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वैश्विक व्यापार युद्ध भड़का! ट्रंप ने इजरायल-EU समेत 60 देशों पर लगाया नया टैरिफ, भारत भी लपेटे में

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने पूरी दुनिया के व्यापारिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत, यूरोपीय संघ (EU), इजरायल और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामानों पर 10% से लेकर 12.5% तक का भारी-भरकम नया टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। शुक्रवार से लागू हुए इस ऐतिहासिक और सख्त फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने अपने सबसे करीबी रणनीतिक मित्र इजरायल को भी इस आर्थिक कार्रवाई से बाहर नहीं रखा है, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर एक नया ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका गहरा गई है।

जबरन मजदूरी (Forced Labor) का गंभीर आरोप और ट्रेड एक्ट की धारा 301

वाशिंगटन से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अमेरिका ने इन 60 देशों पर आरोप लगाया है कि वे अपने यहां जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बनने वाले सामानों के आयात और व्यापार पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत यह सख्त कार्रवाई की है, जो अमेरिकी वाणिज्य को प्रभावित करने वाली अनुचित व्यापार नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति को ऐसे कड़े कदम उठाने का विशेषाधिकार देती है। यह नई दरें उस अस्थायी वैश्विक टैरिफ की जगह लेंगी जो हाल ही में समाप्त हुआ है।

इजरायल से लेकर न्यूजीलैंड तक मचा बवाल, किस देश पर कितना लगा टैक्स

अमेरिकी प्रशासन ने इन 60 देशों को उनकी मौजूदा नीतियों के आधार पर दो अलग-अलग स्लैब में बांटा है।

  • 10% का टैरिफ स्लैब: इस श्रेणी में भारत, यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन, कनाडा, मैक्सिको और पाकिस्तान समेत 17 देशों को रखा गया है। इन देशों को थोड़ी राहत इसलिए मिली क्योंकि इन्होंने जबरन मजदूरी रोकने के लिए कुछ आंशिक कानून या प्रतिबद्धताएं दिखाई हैं।

  • 12.5% का टैरिफ स्लैब: चीन, इजरायल, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे बाकी 43 से अधिक देशों पर 12.5% का सीधा अतिरिक्त आयात शुल्क थोप दिया गया है।

    इस फैसले से अमेरिकी बाजारों में आने वाले कुल आयात का करीब 99.4% हिस्सा सीधे प्रभावित होने जा रहा है, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है।

भारतीय निर्यातकों को तगड़ा झटका, कच्चे तेल और गैस को मिली राहत

इस फैसले से भारत के कपड़ा, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और कृषि आधारित निर्यात क्षेत्रों को सीधी चोट पहुंचने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए कुछ चुनिंदा जरूरी सामानों जैसे कच्चा तेल (Crude Oil), प्राकृतिक गैस (Natural Gas), चुनिंदा उर्वरक (Fertilizers) और आवश्यक कृषि उत्पादों को इस टैरिफ के दायरे से बाहर (Exempted) रखा है ताकि अमेरिकी घरेलू बाजार में महंगाई बेलगाम न हो जाए।

वैश्विक प्रतिक्रिया: सहयोगियों ने अमेरिकी कदम को किया खारिज

यूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड समेत कई प्रमुख अमेरिकी सहयोगियों ने वाशिंगटन के इस फैसले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। व्यापार विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जबरन मजदूरी की समस्या वैश्विक है और अमेरिका खुद भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं है, ऐसे में केवल व्यापारिक वॉल्यूम के आधार पर मित्र देशों को निशाना बनाना अनुचित और जवाबी आर्थिक कार्रवाइयों को न्यौता देने जैसा है।

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