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रसोई की गैस से लेकर उड़ते विमान तक, जानिए क्या है भारत का नया बायोफ्यूल मास्टरप्लान

नई दिल्ली / रिपोर्टर: भारत में बायोफ्यूल और इथेनॉल क्रांति अब केवल गाड़ियों की टंकी तक सीमित नहीं रहने वाली है। पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य समय से पहले हासिल करने के बाद केंद्र सरकार अब एक बिल्कुल नए और अनोखे मॉडल पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में आप अपनी रसोई के चूल्हे के लिए एटीएम की तर्ज पर बने "इथेनॉल ATM" से कनस्तर में इथेनॉल ईंधन खरीद सकेंगे।

आयातित एलपीजी (LPG) पर देश की निर्भरता कम करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व गैस की कीमतों के झटकों से आम उपभोक्ता को बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

आखिर क्यों पड़ी पेट्रोल से बाहर सोचने की जरूरत?

नरेंद्र मोदी सरकार के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) ने बीते एक दशक में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। साल 2014-15 में जहां पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट महज 1.5% थी, वह आज बढ़कर 20% तक पहुंच चुकी है। इस योजना ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत कराई है और उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसानों और डिस्टिलरीज को अतिरिक्त कमाई का मजबूत जरिया दिया है।

लेकिन इस सफलता के साथ ही एक नई चुनौती भी सामने आई है — जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता (कैपेसिटी ओवरहैंग)।

केयरएज (CareEdge Ratings) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार:

  • भारत की वर्तमान इथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर सालाना को पार कर चुकी है।

  • चालू वित्त वर्ष में 4 अरब लीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ने से यह कुल 24 अरब लीटर हो जाएगी।

  • दूसरी तरफ, E20 प्रोग्राम के तहत सालाना 11 अरब लीटर इथेनॉल की ही जरूरत पड़ती है।

  • शराब निर्माताओं, फार्मास्यूटिकल कंपनियों और केमिकल इंडस्ट्री की मांग करीब 3 से 3.5 अरब लीटर है।

यानी सब मिलाकर भी देश के पास हर साल लगभग 7 अरब लीटर इथेनॉल सरप्लस (अतिरिक्त) बच जाता है।

ब्लेंडिंग से कंजम्पशन की ओर: एक्सपोर्ट और एविएशन फ्यूल पर नजर

इसी सरप्लस इथेनॉल को खपाने के लिए नीतिकार अब 'ब्लेंडिंग टारगेट' के बजाय 'कंजम्पशन टारगेट' पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  1. इंटरनेशनल एक्सपोर्ट: नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों में इथेनॉल निर्यात के रास्ते तलाशे जा रहे हैं, जहां बायोफ्यूल के लक्ष्य तो तय हैं लेकिन उनके पास घरेलू उत्पादन की पर्याप्त क्षमता नहीं है।

  2. सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF): हवाई जहाजों के लिए पर्यावरण-अनुकूल ईंधन तैयार करने में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में तेजी से रिसर्च चल रही है।

  3. फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां: शत-प्रतिशत बायोफ्यूल पर चलने वाले वाहनों को सड़कों पर लाने की तैयारी है।

  4. रसोई ईंधन और इथेनॉल ATM: एलपीजी आयात का बिल घटाने के लिए घरेलू चूल्हों में इथेनॉल के सीधे इस्तेमाल का एक रिटेल ढांचा तैयार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसी चीनी व अनाज बेल्ट में लगे नए प्लांट अब भारत को केवल ऊर्जा आत्मनिर्भर ही नहीं बना रहे, बल्कि देश को दुनिया का बड़ा बायोफ्यूल हब बनाने की राह पर ले जा रहे हैं।

 

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