राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन दे सकते हैं इस्तीफा, क्या खत्म होने जा रहा है शेख हसीना युग का आखिरी अध्याय

पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर भारी उथल-पुथल के संकेत मिलने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं तेज हो गई हैं कि देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन अपने पांच साल के निर्धारित कार्यकाल से करीब दो साल पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि यह कदम उठाया जाता है तो यह बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना के शासनकाल से जुड़े आखिरी बचे हुए प्रतीकों के खात्मे के रूप में देखा जाएगा।
इस्तीफे की अटकलों के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें और खुफिया रिपोर्ट्स?
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन के इस संभावित इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण मई महीने में उनकी लंदन यात्रा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से कथित रूप से हुई फोन पर बातचीत को बताया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों तक इस गोपनीय बातचीत की भनक लगने के बाद उच्च स्तर से राष्ट्रपति को पद छोड़ने का कड़ा संदेश मिलने की चर्चा है। इसके अलावा, शेख हसीना के इस साल दिसंबर में देश वापस लौटने के ऐलान के बाद से राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील हो चुका है। सत्ताधारी गठबंधन और बीएनपी (BNP) नेताओं का मानना है कि राष्ट्रपति का पूर्व सरकार से संपर्क बनाए रखना मौजूदा व्यवस्था के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
कौन हैं मोहम्मद शाहाबुद्दीन और क्या कहता है बांग्लादेशी संविधान?
मोहम्मद शाहाबुद्दीन 1971 के मुक्ति संग्राम के सेनानी और एक पूर्व जिला जज रह चुके हैं। उन्हें अप्रैल 2023 में तत्कालीन अवामी लीग के बहुमत वाली संसद द्वारा पांच साल के कार्यकाल के लिए देश का राष्ट्रपति चुना गया था। पिछले साल अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद जब शेख हसीना की सरकार गिरी और देश छोड़कर भारत आईं, उसके बाद भी शाहाबुद्दीन अपने पद पर बने रहे थे और उन्हें अवामी लीग शासन का आखिरी संवैधानिक अवशेष माना जा रहा था। संविधान के प्रावधानों के मुताबिक, यदि राष्ट्रपति पद छोड़ते हैं, तो नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर अंतरिम रूप से राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेंगे।