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रूस से तेल आयात पर 100% टैरिफ के खतरे के बीच वाइट हाउस का बड़ा बयान: ट्रंप और मोदी आपस में सुलझा लेंगे मुद्दा

वाइट हाउस के एक वरिष्ठ सलाहकार ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी शुल्क की धमकी से उत्पन्न हुए किसी भी विवाद को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपस में बहुत आसानी से सुलझा लेंगे। वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की यह महत्वपूर्ण टिप्पणी अमेरिकी सीनेट द्वारा एक नए विधेयक को पारित किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आई है। इस कड़े विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल के शीर्ष पांच खरीददारों पर 100 फीसदी तक का भारी-भरकम शुल्क लगाने का विशेष अधिकार दिया गया है, जिसमें यह दलील दी गई है कि इस प्रकार का व्यापार प्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को आर्थिक मदद पहुंचा रहा है।

क्या बोले अमेरिकी व्यापार सलाहकार पीटर नवारो?

इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए पीटर नवारो ने कहा कि वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत होने से पहले भारत रूस के साथ बड़े पैमाने पर तेल व्यापार में शामिल नहीं था, लेकिन बाद की परिस्थितियों में यह आयात शुरू हुआ। नवारो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री के बीच बेहद मजबूत और अच्छे कामकाजी संबंध हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों शीर्ष नेता इस मुद्दे का समाधान आपस में बैठकर निकाल लेंगे और उनके बीच में आने या हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि पश्चिमी देशों के तमाम कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों द्वारा रूस से निरंतर खरीद जारी रखने के कारण भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात लगातार दूसरे महीने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में शोध संस्थान ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि भारतीय खरीदारों ने जुलाई के महीने में रूस से 5.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो जून की तुलना में मात्रा के आधार पर 2.1 प्रतिशत अधिक था और इस दौरान कुल ईंधन आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 फीसदी दर्ज की गई।

अमेरिकी सीनेट में पास हुआ कड़ा विधेयक

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के चीन और भारत जैसे प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक अहम विधेयक को भारी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नामक इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से पास किया। इस कानून के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले शीर्ष पांच देशों—चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया—से आने वाले सामानों पर 100 फीसदी शुल्क लगाने की शक्ति मिलती है।

इस द्विदलीय विधेयक को दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर प्रस्तावित किया था। ग्राहम के निधन के बाद उनकी सीट से चुनी गई उनकी बहन डारलाइन ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को परोक्ष रूप से सहारा देने वाले प्रमुख देशों को एक कड़ा विकल्प चुनने के लिए मजबूर करता है—या तो अमेरिका के साथ व्यापार करें या फिर सस्ती रूसी ऊर्जा का विकल्प चुनें।

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