उत्तर प्रदेश

रुहेलखंड की बदलेगी तस्वीर: बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को हरी झंडी, एक्सप्रेस-वे के जाल से जुड़ेगा बरेली

बरेली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के हालिया बजट ने रुहेलखंड, खासकर बरेली के विकास को नई रफ्तार दे दी है। प्रदेश में प्रस्तावित छह नए औद्योगिक और सड़क कॉरिडोर में से एक ‘बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर’ कॉरिडोर को मंजूरी मिलने से उत्तर से दक्षिण उत्तर प्रदेश तक का सफर न केवल आसान होगा, बल्कि यह बरेली को राज्य के सभी प्रमुख एक्सप्रेस-वे से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण जंक्शन बना देगा।एक्सप्रेस-वे का ‘महासंगम’: गंगा, यमुना और शामली-गोरखपुर से सीधा जुड़ावप्रस्तावित पांचवें कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसका अन्य एक्सप्रेस-वे के साथ इंटरलिंकिंग होना है। यह कॉरिडोर बरेली में ‘शामली-गोरखपुर ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे’ से जुड़ेगा। आगे बढ़ने पर बदायूं के बिनावर के पास इसका जुड़ाव ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ से होगा, जबकि मथुरा में यह ‘यमुना एक्सप्रेस-वे’ से जुड़ जाएगा। इस कनेक्टिविटी से बरेली से दिल्ली, लखनऊ, आगरा और बुंदेलखंड तक का सफर घंटों के बजाय मिनटों में सिमट जाएगा।बरेली के भीतर भी सड़कों का होगा कायाकल्पजिले में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए इस बार 2700 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसमें शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले सेटेलाइट से बैरियर नंबर टू तक के मार्ग को अब ‘सिक्सलेन’ के बजाय ‘एट-लेन’ (8-lane) बनाने की तैयारी है, जिसके लिए 206 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। इसके अलावा, बरेली-बीसलपुर रोड के चौड़ीकरण के लिए 500 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना पर भी काम होना है।नाथ कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावाबरेली की पहचान ‘नाथ नगरी’ के रूप में है। सरकार ‘नाथ कॉरिडोर’ के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। तपेश्वर नाथ मंदिर को जोड़ने वाले मार्ग के चौड़ीकरण और रेलवे यार्ड से होकर गुजरने वाले अंडरपास के निर्माण के लिए 54 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को रेलवे फाटक की जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी।रोजगार और विकास की नई राहइस कॉरिडोर के विकसित होने से न केवल बरेली बल्कि इसके मार्ग में आने वाले सभी जिलों में औद्योगिक क्लस्टर विकसित होंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। हालांकि, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि यह एक उच्च स्तरीय सरकारी योजना है, जिसका विस्तृत खाका जल्द ही स्थानीय स्तर पर साझा किया जाएगा। पिछले साल की तुलना में इस बार बजट आवंटन काफी अधिक होने की उम्मीद है, जिससे लंबित परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी।

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