देश

‘सभी चुनाव में धांधली, पारित कानून अवैध’: CEC-SIR विवाद पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, ज्ञानेश कुमार से मांगा इस्तीफा

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सीधा मोर्चा खोल दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज से जुड़े चर्चित 'SIR विवाद' को केंद्र में रखते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में लोकतंत्र और संविधान के मूल ढांचे को ध्वस्त करने का एक संगठित प्रयास चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली और वोट चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे देश की समूची चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता कटघरे में खड़ी हो गई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता के वास्तविक जनादेश को दरकिनार कर जब गलत तरीके से जनप्रतिनिधि संसद के भीतर पहुंचते हैं, तो उस संसद के जरिए पास किया गया हर एक कानून अपनी संवैधानिक और कानूनी वैधता पूरी तरह खो देता है।

'इंदिरा गांधी भी चुनाव हारी थीं, तो फिर बीजेपी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी गायब क्यों'

राहुल गांधी ने भारतीय चुनावी राजनीति के ऐतिहासिक संदर्भों को सामने रखते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के चुनावी नतीजों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत के राजनीतिक इतिहास में हर चुनी हुई सरकार के खिलाफ समय के साथ स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकंबेंसी पैदा होती है, जिसे कोई भी राजनेता झुठला नहीं सकता। अपने तर्क को पुख्ता करते हुए उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण दिया कि 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम जैसा ऐतिहासिक युद्ध जीतने और अभूतपूर्व वैश्विक ख्याति हासिल करने के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी कद्दावर और लोकप्रिय नेता को भी 1977 के आम चुनावों में पराजय का सामना करना पड़ा था। राहुल गांधी ने सवाल दागा कि जब देश के इतने बड़े और ऐतिहासिक नेताओं के खिलाफ जनता का गुस्सा काम कर सकता है, तो फिर पिछले दस वर्षों में केंद्र की मौजूदा बीजेपी सरकार के खिलाफ यह एंटी-इनकंबेंसी पूरी तरह बेअसर और गायब कैसे हो जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी नेता की व्यक्तिगत लोकप्रियता समझ में आ सकती है, लेकिन हर राज्य और हर चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का अचानक खत्म हो जाना एक ऐसा गंभीर सवाल है जिसका जवाब पूरे देश और हर जागरूक नागरिक को गंभीरता से खोजना होगा।

'चोरी के वोटों से पहुंचे सांसदों के बनाए सभी कानून पूरी तरह गैरकानूनी'

संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विस्तार से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी भी जीवंत लोकतंत्र की असली नींव आम नागरिक का एक निष्पक्ष वोट होता है। संविधान ने इसी एक वोट की ताकत से जनता को अपनी सरकार और अपने प्रतिनिधि चुनने का संप्रभु अधिकार दिया है, और इस बुनियादी अधिकार की रक्षा करने की सबसे बड़ी पवित्र जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग को सौंपी गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब वोट की चोरी कर ली जाती है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि संविधान की आत्मा को समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब धांधली और वोट हेराफेरी के सहारे सांसद संसद भवन के भीतर प्रवेश करते हैं, तो वे जनता के वास्तविक प्रतिनिधि नहीं रह जाते। ऐसे में उन तथाकथित सांसदों द्वारा ध्वनि मत या बहुमत से पारित किया गया हर एक विधेयक और बनाया गया हर कानून पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि यह केवल विपक्षी दलों या किसी एक पार्टी पर हमला नहीं है, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के अपने मनपसंद नेता को चुनने के मौलिक संवैधानिक अधिकार पर एक सीधा और खुला हमला है।

'ज्ञानेश कुमार को मोदी-शाह ने चुना, अब आयोग के दो चुनाव आयुक्त ही खोल रहे पोल'

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यशैली को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई थी। उन्होंने दावा किया कि आज स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि खुद चुनाव आयोग के भीतर से ही संस्थागत विद्रोह की आवाजें उठने लगी हैं। राहुल ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के ही दो अन्य चुनाव आयुक्त अब यह खुलकर मान रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भारत की पारदर्शी वोटिंग व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि जब आयोग के अंदर बैठे जिम्मेदार संवैधानिक पदाधिकारी खुद मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर वोटिंग सिस्टम को डैमेज करने का आरोप लगा रहे हों, तो इससे बड़ा कोई दूसरा सबूत नहीं हो सकता कि देश में चुनावों की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। राहुल गांधी ने कहा कि वोटों की रक्षा करना ही चुनाव आयोग का एकमात्र और सबसे बड़ा दायित्व है, और अगर यह दायित्व ही खतरे में पड़ जाए तो इसका साफ मतलब है कि देश का संविधान सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा है।

'ज्ञानेश कुमार तुरंत दें इस्तीफा, देश के खिलाफ किए काम का परिणाम भुगतना पड़ेगा'

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से बिना किसी देरी के तत्काल पद छोड़ने की मांग की। राहुल गांधी ने खुलासा किया कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार की संदिग्ध कार्यप्रणाली और चुनावी अनियमितताओं को लेकर औपचारिक पत्र लिखे थे, लेकिन उन पत्रों और आपत्तियों पर आयोग की तरफ से कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि वे एक बहुत पढ़े-लिखे और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी हैं, उन्हें यह भली-भांति समझना चाहिए कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ क्या किया जा रहा है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आपने जो किया है वह सीधे तौर पर भारत के बुनियादी हितों और लोकतंत्र के खिलाफ है, क्योंकि आपका मुख्य दायित्व देश के वोटों की निष्पक्ष रक्षा करना था न कि चुनाव चोरी में सत्ता का सहयोगी बनना। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस लोकतांत्रिक अपराध के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे और जो लोग भी इस व्यवस्था को विकृत करने के जिम्मेदार हैं, उन्हें आज नहीं तो कल कानून और जनता की अदालत में सजा जरूर मिलेगी।

'तीन साल से हो रही वोट चोरी, आज चुनाव आयोग के विवाद ने सच कर दिया साबित'

प्रेस वार्ता में पत्रकारों द्वारा पूछे गए तीखे सवालों का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी और विपक्षी गठबंधन पिछले तीन वर्षों से लगातार पूरे देश में यह बात पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं कि चुनावों में निष्पक्षता नहीं बची है और लगातार वोट चुराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जब विपक्ष ईवीएम, वीवीपैट और चुनाव प्रक्रिया की गड़बड़ियों पर सवाल उठाता था, तो सत्ता पक्ष और खुद आयोग इसे केवल चुनावी हार की हताशा बताकर खारिज कर देता था। लेकिन आज जिस तरह से चुनाव आयोग के भीतर 'SIR विवाद' भड़का है और आंतरिक खींचतान सार्वजनिक हुई है, उससे यह पूरी तरह साबित हो गया है कि तीन साल से कही जा रही विपक्ष की बात शत-प्रतिशत सच थी। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग के अपने बयानों और आंतरिक असंतोष ने एक प्रकार से यह आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है कि भारतीय चुनाव प्रणाली में भारी विसंगतियां मौजूद हैं और देश भर में चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए जा रहे हैं।

Back to top button