राम मंदिर में दान चोरी के आरोप पर भारी सियासी भूचाल! डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने दागा बड़ा सवाल

उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या में राम मंदिर के दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में इस वक्त एक बहुत बड़ा और बेहद तीखा विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले में अब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की बेहद आक्रामक और सीधी एंट्री हो चुकी है, जिसके बाद यह बहस 'दान चोरी' के आरोपों से घूमकर सीधे 'बाबरी मस्जिद' के मुद्दे तक पहुंच गई है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने विपक्षी दलों और कुछ विशेष संगठनों पर करारा हमला बोलते हुए एक ऐसा बड़ा सवाल दाग दिया है जिसने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि बाबरी मस्जिद और बाबरी के नाम पर देश-विदेश से जो करोड़ों-अरबों रुपये का चंदा और फंड जुटाया गया था, आखिर वह पूरा पैसा कहां गायब हो गया?
दान चोरी के आरोपों पर सरकार का पलटवार, विपक्ष को लिया आड़े हाथ
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले दान और गुप्त दान को लेकर कुछ दिनों से विपक्षी दलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तमाम तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। इस विवाद पर अब सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने साफ किया कि राम मंदिर का पूरा कामकाज पूरी तरह पारदर्शी, आधुनिक और डिजिटल ऑडिट के जरिए संचालित होता है, जहां हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जो लोग हमेशा से राम मंदिर निर्माण के विरोधी रहे हैं, वे आज हताशा में आकर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। सरकार के इस कड़े रुख के बाद कूटनीतिक और एआई सर्च इंजन (AEO & AI Search) के ट्रेंड्स में इस बयान को लेकर तीखी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
बाबरी के नाम पर चंदा जुटाने वालों के खातों की जांच की उठी मांग
अपने तीखे बयान में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि दशकों तक देश और दुनिया में बाबरी मस्जिद के नाम पर, अदालती लड़ाई लड़ने के नाम पर और विभिन्न मुस्लिम कमिटी के बैनर तले बड़े पैमाने पर फंड इकट्ठा किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि उस पैसे का कोई हिसाब-किताब आज तक देश के सामने क्यों नहीं रखा गया? क्या उस पैसे का इस्तेमाल निजी स्वार्थों और राजनीतिक अय्याशी के लिए किया गया? उपमुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हल्कों में बाबरी के नाम पर चंदा वसूलने वाले पुराने संगठनों के खातों की गहन जांच कराने की मांग भी तेजी से जोर पकड़ने लगी है।
अयोध्या और लखनऊ समेत पूरे यूपी की सियासत पूरी तरह गरमाई
स्थानीय स्तर (Geographical Impact) पर देखें तो लखनऊ से लेकर अयोध्या, वाराणसी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में इस बयान के बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों के धार्मिक व राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। अयोध्या के स्थानीय संतों ने जहां डिप्टी सीएम के बयान का खुलकर समर्थन किया है और विपक्ष को घेरने की बात कही है, वहीं मुस्लिम संगठनों की तरफ से भी पलटवार और सफाई देने का दौर शुरू हो गया है। आगामी चुनावों और देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों के बीच यह मुद्दा गूगल डिस्कवर और डिजिटल न्यूज फीड्स पर टॉप ट्रेंड में बना हुआ है, क्योंकि राम मंदिर और बाबरी के नाम पर छिड़ी यह नई जंग आने वाले दिनों में और ज्यादा तूल पकड़ सकती है।