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मौत के जाल को चकमा देकर भागा नॉर्थ कोरियाई सैनिक: लाखों लैंड माइंस और कंटीले तारों को पार कर पहुंचा साउथ कोरिया, जानें दुनिया की सबसे खतरनाक बॉर्डर की इनसाइड स्टोरी!

कहते हैं कि जब इंसान के लिए अपने ही देश में हालात बद से बदतर हो जाते हैं, तो वह अपनी जिंदगी बदलने के लिए मौत से भी टकराने को तैयार हो जाता है. कुछ ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला अंतरराष्ट्रीय मामला उत्तर कोरिया (North Korea) से सामने आया है, जहां तानाशाह किम जोंग उन की सेना के एक सैनिक ने ऐसी सीमा पार करने का दुस्साहसिक फैसला लिया, जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक और अभेद्य सीमाओं में गिना जाता है.

नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच बनी डिमिलिटराइज्ड जोन यानी डीएमजेड (DMZ) में कदम-कदम पर मौत का साया मौजूद है. जमीन के नीचे लाखों की संख्या में बिछीं लैंड माइंस (बारूदी सुरंगें), चारों तरफ दौड़ता हाई-वोल्टेज करंट, कंटीले तार और अत्याधुनिक हथियारों से लैस सैनिकों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. इसके बावजूद एक उत्तर कोरियाई सैनिक इस पूरे 'डेथ ट्रैप' को पार करके सफलतापूर्वक दक्षिण कोरिया पहुंच गया. इस सनसनीखेज घटना ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा और खुफिया कैमरों की नजर के बीच कोई इंसान कैसे इस खतरनाक रास्ते को जिंदा पार कर सकता है.

आधी रात को हुआ बड़ा सैन्य पलायन: साउथ कोरियाई सेना ने लिया कब्जे में

अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस 'डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, यह हैरतअंगेज घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है. दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि एक उत्तर कोरियाई सैनिक किसी तरह डीएमजेड (DMZ) की अग्रिम सीमा को पार करके दक्षिण कोरियाई क्षेत्र में दाखिल हो गया.

जैसे ही वह सीमा के पास थर्मल ऑब्जर्वेशन डिवाइस (TOD) में नजर आया, साउथ कोरियाई सैनिकों ने तुरंत एक्शन लेते हुए उसे सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां और मिलिट्री इंटेलिजेंस उससे किसी गुप्त स्थान पर बेहद कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उसने अपनी जान का इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाया और वह उत्तर कोरिया की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था (Border Security Grid) को चकमा देने में कैसे कामयाब रहा.

क्या है DMZ? जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां लाखों लैंड माइंस के बीच से निकला रास्ता

उत्तर और दक्षिण कोरिया को विभाजित करने वाला डिमिलिटराइज्ड जोन (DMZ) करीब 250 किलोमीटर लंबा और लगभग 4 किलोमीटर चौड़ा एक बफर जोन है. इसे दुनिया की सबसे ज्यादा सैन्यीकृत और खतरनाक सीमा माना जाता है. शीत युद्ध के समय से ही इस इलाके में दोनों देशों की तरफ से भारी संख्या में सेना, टैंक और तोपें तैनात रहती हैं.

इस 4 किलोमीटर के दायरे में अनुमानित रूप से 10 लाख से अधिक लैंड माइंस बिछी हुई हैं. इसके अलावा कंक्रीट की ऊंची दीवारें, मोशन सेंसर, निगरानी कैमरे, ऑटोमैटिक गन टावर और सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं. ऐसे में इस इलाके को बिना गाइड के पार करना पूरी तरह नामुमकिन माना जाता है. यही वजह है कि जब भी कोई व्यक्ति इस रास्ते से भागने की कोशिश करता है, तो वह वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में आ जाता है.

साल 2017 का वो खौफनाक मंजर: जब गोलियों की बौछार के बीच भागा था सैनिक

यह पहली बार नहीं है जब किसी उत्तर कोरियाई नागरिक या सैनिक ने डीएमजेड को पार करने का खौफनाक दुस्साहस किया हो. इससे पहले साल 2017 में भी जेएसए (Joint Security Area) से एक उत्तर कोरियाई सैनिक ने जीप दौड़कर भागने की कोशिश की थी. उस समय उसके अपने ही साथी सैनिकों ने उस पर एके-47 से ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी थी.

उस सैनिक को 5 से ज्यादा गोलियां लगी थीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान होने के बावजूद वह घिसटते हुए दक्षिण कोरिया की सीमा में पहुंचने में कामयाब रहा था, जहां बाद में डॉक्टरों ने उसकी जान बचाई थी. वहीं, साल 2022 में एक और अनोखा मामला सामने आया था, जब एक जिम्नास्ट खिलाड़ी जो पहले नॉर्थ कोरिया से भागकर साउथ कोरिया आया था, वह वापस इसी खतरनाक डीएमजेड के रास्ते नॉर्थ कोरिया लौट गया था.

चीन का रास्ता बंद होने के बाद अब सीधे 'मौत के कुएं' में कूद रहे लोग

दक्षिण कोरिया के मानवाधिकार संगठनों और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में भुखमरी और तानाशाही से तंग आकर हजारों उत्तर कोरियाई लोग भागकर सियोल (साउथ कोरिया) पहुंचे हैं. लेकिन अब सीधे DMZ पार करके भागना पहले के मुकाबले 10 गुना ज्यादा मुश्किल हो गया है क्योंकि किम जोंग उन ने हाल ही में सीमा पर दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने और नए लैंड माइंस बिछाने के आदेश दिए थे.

आमतौर पर अधिकांश लोग पहले चीन या रूस की सीमा पार करते हैं और वहां से थाईलैंड होते हुए दक्षिण कोरिया पहुंचते हैं. लेकिन कोविड-19 के बाद से चीन ने भी अपनी सीमाओं पर सख्ती बढ़ा दी है, जिससे वह रास्ता बंद हो गया है. ऐसे में लोग अब अपनी किस्मत बदलने और आजादी की हवा में सांस लेने की उम्मीद में सीधे इस 'मौत के कुएं' यानी डीएमजेड को पार करने का अंतिम और जानलेवा कदम उठा रहे हैं.

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