रवि प्रदोष व्रत पर जरूर पढ़ें यह चमत्कारी पौराणिक कथा, भोलेनाथ की कृपा से दूर होते हैं सभी संकट

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष और पवित्र महत्व माना गया है। जुलाई महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026 को रविवार के दिन पड़ रहा है, जिसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। रविवार के दिन पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने और प्रदोष काल में शिव आराधना के दौरान व्रत कथा का पाठ करने से साधक पर महादेव की विशेष कृपा बरसती है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
रवि प्रदोष व्रत कथा का आरंभ और निर्धन ब्राह्मण की कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है कि एक गांव में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण परिवार निवास करता था। उस ब्राह्मण की पत्नी बहुत ही धार्मिक, परोपकारी और साध्वी स्वभाव की थी, जो पूरी निष्ठा के साथ नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखा करती थी। इस दंपत्ति का एक ही पुत्र था, जो उनके जीवन का एकमात्र सहारा था। एक दिन वह बालक अकेला ही गंगा स्नान करने के लिए निकल पड़ा। रास्ते में दुर्भाग्यवश कुछ डाकुओं ने उस बालक को घेर लिया और धमकाते हुए पूछने लगे कि उसके पिता का छिपा हुआ धन कहां है। इस पर बालक ने अत्यंत विनम्रता से जवाब दिया कि वे लोग बहुत गरीब हैं और उनके पास ऐसा कोई छिपा हुआ धन नहीं है।
संकट में फंसा बालक और भगवान शिव का दिव्य स्वप्न
बालक के पास मौजूद पोटली को देखकर जब डाकुओं ने संदेह जताया, तो उसने बताया कि उसमें उसकी मां ने खाने के लिए रोटियां रखी हैं। बालक की सच्चाई और दीन-दशा को देखकर डाकुओं ने उसे बिना कोई नुकसान पहुंचाए जाने दिया। इसके बाद बालक आगे बढ़ते हुए एक अन्य नगर में पहुंचा और एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे थकान के कारण सो गया। संयोगवश, उसी समय नगर के सिपाही कुछ डाकुओं की तलाश करते हुए वहां पहुंचे और सोते हुए बालक को चोर समझकर गिरफ्तार कर राजा के सामने पेश कर दिया। राजा ने बिना किसी छानबीन के उसे कारावास की सजा सुना दी। उसी रात बालक की माता ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत किया और भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं। माता की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रात्रि में राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और चेतावनी दी कि जिस बालक को बंदी बनाया गया है, वह पूरी तरह निर्दोष है। शिवजी ने राजा से कहा कि यदि सुबह होने तक उसे रिहा नहीं किया गया, तो उनका पूरा राज्य और वैभव नष्ट हो जाएगा।
राजा की ओर से मिला पुरस्कार और प्रदोष व्रत का महत्व
अगली सुबह नींद खुलते ही राजा भयभीत हो गया और उसने तुरंत उस बालक को दरबार में बुलवाया। बालक ने रोते-बिलखते हुए राजा को सारी सच्चाई बता दी। सत्य का ज्ञान होते ही राजा ने अपने सिपाहियों को भेजकर बालक के माता-पिता को आदर सहित राजदरबार में बुलवाया। राजा ने ब्राह्मण परिवार को सांत्वना दी और घोषणा की कि उनका पुत्र पूरी तरह निर्दोष है तथा भगवान शिव की कृपा से उन पर आया संकट टल चुका है। ब्राह्मण परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखकर राजा ने उन्हें रहने और भरण-पोषण के लिए पांच गांव दान में दे दिए। इसके बाद वह निर्धन परिवार सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो गया और आनंदमय जीवन जीने लगा। इस पौराणिक कथा से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि सच्ची श्रद्धा और प्रदोष व्रत के प्रताप से महादेव अपने भक्तों के सभी बड़े से बड़े संकट हर लेते हैं।