लखनऊ यूनिवर्सिटी में हड़कंप ,सीएम योगी से झूठ बोलना 3 शिक्षकों को पड़ा भारी, अब गिरेगी गाज

News India Live, Digital Desk: लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) के कैंपस में इन दिनों पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा चर्चा एक ‘विवाद’ की हो रही है। हम सब जानते हैं कि जब घर की बात बाहर जाती है, तो मामला बिगड़ ही जाता है। यहाँ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। यूनिवर्सिटी के तीन शिक्षकों ने सोचा कि वे सीधे सूबे के मुखिया यानी सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) के पास जाकर यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत करेंगे, तो शायद उनकी वाहवाही होगी। लेकिन, उनका यह दांव उन पर ही उल्टा पड़ गया है।आखिर हुआ क्या था?पूरा मामला यह है कि एलयू के तीन शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी के कामकाज और कुछ नियुक्तियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। सीएम ऑफिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए। लेकिन जब परतें खुलीं, तो कहानी कुछ और ही निकली।यूनिवर्सिटी प्रशासन और कार्यपरिषद (Executive Council) की जांच में पाया गया कि शिक्षकों द्वारा की गई शिकायतें पूरी तरह से झूठी, निराधार और भ्रामक (False & Baseless) थीं। मतलब, सीएम साहब को गलत जानकारी दी गई थी।यूनिवर्सिटी का कड़ा एक्शनअब यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं है। कार्यपरिषद की बैठक में इस मुद्दे पर गरमा-गरम बहस हुई और फैसला लिया गया कि इन तीनों शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी।माना जा रहा है कि प्रशासन का तर्क यह है कि सीधे सीएम को गलत जानकारी देना न केवल नियमों का उल्लंघन है (Bypassing the channel), बल्कि यह यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने की कोशिश भी है।क्या हो सकती है सजा?खबरों की मानें तो इन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है या विभागीय जांच बैठाई जा सकती है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो मामला सस्पेंशन (निलंबन) तक भी जा सकता है। कैंपस में दबी जुबान में चर्चा है कि यह कार्रवाई दूसरों के लिए एक ‘सबक’ के तौर पर की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई भी तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर सीएम दरबार में न पेश करे।यह घटना हमें भी सिखाती है कि सिस्टम में रहकर लड़ाई लड़नी हो तो ‘सच्चाई’ का दामन थामे रहना चाहिए, वरना झूठ का गुब्बारा फूटने में वक्त नहीं लगता।