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राजेश खन्ना का आशीर्वाद कभी भूतिया माना जाता था यह बंगला, जानें काका ने कितने में खरीदा और किसने दिया यह नाम?

News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना उर्फ ‘काका’ का नाम आते ही उनकी फिल्मों के साथ-साथ उनके आलीशान बंगले ‘आशीर्वाद’ की तस्वीर भी जेहन में उभर आती है। मुंबई के कार्टर रोड पर स्थित यह सी-फेसिंग बंगला महज एक इमारत नहीं, बल्कि बॉलीवुड के सुनहरे दौर का गवाह रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बंगले के बाहर काका की एक झलक पाने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ती थी, उसे कभी ‘भूतिया’ माना जाता था? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक घर से जुड़े दिलचस्प किस्से।जब बंगले को कहा जाता था ‘भूतिया घर’राजेश खन्ना से पहले इस बंगले के मालिक बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राजेंद्र कुमार थे। उस समय इस बंगले का नाम ‘डिंपल’ था। जब राजेंद्र कुमार ने इसे खरीदा था, तब लोग इसे ‘भूतिया’ कहते थे और कोई इसे खरीदने की हिम्मत नहीं करता था। राजेंद्र कुमार ने इसे बहुत कम कीमत में खरीदा, लेकिन उनके कदम पड़ते ही उनकी किस्मत चमक गई और उन्होंने एक के बाद एक कई सिल्वर जुबली फिल्में दीं, जिसके बाद उन्हें ‘जुबली कुमार’ कहा जाने लगा।राजेश खन्ना ने कितने में खरीदा था यह बंगला?साठ के दशक के उत्तरार्ध में जब राजेंद्र कुमार ने अपना नया बंगला बनाया, तब राजेश खन्ना ने उनसे इस घर को खरीदने की इच्छा जताई। उस समय काका सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, राजेश खन्ना ने यह बंगला मात्र 3.5 लाख रुपये में खरीदा था। काका का मानना था कि जो घर राजेंद्र कुमार के लिए लकी साबित हुआ, वह उनके लिए भी मील का पत्थर बनेगा।’आशीर्वाद’ नाम के पीछे की दिलचस्प कहानीराजेश खन्ना के इस बंगले को ‘आशीर्वाद’ नाम किसने दिया, यह सवाल अक्सर फैंस के मन में रहता है। दरअसल, जब काका ने इसे खरीदा, तो राजेंद्र कुमार पहले से ही एक और बंगला बना चुके थे जिसका नाम उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर ‘डिंपल’ रखा था। चूंकि राजेश खन्ना ने अपनी बेटी का नाम भी डिंपल रखा था, इसलिए नाम को लेकर कुछ असमंजस था। बाद में, राजेश खन्ना के पिता ने सुझाव दिया कि इस घर का नाम ‘आशीर्वाद’ रखा जाना चाहिए। काका को यह नाम इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे तुरंत फाइनल कर दिया।सुपरस्टारडम का प्रतीक बना यह घरराजेश खन्ना ने इस घर में रहने के बाद लगातार 15 सोलो हिट फिल्में देकर इतिहास रच दिया। ‘आशीर्वाद’ के गेट पर प्रशंसकों की लंबी कतारें और काका की कार पर लिपस्टिक के निशान उस दौर की दीवानगी की गवाही देते थे। साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद, इस बंगले को लेकर काफी कानूनी विवाद भी हुए और अंततः साल 2014 में इसे एक बिजनेसमैन को लगभग 90 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, जिसने बाद में इसे ढहाकर नई इमारत का निर्माण किया।

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