विदेश

रास्ता साफ फिर भी जाने से इनकार! दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ने क्यों मोड़ा होर्मुज से मुंह, किस बात का है डर

वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में से एक ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से दूरी बना ली है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि भू-राजनीतिक तनाव के बाद इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित और खुला घोषित कर दिया गया है, इसके बावजूद इस दिग्गज वैश्विक कंपनी ने वहां से अपने जहाजों को ले जाने से साफ मना कर दिया है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और कच्चे तेल के कारोबार से जुड़े दिग्गजों के बीच एक बड़ी चिंता और बहस छेड़ दी है कि आखिर रास्ता खुलने के बाद भी वहां किस बात का खौफ बना हुआ है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है दुनिया के लिए बेहद खास

यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर यह समुद्री रास्ता पूरी दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है। ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से संवेदनशील तेल मार्ग है। पूरी दुनिया में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20 प्रतिशत से अधिक) इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, इराक और कतर जैसे खाड़ी देश इसी रास्ते से अपना अधिकांश कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) एशिया, यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भेजते हैं। ऐसे में इस रास्ते में होने वाली कोई भी हलचल वैश्विक ईंधन की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

रास्ता खुलने के बाद भी क्यों डरी हैं शिपिंग कंपनियां

ग्लोबल शिपिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रास्ता भले ही आधिकारिक तौर पर खुला दिख रहा हो, लेकिन पर्दे के पीछे का सुरक्षा परिदृश्य अभी भी बेहद गंभीर है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हुए ड्रोन हमलों, समुद्री डकैती की कोशिशों और क्षेत्रीय देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने शिपिंग कंपनियों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी का मानना है कि इस मार्ग पर अभी भी उनके जहाजों और क्रू मेंबर्स की जान को सीधा खतरा हो सकता है। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में कंपनियों को न केवल अरबों डॉलर के जहाज और कार्गो का नुकसान उठाना पड़ेगा, बल्कि उनके बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) की दरें भी आसमान छू लेंगी।

लॉन्ग रूट अपनाने की मजबूरी और बढ़ता खर्च

होर्मुज के रास्ते से किनारा करने के बाद इस वैश्विक कंपनी और कई अन्य ऑपरेटरों को अब अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) वाले लंबे और वैकल्पिक रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक रास्ते को चुनने का सीधा मतलब है कि जहाजों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे जहाजों का सफर 10 से 15 दिन लंबा हो गया है, जिसके कारण ईंधन की खपत और परिचालन लागत (Operational Cost) में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस बढ़ते खर्च का सीधा असर आने वाले समय में दुनिया भर में आयात-निर्यात होने वाले सामानों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है।

भारतीय बाजार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर क्या होगा असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर है और हमारा अधिकांश तेल आयात इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होता है। हालांकि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां और सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी द्वारा इस रास्ते का बहिष्कार करना भारत के लिए भी एक चेतावनी संकेत है। यदि अन्य बड़ी कंपनियों ने भी इस रास्ते से दूरी बनाई, तो भारत के लिए कच्चे तेल की माल ढुलाई (Freight Rates) महंगी हो सकती है, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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