राजधानी में छात्रों के पेइंग गेस्ट परिसरों पर प्रशासन का शिकंजा, अनिवार्य होगी ऑनलाइन मैपिंग

देश भर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आने वाले लाखों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और रहने की बुनियादी सुविधाओं को लेकर दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली नगर निगम (MCD) ने संयुक्त रूप से बड़ा कदम उठाया है। मुखर्जी नगर, ओल्ड राजेंद्र नगर, करोल बाग, सत्य निकेतन, कालू सराय और लक्ष्मी नगर जैसे प्रमुख कोचिंग हब्स और विश्वविद्यालय क्षेत्रों में संचालित हो रहे सभी निजी पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टलों की अब अनिवार्य 'ऑनलाइन मैपिंग' (Digital Mapping) कराई जाएगी। इस पहल के तहत एक एकीकृत वेब पोर्टल और डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है, जहां दिल्ली के प्रत्येक पंजीकृत पीजी का पूरा ब्योरा—जैसे कमरे का आकार, रहने वाले छात्रों की क्षमता, किराया, बिल्डिंग प्लान और सुरक्षा प्रमाण पत्र—सार्वजनिक रूप से दर्ज होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से चल रहे असुरक्षित पीजी, मनमाना किराया वसूलने वाले संचालकों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर लगाम लगाना है।
3 दिनों में 100 से ज्यादा पीजी परिसरों का औचक निरीक्षण, कई जगह मिलीं गंभीर खामियां
योजना को धरातल पर उतारने से पहले प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त टास्क फोर्स ने पिछले 72 घंटों (3 दिनों) के भीतर दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में 100 से अधिक पीजी और हॉस्टलों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया है। इस विशेष जांच दल में एमसीडी के भवन विभाग, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के अधिकारी शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाली और गंभीर खामियां उजागर हुई हैं:
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कई बहुमंजिला इमारतों में बिना उचित वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास (Fire Exit) के एक ही छोटे कमरे में 3 से 4 छात्रों को ठहराया गया था।
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बेसमेंट और छतों पर बिना अनुमति के अस्थायी निर्माण कर अवैध हॉस्टल और लाइब्रेरी का संचालन पाया गया।
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60% से अधिक निरीक्षण किए गए परिसरों के पास वैध फायर एनओसी (Fire Safety NOC) या दिल्ली अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था।
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मानकों का खुला उल्लंघन करने वाले 20 से अधिक अवैध पीजी को तत्काल सीलिंग नोटिस जारी किए गए हैं और अन्य संचालकों को सुधार के लिए 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है।
सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा प्रस्ताव: लोकल पुलिस और कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे लाइव फीड
छात्रों, विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर एक नया प्रस्ताव उपराज्यपाल और गृह विभाग के समक्ष रखा गया है। इस मसौदे के तहत:
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अनिवार्य सीसीटीवी कवरेज: प्रत्येक पीजी परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार, रिसेप्शन, कॉमन एरिया, सीढ़ियों और बाहरी सड़क पर हाई-डेफिनिशन (HD) नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा।
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कम से कम 30 दिनों का बैकअप: सभी संचालकों को कम से कम 30 दिनों की वीडियो रिकॉर्डिंग का सुरक्षित डेटा रखना अनिवार्य किया जाएगा।
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पुलिस मॉनिटरिंग से जुड़ाव: प्रस्ताव में यह भी सिफारिश की गई है कि पीजी परिसरों के बाहरी कैमरों का लाइव फीड स्थानीय पुलिस थानों के सर्विलांस नेटवर्क या सेफ सिटी कमांड सेंटर से जोड़ा जाए, ताकि रात के समय संदिग्ध गतिविधियों पर सीधी नजर रखी जा सके और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
बिना पुलिस वेरिफिकेशन के नहीं रह सकेंगे कर्मचारी, बनेगा 'छात्र सुरक्षा कोड'
प्रशासन ने पीजी में कार्यरत सभी सहायक कर्मचारियों—जैसे वार्डन, रसोइये (Cooks), सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्डों—का स्थानीय थाने से 100% पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। नए सुरक्षा नियमों के तहत पीजी संचालकों को हर महीने रहने वाले सभी छात्रों का अद्यतन रजिस्टर स्थानीय थाने में जमा कराना होगा। इसके अतिरिक्त, छात्रों के उत्पीड़न, अचानक सुरक्षा राशि (Security Deposit) जब्त करने और अनुचित किराया वृद्धि जैसी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक समर्पित 'हेल्पलाइन नंबर' और 'ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र' (Grievance Portal) भी इस मैपिंग प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जा रहा है।
कोचिंग हब्स में अवैध निर्माण पर आगे भी जारी रहेगा बुलडोजर और सीलिंग एक्शन
एमसीडी और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह केवल सांकेतिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि नियमित रूप से चलने वाला अभियान है। आने वाले हफ्तों में नॉर्थ और साउथ कैंपस के आसपास के अन्य आवासीय इलाकों में भी सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी मकान मालिक या संचालक आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर छात्रों की जान जोखिम में डालते पाए जाएंगे, उनके परिसरों को तत्काल प्रभाव से सील किया जाएगा और मालिकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी।