मिस इंटरनेशनल इंडिया का ताज छोड़ सेना में हुईं शामिल, हार्वर्ड का ऑफर ठुकराकर लेफ्टिनेंट बनीं कशिश मेथवानी की प्रेरणादायक कहानी

दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जिस भी क्षेत्र में कदम रखते हैं, सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसी ही एक असाधारण शख्सियत हैं लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी। मुंबई में जन्मी और पुणे में पली-बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग और ग्लैमर की चकाचौंध भरी दुनिया बाहें फैलाए तैयार थी, लेकिन उनके दिल में देश सेवा का जज्बा कहीं ज्यादा मजबूत था।
साल 2023 में कशिश ने 'मिस इंटरनेशनल इंडिया' का खिताब अपने नाम कर हुस्न का परचम लहराया था। मॉडलिंग उनका पैशन जरूर था, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर नहीं था। कशिश के मुताबिक, नेशनल कैडेट कोर (NCC) में शामिल होना उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा, जिसने उनके सपनों की दिशा ही बदल दी।
हार्वर्ड का ऑफर ठुकराया और CDS परीक्षा में पाई ऑल इंडिया रैंक 2
कशिश मेथवानी न सिर्फ दिखने में खूबसूरत हैं बल्कि पढ़ाई-लिखाई में भी उनका कोई सानी नहीं है। 9 जनवरी 2001 को उल्हासनगर के एक सिंधी परिवार में जन्मी कशिश ने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री की है। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएससी (IISc) बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस में अपनी थीसिस पूरी की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें दुनिया की टॉप हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने देश सेवा के लिए ठुकरा दिया।
ग्लैमर और बड़े एकेडमिक ऑफर्स को पीछे छोड़कर उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा में बैठने का फैसला किया। अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने इस कठिन परीक्षा में पूरे देश में दूसरी रैंक (AIR 2) हासिल कर सबको चौंका दिया।
रिपब्लिक डे परेड में पीएम मोदी से मिली ट्रॉफी ने बदला जीवन
एक इंटरव्यू में कशिश ने बताया कि रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 'बेस्ट कैडेट' की ट्रॉफी हासिल करना उनके जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण था। इसी पल ने उन्हें एक नया मकसद दिया और यह साफ कर दिया कि उनकी असली जगह भारतीय सेना ही है।
इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में 11 महीने की बेहद कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी की। बीते 6 सितंबर को शानदार पासिंग आउट परेड के बाद वे इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन हुईं। उन्हें सेना की बेहद महत्वपूर्ण 'आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट' में पोस्टिंग मिली है, जो देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।
बहुमुखी प्रतिभा की धनी और समाज सेवा में भी आगे
लेफ्टिनेंट कशिश के रगों में देश सेवा और अनुशासन बचपन से ही है। उनके पिता डॉ. गुरमुख दास एक साइंटिस्ट रह चुके हैं और मां आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं। कशिश सिर्फ पढ़ाई या मॉडलिंग में ही नहीं, बल्कि भरतनाट्यम, डिबेट, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग में भी माहिर हैं।
इसके साथ ही उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 'डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज' नाम का एक एनजीओ (NGO) भी शुरू किया, जो लोगों को ब्लड, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेशन के लिए जागरूक करता है। कशिश मेथवानी की यह कहानी देश के लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है कि देश सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं।