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विद्युत जामवाल ने फिर दिखाया स्टंट्स का जलवा

भारतीय सिनेमा जगत में जब भी धमाकेदार एक्शन, हैरतअंगेज स्टंट्स और बिना बॉडी डबल के रियल फाइट सीन्स की बात होती है, तो बॉलीवुड के असली 'एक्शन किंग' विद्युत जामवाल का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। अपनी नई फिल्म के साथ विद्युत एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर चुके हैं। सिनेमाघरों में दस्तक देते ही फिल्म को देखने के लिए एक्शन प्रेमियों और विद्युत के फैंस की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। फिल्म में विद्युत जामवाल का खतरनाक अंदाज, मार्शल आर्ट्स का हुनर और रोंगटे खड़े कर देने वाले फाइट सीक्वेंस दर्शकों को थिएटर में सीट से बांधे रखने का काम करते हैं। लेकिन एक शानदार और यादगार फिल्म बनने के लिए केवल मुक्के और लातें ही काफी नहीं होतीं, बल्कि उसकी रीढ़ की हड्डी उसकी कहानी और पटकथा होती है। दुर्भाग्य से, एक्शन के मोर्चे पर बाजी मारने के बावजूद यह फिल्म कमजोर और ढीली पटकथा की वजह से दर्शकों को निराश करती नजर आ रही है। आइए एक निष्पक्ष फिल्म समीक्षक और रिपोर्टर की नजर से देखते हैं इस फिल्म का पूरा और सच्चा रिपोर्ट कार्ड।

विद्युत जामवाल का सिंसियर परफॉर्मेंस और हैरतअंगेज एक्शन सीक्वेंस

अगर इस फिल्म के सबसे मजबूत पक्ष की बात करें, तो वह बिना किसी शक के खुद विद्युत जामवाल हैं। उन्होंने हर बार की तरह इस बार भी साबित कर दिया है कि एक्शन और मार्शल आर्ट्स के मामले में उनका कोई तोड़ नहीं है। फिल्म के हर फाइट सीन में विद्युत का समर्पण और कड़ी मेहनत साफ झलकती है। चेस सीक्वेंस, हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और हाई-ऑक्टेन स्टंट्स इतने परफेक्शन के साथ शूट किए गए हैं कि आप कुछ पलों के लिए अपनी पलकें झपकाना भूल जाएंगे। उनका स्क्रीन प्रेजेंस और मस्कुलर अवतार फैंस के लिए किसी विजुअल ट्रीट से कम नहीं है। विद्युत ने अपनी एक्टिंग और डायलॉग डिलीवरी में भी सुधार दिखाया है, जहां वे एक बदले की आग में जलते और अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते योद्धा के रूप में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनके साथ नजर आने वाले सह-कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करने का प्रयास किया है, लेकिन कमजोर लेखन के आगे उनकी मेहनत भी फीकी पड़ जाती है।

स्क्रीनप्ले और कहानी के मोर्चे पर बुरी तरह मात खा गई फिल्म

एक्शन प्रेमियों को भले ही विद्युत के पंच और किक्स पसंद आएं, लेकिन जब बात एक ठोस कहानी की आती है, तो फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। फिल्म की कहानी बेहद पुरानी, घिसी-पिटी और प्रेडिक्टेबल (पूर्वानुमानित) है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे हम 90 के दशक की कोई घिसी-पिटी बदले की कहानी देख रहे हों। स्क्रीनप्ले इतना कमजोर है कि पहले हाफ के बाद ही दर्शक आसानी से अंदाजा लगा लेते हैं कि अगले सीन में क्या होने वाला है। फिल्म के निर्देशक ने सारा ध्यान केवल एक्शन कोरियोग्राफी पर केंद्रित रखा और कैरेक्टर डेवलपमेंट तथा इमोशनल कनेक्ट पर कोई काम नहीं किया। जब तक किसी फिल्म के किरदारों के साथ दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता, तब तक पर्दे पर होने वाली मारधाड़ बेअसर ही लगती है। यही वजह है कि फिल्म का सेकेंड हाफ खींचा हुआ और उबाऊ महसूस होने लगता है।

बैकग्राउंड म्यूजिक और डायरेक्शन: कहां रह गई बड़ी कमी?

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर एक्शन सीन्स के दौरान उत्साह तो भरता है, लेकिन कुछ जगहों पर यह इतना तेज और लाउड हो जाता है कि संवाद सुनना भी मुश्किल हो जाता है। छायांकन यानी सिनेमैटोग्राफी की तारीफ करनी होगी, जिसने एक्शन लोकेशनों और फाइट सीन्स को भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर का लुक दिया है। हालांकि, डायरेक्शन के मोर्चे पर फिल्म काफी पिछड़ती दिखती है। निर्देशक अगर एक्शन के साथ-साथ कहानी में कुछ नए ट्विस्ट और टर्न्स जोड़ने का साहस दिखाते, तो यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ एक्शन फिल्मों की सूची में शामिल हो सकती थी। सपोर्टिंग कास्ट और विलेन के किरदार को भी इतना कमजोर लिखा गया है कि वे विद्युत के सामने टिक ही नहीं पाते, जिससे दोनों के बीच का टकराव उतना रोमांचक नहीं बन पाता जितनी उम्मीद की जा रही थी।

बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन और दर्शकों का अंतिम फैसला

फिल्म के फर्स्ट डे फर्स्ट शो से निकल रहे दर्शकों का मिला-जुला रिएक्शन सामने आ रहा है। एक तरफ जहां विद्युत जामवाल के डाई-हार्ड फैंस और सिर्फ मारधाड़ पसंद करने वाले युवा इस फिल्म को जमकर एंजॉय कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कंटेंट आधारित फिल्में पसंद करने वाले परिवार और न्यूट्रल दर्शक कहानी की कमी के कारण निराश होकर बाहर निकल रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म अपने ओपनिंग वीकेंड में विद्युत की तगड़ी फैन फॉलोइंग के दम पर अच्छी कमाई तो कर सकती है, लेकिन कमजोर वर्ड ऑफ माउथ (Word of Mouth) की वजह से लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिके रहना इसके लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। निष्कर्ष के तौर पर कहा जाए तो अगर आप सिर्फ और सिर्फ बेमिसाल एक्शन और विद्युत जामवाल के स्टंट्स देखने के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक हो सकती है, लेकिन यदि आप एक मजबूत और बांधकर रखने वाली कहानी की उम्मीद में जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपको मायूस कर सकती है।

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