकारों के मुताबिक, बारिश के मौसम में हमारे शरीर के भीतर वात और कफ दोष असंतुलित होने लगते हैं, जिसका सीधा असर हमारी त्वचा की बनावट पर पड़ता है। ह्यूमिडिटी बढ़ने की वजह से पसीना और धूल-मिट्टी रोम छिद्रों (Pores) में फंस जाते हैं, जिससे स्किन सांस नहीं ले पाती और कील-मुंहासे फूटने लगते हैं। इसके अलावा, लगातार बदलते मौसम के मिजाज के कारण त्वचा का नेचुरल मॉइस्ट्चर संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे चेहरा या तो अत्यधिक तैलीय हो जाता है या फिर रूखा और फीका पड़ने लगता है। यही वजह है कि मानसून के दिनों में स्किन केयर रूटीन में थोड़ा बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि त्वचा के अंदरूनी संतुलन को फिर से ठीक किया जा सके।
आयुर्वेदिक डॉक्टर के बताए नेचुरल टिप्स: घर पर ऐसे करें स्किन की केयर
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का सुझाव है कि मानसून के मौसम में अपनी त्वचा को गहराई से साफ करने के लिए कैमिकल फेस वॉश की जगह नेचुरल क्लींजर का इस्तेमाल करना चाहिए। बेसन, हल्दी और कच्चे दूध का लेप या फिर मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का फेसपैक लगाने से चेहरे का एक्स्ट्रा ऑयल तो साफ होता ही है, साथ ही रोम छिद्र भी प्राकृतिक रूप से खुल जाते हैं। नीम और तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से चेहरा धोने या भाप लेने से बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा पूरी तरह टल जाता है। इसके अलावा, स्किन को अंदर से हाइड्रेटेड रखने के लिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी और हर्बल चाय का सेवन करना चाहिए, जिससे शरीर से टॉक्सिंस बाहर निकल जाते हैं और चेहरे पर नेचुरल चमक बरकरार रहती है।
खानपान और जीवनशैली में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
त्वचा की बाहरी खूबसूरती का सीधा संबंध हमारी डाइट और जीवनशैली से जुड़ा हुआ होता है। मानसून के दौरान हमेशा ताजा, हल्का और आसानी से पचने वाला गर्म भोजन ही करना चाहिए ताकि पाचन तंत्र मजबूत रहे, क्योंकि कमजोर पाचन का असर सीधे चेहरे के ग्लो पर पड़ता है। बाजार मिलने वाले तली-भुने और जंक फूड से पूरी तरह दूरी बना लें क्योंकि यह त्वचा में ऑयल प्रोडक्शन को बढ़ाकर पिंपल्स की समस्या को और गंभीर कर देते हैं। अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को शामिल करें। यदि आप आयुर्वेदिक तरीकों और इन छोटी-छोटी आदतों को अपने डेली रूटीन में अपनाते हैं, तो मानसून के मौसम में भी आपकी त्वचा हमेशा स्वस्थ, तरोताजा और चमकदार बनी रहेगी।