रेलवे ने वेटिंग टिकटों की बुकिंग पर लगाई 30% की सख्त सीमा, नियम तोड़ा तो लगेगा भारी जुर्माना

भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और नीतिगत खबर सामने आई है। अक्सर त्योहारों, गर्मियों की छुट्टियों या शादियों के सीजन में ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना लोहे के चने चबाने जैसा हो जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग इस उम्मीद में वेटिंग टिकट बुक करा लेते हैं कि शायद चार्ट बनने तक उनकी सीट कंफर्म हो जाएगी। लेकिन कई बार यह वेटिंग लिस्ट 300 से 400 के भी पार चली जाती है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी अव्यवस्था को जड़ से खत्म करने के लिए रेलवे बोर्ड ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब ट्रेनों में लंबी-लंबी वेटिंग लिस्ट के झंझट को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है। नए तकनीकी सुधारों के तहत अब वेटिंग टिकटों की बुकिंग पर एक तय सीमा (कैपिंग) लगा दी गई है। इसके बाद रेलवे का बुकिंग सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद आगे की टिकट बुकिंग को ब्लॉक कर देगा। इस फैसले से जहां ट्रेनों के भीतर होने वाली असीमित भीड़ पर लगाम लगेगी, वहीं कंफर्म टिकट वाले मुसाफिरों का सफर भी पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा। आखिर क्यों लेना पड़ा रेलवे को यह सख्त फैसला? इस नई व्यवस्था के पीछे रेलवे का मुख्य उद्देश्य स्लीपर और एसी (AC) कोचों में सफर करने वाले यात्रियों की यात्रा को सुखद बनाना है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं, जिनमें देखा गया कि भारी भीड़ के कारण कंफर्म टिकट वाले यात्री भी अपनी सीटों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। लोग ट्रेनों के गैलरी, दरवाजों और यहां तक कि शौचालयों के पास बैठकर सफर करने को मजबूर थे। इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा कारण यह था कि रेलवे में वेटिंग टिकट बुक करने की कोई आखिरी सीमा तय नहीं थी। दलाल और आम लोग असीमित तौर पर वेटिंग टिकट बुक करा लेते थे और बाद में कंफर्म कराने का झांसा देकर या बिना कंफर्मेशन के ही स्लीपर और एसी कोचों में सवार हो जाते थे। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, चार्ट बनने तक वास्तव में केवल 20 से 25 फीसदी वेटिंग टिकट ही कंफर्म हो पाते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि बाकी के 75 से 80 फीसदी यात्री या तो अपनी यात्रा रद्द करते थे या फिर वेटिंग टिकट के सहारे ही जबरन रिजर्व्ड कोचों में घुसकर दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ाते थे। इसी को रोकने के लिए नया नियम आगामी जून 2026 के बाद से पूरी तरह प्रभावी होने जा रहा है। क्या है वेटिंग लिस्ट का नया गणित? (At a Glance) रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां स्लीपर कोच में सीधे 400 टिकटों तक की फिक्स कैपिंग होती थी, उसे अब पूरी तरह बदल दिया गया है। अब लंबी दूरी या किसी भी ट्रेन में असीमित वेटिंग लिस्ट नहीं मिलेगी, बल्कि इसे घटाकर उस कोच की कुल क्षमता का अधिकतम 30 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे आसान शब्दों में ऐसे समझ सकते हैं: कोच का प्रकार कुल सीटें (उदाहरण) अधिकतम वेटिंग टिकट सीमा पार होने पर स्थिति स्लीपर / एसी कोच 100 30 पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिक बुकिंग बंद कर देगा। जैसे ही वेटिंग टिकटों की संख्या 30 फीसदी पर पहुंचेगी, यात्रियों को स्क्रीन पर 'नो रूम' (No Room) का मैसेज दिखाई देगा और वे आगे टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। यह नियम स्लीपर के साथ-साथ थर्ड एसी, सेकेंड एसी और फर्स्ट एसी समेत सभी श्रेणियों पर समान रूप से लागू होगा। बीच का रास्ता: यात्रियों की सुविधा का भी रखा ध्यान रेलवे ने कुछ समय पहले सभी क्लास में केवल 25 प्रतिशत प्रतीक्षा टिकट का एक बेहद सख्त नियम लागू करने का प्रयास किया था, जिससे बुकिंग काउंटरों पर भारी अफरा-तफरी मच गई थी। तब यात्रियों की असुविधा को देखते हुए बोर्ड ने उस फैसले को वापस ले लिया था। लेकिन इस बार रेलवे ने बीच का रास्ता निकालते हुए 30 प्रतिशत की व्यावहारिक सीमा तय की है, जो तकनीकी रूप से भीड़ को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम है। टीटीई (TTE) को मिले सख्त निर्देश: नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी यात्री को वेटिंग टिकट होने पर स्लीपर या एसी कोच में पैर रखने यानी यात्रा करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। यदि कोई यात्री इस नियम को तोड़ते हुए या बिना कंफर्म टिकट के रिजर्व्ड कोच में सफर करता हुआ पाया गया, तो टीटीई उस पर भारी जुर्माना लगाएगा और उसे अगले ही स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतार दिया जाएगा। दलालों के सिंडिकेट पर करारी चोट और रिकॉर्ड स्पेशल ट्रेनें रेलवे का यह नया कदम टिकटों की कालाबाजारी करने वाले दलालों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा। अब तक दलाल बड़ी संख्या में पहले से ही वेटिंग टिकट बुक करके रख लेते थे और बाद में जरूरतमंद यात्रियों से कंफर्म कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। जब सॉफ्टवेयर खुद ही एक सीमा के बाद बुकिंग ब्लॉक कर देगा, तो टिकटों की ऐसी जमाखोरी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। इसके अलावा, रेलवे यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल नियमों में बदलाव ही नहीं कर रहा, बल्कि स्पेशल ट्रेनों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा रहा है। इस बार गर्मियों के सीजन में यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अब तक की सबसे ज्यादा रिकॉर्ड तोड़ 908 विशेष ट्रेनें चलाई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 47 फीसदी अधिक हैं। इससे यात्रियों को कंफर्म सीट मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।