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समंदर में फंसी भारत की ऊर्जा फारस की खाड़ी में अटके 10 विदेशी जहाज, रसोई गैस और कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडराया संकट

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताजनक खबर सामने आ रही है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के पास जारी तनाव के कारण भारत आने वाले कम से कम 10 विदेशी झंडे वाले जहाज (Foreign-flagged ships) फारस की खाड़ी में फंस गए हैं। इन जहाजों में भारी मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil), एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) लदा हुआ है। केंद्र सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है।विदेशी जहाजों के साथ 18 भारतीय पोत भी कतार मेंनौवहन मंत्रालय (Shipping Ministry) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, केवल विदेशी जहाज ही नहीं बल्कि 18 भारतीय ध्वज वाले जहाज भी इसी क्षेत्र में अटके हुए हैं। फंसे हुए 10 विदेशी जहाजों में से तीन में रसोई गैस (LPG), चार में कच्चा तेल और तीन में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भरी हुई है। मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सरकार की पहली प्राथमिकता भारतीय जहाजों और उन पर सवार लगभग 485 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस बीच दो एलपीजी जहाजों—BW TYR और BW ELM—का सुरक्षित निकलना एक राहत भरी खबर है, जो जल्द ही मुंबई और मंगलुरु बंदरगाह पहुंचेंगे।आसमान छूता बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई का खर्चयुद्ध के हालातों ने वैश्विक शिपिंग बाजार की कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ‘हाई-रिस्क एरिया’ घोषित किए जाने के बाद जहाजों का बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) कई गुना बढ़ गया है। पहले जो प्रीमियम बीमित मूल्य का 0.04% होता था, वह अब उछलकर 0.7% या उससे भी अधिक हो गया है। इसका सीधा असर आयात की लागत पर पड़ रहा है, जिससे भविष्य में ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।सरकार की तैयारी: नहीं होने दी जाएगी घरेलू किल्लतभले ही समंदर में स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने घरेलू आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) को प्राथमिकता दी है। औद्योगिक क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति में मामूली कटौती की गई है ताकि घरों में रसोई गैस की कमी न हो। इसके साथ ही, भारत अब अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से वैकल्पिक तौर पर गैस और तेल की खरीदारी तेज कर रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता के जोखिम को कम किया जा सके।

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